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मधेश ज्ञान, तपस्या और शास्त्रार्थ की देवभूमि है : प्रधानमंत्री ओली

 

जनकपुरधाम, 26 चैत्र 2081: प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा है कि मधेश ज्ञान, तपस्या और शास्त्रार्थ की देवभूमि है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस पवित्र भूमि पर कदम रखा, तो उन्हें एक विशेष आध्यात्मिक अनुभूति हुई।

संघीय संरचना के अंतर्गत मधेश अब नेपाल का एक प्रदेश बन चुका है। प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि मधेश चेतना के मामले में अग्रणी रहा है और वर्तमान व्यवस्था की स्थापना में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह प्रदेश इस व्यवस्था की रक्षा में भी अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहेगा।

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प्रधानमंत्री ओली ने कहा, “यह प्रणाली देश और जनता की सेवा के लिए समर्पित होनी चाहिए, और हम अधिकारों के वितरण के लिए उदार हैं। हम परिपूर्ण लोकतंत्र के पक्षधर हैं और इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रणाली का अनुभव आम जनता को दिलाना आवश्यक है। “जनता इस प्रणाली की अनुभूति अपने जीवनशैली और जीवनपद्धति में खोज रही है। यदि लोकतंत्र सभी क्षेत्रों में फलता-फूलता नहीं है, और यदि जनता इसे अपने जीवन में सकारात्मक रूप से नहीं महसूस कर पाती है, तो इसमें विरक्ति उत्पन्न होती है और अंततः लोग इस प्रणाली को त्याग सकते हैं,” उन्होंने कहा।

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प्रधानमंत्री ओली ने मधेश प्रदेशसभा में यह सम्बोधन दिया। हाल के दिनों में वे विभिन्न प्रदेश सभाओं में जाकर जनता को सम्बोधित कर रहे हैं। इसी कड़ी में वे मंगलवार को मधेश प्रदेशसभा पहुँचे।
प्रदेशसभा में सम्बोधन के बाद उनका सिरहा में एक आमसभा को सम्बोधित करने सहित अन्य कार्यक्रम भी तय हैं।

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