सुनसरी जिला के देवानगंज में साम्प्रदायिक दंगा में शक की घेरे में बंग्लादेशी मौलाना

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर
26जुलाई को सुनसरी जिला के देबानगंज में कांवरिया की जत्था द्वारा डी.जे.बजाने को लेकर दो पक्षों में हुयी बबाल में पुलिस द्वारा गोली चलाने जाने से तीन कांवरियों सहित चार युवकों की जान चली वहीं एक दर्जन से अधिक कांवरिया गंभीर रूप से घायल हो गए।जिसका इलाज अभी भी चल रहा है।इस घटना के बाद एक सप्ताह तक मधेश जलता रहा। यातायात ठप हो गयी। विराटनगर, सुनसरी,गोल बाजार,सिरहा, जनकपुरधाम, वीरगंज सहित कई जिलों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। सरकार को सेना बुलानी पड़ी। गृह मंत्री को सुनसरी सहित मधेश प्रदेश के कई जिलों में दौरा करना पड़ा। प्रधानमंत्री बालेन को राष्ट्र के नाम संबोधन करना पड़ा।गृह मंत्री तथा हिन्दू संगठनों के बीच मृतक को शहीद घोषणा,दस लाख की मुबावजा, घायलों को सरकारी खर्च पर इलाज तथा दोषी कारवाई के बाद आन्दोलन स्थिगित करना पड़ा। इस घटना के बाद देबानगंज के तीन लोगों को भारत सीमा से गिरफ्तार किया वहीं 6अन्य को इसी सप्ताह में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। नेपाल सरकार के अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में शक की सूई आई.एस.आई.पर आयी है।इस शक के घेरा में घटना से एक सप्ताह पहले बंग्लादेश से आए 9धर्म गुरु (मौलाना)पर भी है। कहने के लिए वे नेपाल में टूरिस्ट वीजा पर प्राकृतिक सौंदर्य अवलोकन के लिए आए थे लेकिन वे काठमांडू के जामा मस्जिद में ठहरे और नफरती धार्मिक शिक्षा देना शुरू किये। घटना के बाद कोई सद्भाव संदेश भी नहीं जारी किए। दो साल पहले भी सप्तरी जिला के सीमावर्ती क्षेत्रों में एक मुस्लिम जलसा का आयोजन किया था जिसमें भारत, पाकिस्तान, बंग्लादेश, श्री लंका सहित कई राष्ट्रों के मुस्लिम भाग लिए थे। उसमें बहुत से लोग विना वीसा के आए थे।उस समय भी इस पर हिंदू संगठनों ने आपत्ति जतायी थी।इस आयोजन के बाद भी नेपाल के रौतहट, धनुषा जिला में सांप्रदायिक घटना घटी थी। लेकिन सरकार की तत्परता से बड़ी घटनाएं नहीं घटी। सुनसरी जिला सीमांचल के समीप है वहीं बंग्लादेश की सीमा भी निकट है। बंग्लादेशी घुसपैठियों को आने में आसान राह है। खुली सीमा तथा फर्जी आधार कार्ड के आधार पर रोहिंग्या, बंग्लादेशी बड़ी संख्या में नेपाल में प्रवेश कर रहे हैं। नेपाल सरकार इस पर सख्त कार्रवाई कर रही है।

