Fri. Oct 16th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

उम्र नहीं जीवन दे, अन्तर्मन में चिन्तन दें –डॉ. कृष्ण जंग राणा

 

काठमांडू, भादव ३ –‘आयु होइन जीवन देउ, अन्तर्मनमा चिन्तन देउ’ अर्थात् उम्र नहीं जीवन दे, अन्तर्मन में चिन्तन दे ये पंक्तियाँ डॉ. कृष्ण जंग राणा के हैं । ये बात डॉ. ने अपनी पुस्तक विमोचन में कही ।
आज काठमांडू में डॉ. राणा के दो पुस्तकों का लोकार्पण किया गया है । डॉ.राणा ९४ वर्ष के हैं । कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए उन्होंने अपनी ही स्व रचित कविता की इन पंक्तियों को कहा । आज उनकी दो पुस्तकें दिल से दिल तक (हिन्दी )तथा मुटुभरि माया (नेपाली)का लोकार्पण किया गया ।
कार्यक्रम में वक्ता के रुप में भाषाविद्, तथा पत्रकार शरत चंद्र बस्ती ने अपनी शुभकामना देते हुए डॉ.राणा की लम्बी उम्र की कामना की । उन्होंने कहा कि मैं केवल इतना कहूँगा इन दोनों पुस्तकों को लेकर, कि ये दोनों पुस्तकें शहद से भरी दो कटोरी है । उन्होंने बताया कि कृष्णाष्टमी के दिन ही जन्में राणा जी पर भी कृष्ण नाम का असर दिखता है ।
इसी तरह उर्दू अकादमी के अध्यक्ष इम्तियाज वफा ने अपने मतंव्य में कहा कि – राणा जी की शायरी में जीवन का सार दिखता है । उन्होंने कहा कि डॉ. राणा बहुत ही नेक इंसान है । उनकी इस कविता संग्रह दिल से दिल तक में १३१ गजलें समाहित हैं । उन्होंने भी डॉ. राणा की लम्बी उम्र और स्वस्थ जीवन की कामना की । । हिन्दी गजलों का उर्दू अनुवाद इम्तियाज वफा ने किया ।
इसी तरह त्रिभुवन विश्वविद्यालय हिन्दी केन्द्रीय विभाग की अध्यक्षा डॉ. श्वेता दीप्ति ने डॉ.राणा के बारे में कहा कि उनके लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं है । इस उम्र में आ जाने के बाद ईश्वर का रुप ले लेते हैं तो मैं उन्हें ईश्वर के रुप में देखती हूँ । हमें आपकी सानिध्यता यूँही मिलती रहे । आप स्वस्थ रहें । आपकी कलम निरंतर चलती रहे ।
इसी तरह भारतीय दूतावास से आए अताशे(हिन्दी) धनेश द्विवेदी ने डॉ.राणा की रचनाओं को लेकर कहा कि – अपनी पंक्तियों को उन्होंने जीवंत रुप दिया है । द्विवेदी ने कुछ अपनी पंक्तियां भी पढ़ी और कुछ डॉ. राणा की भी । द्विवेदी ने भी डॉ. राणा की लम्बी उम्र और स्वस्थ जीवन की कामना की ।
इसी तरह कार्यक्रम में शांति शर्मा, मोहन थपलिया तथा साहित्यकार,गीतकार धीरेन्द्र प्रेर्र्र्मिर्ष ने डां‘. राणा के गजल वाचन किए ।
कार्यक्रम में डॉ. कृष्ण जंग राणा ने सभी को धन्यवाद देते हुए अपनी पंक्ति पढ़ी–
‘आयु होइन जीवन देउ, अन्तर्मनमा चिन्तन देउ’ (उम्र नहीं जीवन दें, अन्तर्मन में चिन्तन दें)
कार्यक्रम के अंत में डॉ. राणा के सुपुत्र ने कहा कि –आज हमारे लिए बहुत ही गर्व का विषय है कि उम्र के इस पड़ाव में आने के बाद भी मेरे पिता साहित्य में जीते हैं । आज उनकी दो पुस्तकों का एक साथ लोकार्पण होना हमारे पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है । कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध विद्वान श्री सनत कुमार वस्ती ने किया।

यह भी पढें   जैन महिला ग्रुप के 11 दिवसीय प्रभु भक्ति कार्यक्रम का शुभारंभ, 21 अक्टूबर तक चलेगा आयोजन

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com