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भारत से मिले मुर्रा पारा से पहला पारा का जन्म

 

मुर्रा साँड़ नस्ल सुधार कार्यक्रम सफल

राँझा (बाँके) – नेपाल सरकार द्वारा पशुपालन के माध्यम से किसानों की जीवनशैली में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया नस्ल सुधार कार्यक्रम सफल रहा है। इस कार्यक्रम के तहत भारत से लाए गए मुर्रा पारा के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराए गए भैंसों में से पहला पारा  जन्मा है।

बाँके जिले के खजुरा गाँवपालिका-2 एल गाँव निवासी किसान बमराज रेग्मी के भैंस ने इस प्रक्रिया से एक स्वस्थ पारा को जन्म दिया है। उन्होंने बताया कि पहले उनकी भैंस को गर्भधारण में समस्या हो रही थी, लेकिन जब राष्ट्रीय पशु प्रजनन कार्यालय नेपालगंज गौघाट में मुर्रा साँड़ उपलब्ध हुआ, तो उन्होंने इसका प्रयोग किया और सफल परिणाम प्राप्त हुआ।

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रेग्मी ने बताया, “भैंस पूरी तरह स्वस्थ है और उसने अच्छा दूध देना भी शुरू कर दिया है। अब इस उन्नत नस्ल के पारा को बड़ा कर गाँव के अन्य भैंसों में नस्ल सुधार के लिए प्रयोग किया जाएगा।”

भारत से मिले मुर्रा पारा से वीर्य संकलन

राष्ट्रीय पशु प्रजनन कार्यालय नेपालगंज गौघाट के प्रमुख, डॉ. खिमानंद खनाल, ने बताया कि भारत सरकार द्वारा नेपाल को अनुदान में दिए गए मुर्रा पारा से पिछले वर्ष से वीर्य संकलन शुरू किया गया था। यह वीर्य अब किसानों को वितरण किया जा रहा है ताकि वे अपने भैंसों में उन्नत नस्ल विकसित कर सकें।

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उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 6 दिसंबर को नेपालगंज लाए गए 15 मुर्रा पारा में से 3 नेपालगंज कार्यालय में रखे गए हैं, जबकि गौघाट में 3 पारा रखे गए हैं। इन पारों में से दो से वीर्य संकलन कर किसानों को वितरण किया जा रहा है।

उन्नत नस्ल प्रमाणन

राष्ट्रीय पशु प्रजनन कार्यालय गौघाट के पशु सेवा प्राविधिक देवनारायण जैसी ने जानकारी दी कि खजुरा में जन्मे इस पारा को 50% मुर्रा नस्ल का प्रमाणपत्र दिया जा सकता है।

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गौरतलब है कि नेपाल को ये मुर्रा साँड़ भारत से तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल की भारत यात्रा के दौरान नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत उपहार स्वरूप प्रदान किए गए थे।

इस सफलता से यह साबित होता है कि नेपाल में भी उन्नत पशु नस्ल सुधार संभव है और इससे किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर आय का अवसर मिलेगा।

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