ओली-देउवा सहमति: गवर्नर कांग्रेस को, एआईजी नियुक्ति में ओली की पसंद को प्राथमिकता
४ वैशाख, काठमांडू। नेपाल में सत्तारूढ़ गठबंधन में गवर्नर की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस और एमाले के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान अब खत्म हो गई है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और कांग्रेस अध्यक्ष शेरबहादुर देउवा के बीच बुधवार देर रात हुई बातचीत में इस मुद्दे को पैकेज के रूप में सुलझा लिया गया है।
एक उच्च राजनीतिक सूत्र के अनुसार, ओली और देउवा के बीच सहमति बनी है कि गवर्नर का पद कांग्रेस को दिया जाएगा, जबकि पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) के संभावित उम्मीदवार के लिए एआईजी पदोन्नति में ओली की पसंद को प्राथमिकता दी जाएगी।
इससे पहले, गवर्नर के पद पर ओली अपनी जिद पर अड़े थे, वहीं देउवा सिद्धिबिक्रम शाह सहित राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग से नेपाल पुलिस में आए अधिकारियों की एआईजी पदोन्नति के लिए अडिग थे। इस कारण सत्ता साझेदार दलों के बीच तनाव बढ़ गया था।
हालांकि, बुधवार की बातचीत में ओली ने गवर्नर का पद कांग्रेस को देने पर सहमति जताई, और बदले में देउवा ने सिद्धिबिक्रम शाह को एआईजी बनाने की जिद छोड़ दी। इस पैकेज के तहत अब सिद्धिबिक्रम शाह पुलिस प्रमुख के उम्मीदवार नहीं होंगे। गुरुवार को ही एआईजी नियुक्ति के लिए दानबहादुर कार्की, राजन अधिकारी और डॉ. मनोज केसी के नामों की सिफारिश की जा चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान आईजीपी दीपक थापा के कार्यकाल के बाद ओली की पसंद के चन्द्र खापुङ आईजीपी बन सकते हैं। इसके बाद राजन अधिकारी या दानबहादुर कार्की में से किसी एक के आईजीपी बनने की संभावना है, जिसमें ओली का झुकाव अधिकारी की ओर दिख रहा है।
इस समझौते से नेपाल राष्ट्रीय बैंक और नेपाल पुलिस दोनों में तुलनात्मक रूप से बेहतर नेतृत्व की संभावना बढ़ गई है। सूत्र ने कहा, “दोनों नेता अपनी-अपनी चिंताओं को प्रबंधित करने के लिए तैयार हुए, जिससे दोनों संस्थानों में अयोग्य लोग नेतृत्व में नहीं पहुंचेंगे।”
गुरुवार सुबह कांग्रेस के पदाधिकारियों और पूर्व पदाधिकारियों की बैठक में देउवा ने बताया कि एआईजी और गवर्नर दोनों मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा, “एआईजी का मामला मैंने कल ही सुलझा लिया है। इस हफ्ते के अंदर गवर्नर की नियुक्ति हो जाएगी। बात बन गई है।”
इस पर महामंत्री गगन थापा और विश्वप्रकाश पौडेल ने सवाल उठाया कि सहमति किस पर हुई है और नियुक्त होने वाला व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जिसका नाम गर्व के साथ लिया जा सके। जवाब में देउवा ने कहा, “जैसा आप लोग कह रहे हैं, वैसा ही होगा।”
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, देउवा ने इस दौरान नेपाल राष्ट्रीय बैंक के कार्यकारी निदेशक डॉ. गुणाकर भट्ट की ओर इशारा किया। सूत्रों ने बताया कि देउवा ने बुधवार को ओली के साथ मुलाकात के बाद भट्ट के नाम पर सहमति बनाई है। इसके पहले देउवा ने भट्ट से बूढानीलकंठ में मुलाकात भी की थी।
हालांकि, ओली को मनाना देउवा के लिए आसान नहीं था। कांग्रेस महामंत्री गगन थापा ने सरकारी नियुक्तियों में मनमानी और अनावश्यक कामों को लेकर उच्चस्तरीय राजनीतिक संयंत्र की बैठक का बहिष्कार किया था। उपाध्यक्ष पूर्णबहादुर खड्का बीमारी के कारण बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके अलावा, देउवा ने भी सरकार के कामकाज की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी।
पदाधिकारी बैठक में देउवा ने स्वीकार किया कि दोनों दलों के सहयोग और सरकार के कामकाज में कुछ समस्याएं हैं। उन्होंने कहा, “महामंत्रियों ने कहा है कि समस्या है, तो थोड़ी-बहुत समस्या तो है। इसे सुधार कर आगे बढ़ना होगा।”
कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की खुली आलोचना के बाद समाज में सरकार के भविष्य पर सवाल उठने लगे थे। सूत्रों का कहना है कि इसने ओली को गवर्नर के मुद्दे पर सहमति के लिए प्रेरित किया।
१ वैशाख को हुई एमाले की सचिवालय बैठक में भी राजनीतिक नियुक्तियों पर चर्चा हुई थी। एक नेता के अनुसार, प्रधानमंत्री ने खुद कांग्रेस के साथ सहयोग के मुद्दे को उठाया और गवर्नर के अड़ियल रवैये से सत्ता सहयोग को संकट में डालने से बचने की बात कही।
सूत्रों के मुताबिक, करीब एक हफ्ते पहले ही गवर्नर का पद कांग्रेस को देने की मोटामोटी सहमति बन चुकी थी, और बुधवार की बातचीत ने इसे अंतिम रूप दिया।


