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मधेश प्रदेश सरकार के बजट पर तीखी आलोचना

 

जनकपुरधाम, २४ असार । मधेश प्रदेश सरकार द्वारा आगामी आर्थिक वर्ष 2082/83 के लिए प्रस्तुत बजट को प्रदेशसभा सदस्यों ने कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि नेपाल में सामान्यतः घाटे का बजट प्रस्तुत होता है, लेकिन मधेश सरकार द्वारा लाया गया यह बजट न केवल असंतुलित है बल्कि पूरी तरह से अव्यावहारिक भी है। सांसदों ने यह सवाल उठाया कि ऐसे बजट के आधार पर सरकार एक लाख नागरिकों को रोज़गार कैसे देगी?

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जनकपुरधाम में मंगलवार को ‘राइट्स क्लिनिक’ द्वारा आयोजित बजट संवाद कार्यक्रम में सांसदों ने सरकार के प्रति तीव्र जिज्ञासा एवं असहमति व्यक्त की।

बजट यथार्थपरक नहीं: सांसद रामसरोज यादव

नेपाली कांग्रेस के सांसद रामसरोज यादव ने कहा, “मेरी पार्टी सरकार में है, मैं सत्ता पक्ष में हूं, लेकिन जनता की भावना के विपरीत लाए गए बजट को जस का तस पारित नहीं किया जा सकता।” उन्होंने बिना परामर्श और सूचना लाए गए बजट को यथार्थपरक मानने से इनकार करते हुए कहा कि मधेश की समृद्धि के तीन स्तम्भ — कृषि, पर्यटन और उद्योग — को बजट में प्राथमिकता नहीं दी गई है। इसके विपरीत भौतिक पूर्वाधार में 40 प्रतिशत बजट खर्च किया गया है। उन्होंने इस बजट को पारित करने से पहले संशोधन अनिवार्य ठहराया।

समृद्धि के लिए कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश आवश्यक
यादव ने सामूहिक कृषि प्रणाली, पर्यटकीय पूर्वाधार विकास, और शिक्षा-स्वास्थ्य में बजट बढ़ाने की आवश्यकता जताई। “जब तक जनता शिक्षित और आत्मनिर्भर नहीं होगी, तब तक समृद्ध प्रदेश की कल्पना केवल सपना ही रहेगा,” उन्होंने कहा।

बजट  पुनर्लेखन आवश्यक: सांसद रामअशिष यादव
जनता समाजवादी पार्टी नेपाल के सांसद रामअशिष यादव ने बजट को घाटामुखी, असंतुलित और त्रुटिपूर्ण बताते हुए कहा, “इस बजट में पार्टी कार्यकर्ताओं और बिचौलियों को लाभ पहुंचाने की प्रवृत्ति है। स्थानीय तह के कार्यों में भी प्रदेश सरकार ने बजट आवंटन किया है, जो संघीयता की भावना के खिलाफ है।” उन्होंने दलित, विकलांग और गरीब समुदायों का उल्लेख न होने पर असंतोष जताया।

बजट पर बिचौलियों का नियंत्रण: सांसद विमला अंसारी
पूर्वमंत्री एवं सांसद विमला अंसारी ने बजट को असमान रूप से वितरित बताते हुए आरोप लगाया कि यह बिचौलियों के प्रभाव में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें दलित महिलाओं और सीमान्तकृत समुदायों के लिए अलग कार्यक्रम नहीं हैं। “बजट आबादी के अनुपात में आवंटित होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है,” उन्होंने कहा।

स्वरोजगार की घोषणा सिर्फ कागज़ पर: सांसद कञ्चन विच्छा
प्रदेशसभा सदस्य कञ्चन विच्छा ने कहा कि बजट जनमुखी न होकर बिचौलियामुखी है। “सरकार कहती है कि एक लाख युवाओं को स्वरोजगार दिया जाएगा, लेकिन न तो कल-कारखाना है, न कृषि उत्पादन में निवेश। छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाला कोई प्रावधान नहीं है। फिर रोज़गार कहां से आएगा?” उन्होंने सवाल उठाया।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक शिक्षा सभी के लिए सुलभ नहीं होगी, तब तक सतत विकास संभव नहीं है। “कृषि को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन अधिकांश बजट भौतिक पूर्वाधार पर ही खर्च हो रहा है,” उन्होंने कहा, “स्वरोजगार की बात है, लेकिन किस क्षेत्र में, यह स्पष्ट नहीं है।”

कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं की भी सहभागिता
कार्यक्रम में सांसद जवाहर कुशवाहा, कनिस पटेल, नेपाल पत्रकार महासंघ के केन्द्रीय सदस्य राजेश कर्ण, अनौपचारिक क्षेत्र सेवा केन्द्र के प्रदेश संयोजक राजु पासवान, पत्रकार कैलाश दास, मन्दा कर्ण सहित अन्य वक्ताओं ने भी बजट पर अपनी राय रखी।
राष्ट्रिय मानव अधिकार आयोग मधेश प्रदेश के प्रमुख बुद्धनारायण साहनी ने डिजिटल प्रस्तुति के माध्यम से बजट की समीक्षा की।
कार्यक्रम में दिवाकर उप्रेती, जमुना भुजेल, किरण पासवान, संतोष कर्ण आदि प्रतिभागियों ने सांसदों से बजट से संबंधित सवाल किए।

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