प्रसिद्ध ग़ज़लकार गुलाम अली का नेपाल में आज पहली बार प्रस्तुति
पाकिस्तान के प्रसिद्ध ग़ज़लकार गुलाम अली इस समय नेपाल में हैं। वह शनिवार को ललितपुर के पुलचौक में आयोजित होने वाले ‘गुलाम अली थ्री जेनरेशन्स ऑन वन स्टेज’ कार्यक्रम के लिए गुरुवार को नेपाल पहुंचे।
गायक अली साधना कला केंद्र द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के लिए 11 सदस्यीय बैंड के साथ दुबई के रास्ते काठमांडू पहुंचे। आयोजकों ने उन्हें काठमांडू के एक होटल में ठहराया है।
अली को लगभग तीन घंटे तक अपनी लोकप्रिय ग़ज़लें गाने का कार्यक्रम है। आयोजक संस्था साधना कला केंद्र के मिलन मोक्तान ने बताया कि पहली बार नेपाल में प्रस्तुति दे रहे अली नेपाल इस प्रस्तुति को लेकर उत्साहित हैं। मोक्तान के अनुसार गायक अली के बेटे आमिर और पोते नजीर भी इस कार्यक्रम में आकर्षक प्रस्तुति देंगे।
गुलाम अली एक प्रसिद्ध पाकिस्तानी ग़ज़ल और पार्श्व गायक हैं। वह गायक बड़े गुलाम अली खान और छोटे गुलाम अली खान के शिष्य हैं। वह एक ग़ज़ल गायक के रूप में प्रसिद्ध हैं।
पाकिस्तान के अलावा वह भारत, नेपाल, बांग्लादेश, अमेरिका, ब्रिटेन और मध्य पूर्व एशिया में भी प्रसिद्ध हैं। उनकी कई ग़ज़लें बॉलीवुड फ़िल्मों में भी शामिल की गई हैं।
गुलाम अली की कई ग़ज़लें लोकप्रिय हैं। इनमें वह फिल्म ‘चुपके चुपके रात दिन’, ‘हंगामा हे क्यों’, ‘यह दिल यह पागल दिल’ और ‘किया है प्यार जिसे’ भी शामिल हैं। उन्होंने पंजाबी गाने भी गाए हैं।
अली ने तत्कालीन राजा महेंद्र द्वारा लिखित गीत ‘किन किन तिम्राे’ भी गाया है। अली ने संगीतकार दीपक जंगम द्वारा लिखित और संगीतबद्ध 4 नेपाली गीत गाए हैं।
1960 में अली ने रेडियो पाकिस्तान, लाहौर के लिए गाना शुरू किया। उन्होंने ‘किन किन तिम्राे तस्वीर’, ‘गजालु ति ठुला ठुला आंख’, ‘लोलाए का ति ठुलाठुला’ और ‘के छ र दीउ’ जैसी नेपाली ग़ज़लें गाई हैं। वे गीत और ग़ज़लें तत्कालीन राजा महेंद्र बीर बिक्रम शाह द्वारा लिखी गई थीं। अली महेंद्र का पसंदीदा गायक थे।
गुलाम अली ने अपने संगीत कैरियर में कई संगीत रचनाएँ जारी की हैं। जिनमें तेरे सहर में, लम्हा लम्हा, महताव, मदहाेश, खुशबू, रब्बा यार मिलादे, पैशन, सजदे, विशाल, अवार्स, परछाइयां, हुस्न-ए-गजल, आवारगी, दिल लगी, गजल, विशाल गजल आदि शामिल हैं।


