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न्यायालय के शाखा अधिकारी द्वारा ‘अपहरण’ जैसी कार्रवाई, रेशम चौधरी को अवैध रूप से जेल भेजने का मामला उजागर

 
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काठमांडू, 1 मई 2025 — सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन टीकापुर हत्याकाण्ड में दोषी ठहराए गए रेशम चौधरी को अवैध तरीके से जेल भेजने का मामला सामने आया है। अदालत के एक शाखा अधिकृत महिमानसिंह विष्ट द्वारा लिखे गए विवादास्पद पत्र के आधार पर चौधरी को जेल भेजा गया था, जबकि उक्त पत्र न तो अधिकृत था और न ही कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप।

रेशम चौधरी को 10 साल पुराने टीकापुर घटना में 20 साल की सजा मिली थी, जिसे राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने 12 दिन बाद माफ कर दिया। लेकिन राष्ट्रपति की माफी के बावजूद, विष्ट ने पत्र लिखकर पुलिस से चौधरी को पुनः गिरफ्तार कर जेल भेजने को कहा। यह पत्र न्यायिक प्रक्रिया के विरुद्ध पाया गया।

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चौधरी के वकीलों ने इसे पूरी न्यायिक प्रणाली के लिए एक खतरनाक मिसाल बताया है और कहा है कि यह सिर्फ एक कर्मचारी की गलती नहीं, बल्कि एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और गंभीर जांच होनी चाहिए। सर्वोच्च अदालत ने स्वयं पत्र को अनधिकृत बताते हुए विष्ट को हिरासत में ले लिया है और उनके खिलाफ आपराधिक संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

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यह घटना न केवल न्यायालय की छवि को धूमिल करती है, बल्कि नागरिकों के न्यायिक प्रणाली पर विश्वास को भी हिला देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पर मात्र एक प्रेस विज्ञप्ति से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से ही न्याय व्यवस्था में विश्वास पुनःस्थापित हो सकता है।

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