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स्वराज की माँग आत्मसम्मान की माँग होती है, डा. राउत ने मधेश को जगाने की कोशिश की : श्वेता दीप्ति

CK Raut
 
श्वेता दीप्ति
श्वेता दीप्ति

श्वेता दीप्ति , १९,अप्रिल, काठमांडू | भारत में सामाजिक क्रांति की लहरें एक औपनिवेशिक माहौल में आईं थीं । उन्नीसवीं सदी के भारतीय समाजों में एक ऐसी वैचारिक उथल पुथल शुरु हुई, जिसने सैकड़ों साल की कूपमंडूकता, भेदभाव और धार्मिक असहिष्णुता की जडे खोदनी शुरु कर दी । अँग्रेजी राज्य के औपनिवेशिक अवरोधों के बावजूद वह समय ऐसा था, जिसमें आधुनिकता के राष्ट्रीय शक्ति से भरे अनोखे महाख्यान जन्म ले रहे थे । औपनिवेशिक माहौल में भारत का नवजागरण, बुद्धिवादी जागरुकता के अलावा राष्ट्रीय आत्मपहचान का संघर्ष भी था ।

आज इसी राष्ट्रीय आत्मपहचान के संघर्ष से मधेश गुजर रहा है । बरसों के शोषण और दमन को झेलता मधेश एक सही और मजबूत नेतृत्व की कमी महसूस कर रहा है । आत्मसम्मान, स्वशासन, औपनिवेशवाद का विरोध, राष्ट्रीय आत्मपहचान की अपेक्षा करता शोषित मधेश आज एक सही नीति और सही नेतृत्व की कमी की वजह से फिर से शोषण को ही आत्मसात् करता नजर आ रहा है । जिस उन्माद और मजबूती की अपेक्षा होती है कुछ पा लेने के लिए वह नजर नहीं आ रहा । एक शख्स सामने आया सी.के.राउत जिसने एक बबंडर लाने की कोशिश तो की पर वो सुनामी नहीं बन पाया । भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के समय में बालगंगाधर तिलक ने कहा था स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है । स्वराज की माँग कभी राष्ट्रद्रोह नहीं होता । स्वराज की माँग आत्मसम्मान और राष्ट्रीय पहचान की माँग होती है । डा. राउत ने मधेश को जगाने की कोशिश की उसे यह अहसास दिलाने की कोशिश की कि वह किस तरह और कैसे शोषित हो रहा है । और आज राष्ट्रद्रोह के आरोप में डा. राउत पर मुकदमा चलाया जा रहा है और यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें आजीवन कारावास हो सकती है । कितने आश्चर्य की बात है कि जिस व्यक्ति ने ना तो हत्या की है और ना ही हिंसात्मक आन्दोलन, उस शख्स को आजीवन कारावास देने की बात की जा रही है । एक स्वतंत्र राष्ट्र में क्या अपनी अभिव्यक्ति और किसी एक प्रांत के आत्मपहचान की चाहत इतनी भयंकर हो सकती है ? मधेश को कभी यह भूलना नहीं चाहिए कि उसकी मेहनत से एक वर्ग अमीर हो रहा है और वह अशिक्षा और गरीबी की मार को निरंतर झेलने के लिए विवश है । और अगर मधेश को इस बात और अधिकार से परिचित कराया जा रहा है तो इसमें राष्ट्रद्रोह कहाँ है ? यह कैसा राष्ट्र है जहाँ के प्रतिनिधि बड़े आराम से कह देते हैं कि यहाँ मधेश है ही नहीं । और फिर उसी मधेश से राष्ट्रीयता की उम्मीद करते हैं ।

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CK Raut
डा.सी.के. राउत

आज एक पक्ष ऐसा है जिन्हें लगता है कि मधेश स्वतंत्रता की बात या स्वराज की बात या फिर राजनीतिक स्वतंत्रता की बात की जाएगी तो मधेश पिछड़ जाएगा । पर ऐसी सोच वालों से यह अपेक्षा भी की जानी चाहिए कि क्या वास्तव में केन्द्र के पास ऐसी नीति आज, या आने वाले कल में है जो मधेश को विकास की उच्चता तक पहुँचा सकती है । अगर नहीं है तो फिर आपके पास खोने के लिए है क्या ? राष्ट्रीयता, स्वराज और राष्ट्रद्रोह इन शब्दों के पुनव्र्याख्या और विश्लेषण की आवश्यकता है । तिलक ने कहा था “राजनैतिक स्वतंत्रता से पहले सामाजिक निर्माण का कोई महत्व नहीं होता, मैं राजनैतिक स्वाधीनता को अधिक महत्व देता हूँ । मेरा मत है कि अपना भाग्य निर्मित कर सकने की शक्ति के बिना हमारा राष्ट्रीय उत्थान नहीं हो सकता ।” कहीं ना कहीं इन विचारों के परिदृश्य में मधेश भी बदलाव की अपेक्षा रखता है । राष्ट्रवाद का ढिंढोरा पीटकर जो तथाकथित राष्ट्रवादी आदर्शों की बात करते हैं, वो यह भूल जाते हैं कि यहाँ राष्ट्रीयता के सही आधार की ही कमी है । अधिकारों और पहचान से वंचित तथा शोषित समुदाय से यह अपेक्षा करना निहायत बेमानी और बेतुकी बात होगी । अगर डा.राउत जैसे व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा मिलती है और मधेश इसे स्वीकार कर लेता है तो आगे कई वर्षों तक उसकी विकास और पहचान की राह अवरुद्ध हो जाएगी ।

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1 thought on “स्वराज की माँग आत्मसम्मान की माँग होती है, डा. राउत ने मधेश को जगाने की कोशिश की : श्वेता दीप्ति”

  1. श्वेता दीप्ति जी मै चाहत हुँ आप इस्में घि और डाले, इतना काफी नही है . आग इतनी बढी बने कि भारत को हि निगल ले, जैसे आप ने कहा सैकड़ों साल की कूपमंडूकता, भेदभाव और धार्मिक असहिष्णुता की जडे तो भारत मे हि अधिक है और उसे भी अधिक वेस्टर्न देश मे है जहाँ बढे-बढे मानव अधिकारबादी है . राष्ट्रीय आत्मपहचान किसे कहते हैं कभी आपने श्रीरामको पढा, कभी आपने श्रीगौतम बुद्धको पढा….जिन श्रीराम और बुद्धको पुरा बिस्व ने सहरा जो उनके बिरदारी के भी नही थे ….. नही न, और आप के सी.के.राउत ने भी नही पढा है ..वो तो अंग्रेजके बैज्ञानिक है . उन्हौँने तो श्रीफ २/४ एजेन्सीके लोगौं को पढा है और उनको गुरु मान बैठे . समाजका योग्य निष्ठावान ब्यक्ति समाजको एक बनाता है चाहे वो समाज उसका बिरदारीका हि ना हो, अपने किसी एक वा दो बर्गको ले कर टुक्राता नही है . इसी से पता चल्ता है आप का सी.के.राउत कितना गिर चुका है . आप मधेशकि राष्ट्रीयताकि वात कर्ती हैं कभी आपने इतिहास पढी है मेरा सुझाव है सुरु से पढ़ाना आधे से पढ़ोगी तो आप को सी.के.राउत जैसे लोग हि आपको प्रेरणा देंगे . हम मदेश से पहेले नेपाली है और नेपाली से पहेले मानव है . कोहि भी मानव जहाँ का भी हो, जिस देश का भी हो मानवता से उपर नही उठ्ता तो उसे कसी भी समाजका नेत्रोत्तो लेनेका हक नही होता और आप के सी.के.राउत को नही है . हमे समाजकि बिकाश क्रमके साथ् मधेशी, पहाडी और हिमाल सबके साथ सद्भाव रखकर अपने पडोशी देशको भी प्रेरणा देना है ताकी उनके देश मे हो रहे सामाजिक, धार्मिक, बर्गीय दंगे को प्रेरणा मिल सके . और हम सब एक दुसरे के आधारभूत आवस्यकता पुरा कर सकें .

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