क्या मंत्री अर्याल इस अग्निपरीक्षा का सामना कर पाएंगे ? : विनोदकुमार विमल
विधिवेत्ता ओम प्रकाश अर्याल ने गृह, विधि एवं संसदीय कार्य मन्त्रालय का कार्यभार संभाल लिया है, जो संक्रमणकालीन प्रवंधन की चुनौती का सामना करेंगे l अर्याल को पुलिस का मनोबल बढ़ाने , भौतिक बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण, कानून का शासन स्थापित करने और चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है । अर्याल के सामने सुप्रीम कोर्ट में सुधार और न्यायाधीशों की नियुक्ति में आ रही समस्याओं का समाधान करने की चुनौती है, जिससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा की रक्षा भी हो सकेगी ।
काठमाण्डू, 16 सितम्बर, 2025। गृह, विधि एवं संसदीय कार्य मन्त्रालय का कार्यभार संभालने पहुँचे मंत्री ओम प्रकाश अर्याल को संक्रमणकाल के प्रबंधन के लिहाज से बेहद महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है ।
जेन जी आंदोलन के दौरान गिरे पुलिस के मनोबल को बढ़ाने, गृह प्रशासन के तहत नष्ट हुए भौतिक ढांचे का पुनर्निर्माण करने, कानून का शासन स्थापित करने और संविधान की भावना के अनुरूप कानूनी व्यवस्था में सुधार करते हुए चुनाव कराने की जिम्मेदारी इतनी आसान नहीं लगती l पुलिस संगठन को मजबूत करने में भी ऐसी ही चुनौती है, जिसे राजनीतिक दलों ने कमजोर कर दिया है l
अर्याल के लिए यह एक अग्निपरीक्षा बन गई है कि वे पुलिस को पुनः सक्रिय करें, जो हमेशा लोगों की सेवा में अग्रिम पंक्ति मे रहती है, तथा उन्हें सार्वजनिक सेवा में काम करने के लिए प्रेरित करें l आनेवाले दिन बताएंगे कि आम नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने में वह क्या भूमिका निभाएंगे l
यहाँ तक कि 9 सितम्बर को जेन जी विरोध प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और आगजनी के कारण सुप्रीम कोर्ट भी खंडहर में तब्दील हो गया l अब सुप्रीम कोर्ट में इमारत के ढांचे और राख के अलावा कुछ नहीं बचा है l ऐसे में, आम न्यायाधीश न्याय की विरासत को कायम रखने में अर्याल की भूमिका का इंतजार कर रहे हैं l
अर्याल के पास इस संक्रमणकाल में न्यायपालिका का पुनर्गठन करके इतिहास रचने का एक एक सुनहरा अवसर है l वे इसका कैसे उपयोग करते हैं, यह उनके कार्यों से पता चलेगा l सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक समिति ने भी बताया है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, विकृतियाँ और विसंगतियाँ हैं l जबकि न्यायिक सुधार के लिए बार – बार तैयार की जानेवाली रिपोर्टों का क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है, न्यायाधीशों की नियुक्ति का मुद्दा हमेशा से जटिल रहा है l
एक कहानी गढ़ी जा रही है कि न्यायपालिका अपनी विश्वसनीयता खो रही है क्योंकि न्यायिक परिषद अधिनियम में संशोधन और न्यायाधीशों की नियुक्ति का मुद्दा राजनीतिक दलों की भागीदारी पर आधारित है l अर्याल को इस पर काबू पाने के लिए बहुत समझदारी भरा नेतृत्व प्रदान करना होगा l
वर्तमान में न्यायिक परिषद में राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त सदस्य हैं l ऐसे में, यह देखना हमारे लिए चिंता का विषय बन गया है कि कानून मंत्री द्वारा प्रस्तुत रोडमैप के अनुसार कार्य कैसे आगे बढ़ेगा l लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि बिचौलिया के कारण अदालतों में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है l इस पर नियन्त्रण के लिए एक अलग कानून लाना चाहिए l अर्याल, जिन्होंने वर्षों से न्यायलय में न्यायाधीशों की नियुक्ति पर इसके प्रभाव को करीब से देखा है, निश्चित रूप से अपनी नई योजना के साथ आगे बढेंगे l उन्होंने टिप्पणी की थी कि तत्कालीन केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा संवैधानिक आयोग में 52 अधिकारियों की नियुक्ति पर अदालत के फैसले के बाद अदालत की नींब हिल गई थी l अब वह स्वयं इस निर्णय पर पहुँच गए हैं कि क्या उस कमजोर नींब को फिर से जोड़ना है कि नया ढांचा बनाना है l
प्रस्तुति – विनोदकुमार विमल


