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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75 वाँ जन्‍मदिन, देश विदेश से मिल रही हैं शुभकामनाएँ

17 सितम्बर

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का  17 सितम्बर  को 75वाँ जन्‍मदिन है। दुनिया के सबसे मशहूर नेताओं की फेहरिस्त में शुमार पीएम मोदी के जन्‍मदिन के लिए भाजपा कार्यकर्ता खासा उत्‍साहित हैं। पार्टी उनके जन्‍मदिन को स्‍वच्‍छता पखवाड़ा के तौर पर मना रही है। मोदी पिछले साल लोकसभा जीतने के बाद लगातार तीसरी बार बहुमत की सरकार वाले जवाहर नेहरू के बाद वे दूसरे पीएम बने।
आज जब पीएम मोदी 75 साल के हो रहे हैं, उनकी राजनीतिक ताकत अभी भी सबसे ऊपर है। उनकी पार्टी मुश्किल राज्य में चुनाव लड़ रही है, और सबकी उम्मीद एक ही शख्स पर- नरेंद्र मोदी। वो व्यक्ति जो हार को जीत में बदल सकता है। बीजेपी के कई सर्वे बताते हैं कि चुनाव के आखिरी दौर में जब मोदी कैंपेनिंग पर आते हैं, तो पार्टी की जीत पक्की हो जाती। बड़े चुनावों में- जैसे 2018 में त्रिपुरा की पहली जीत, 2024 में ओडिशा, या 2017 और 2022 में उत्तर प्रदेश की लगातार सफलताएं। इन सब में “मोदी का असर” साफ दिखता है।
लेकिन PM मोदी को सिर्फ सफलता या जमीनी जुड़ाव ही इतना खास नहीं बनाता। उनकी असली ताकत है, झटकों से उबरना और रास्ते की रुकावटों को हटाना। चाहे 2002 गुजरात दंगों के बाद उन पर काफी राजनीतिक दवाब बनाया गया। यहां तक कि इस मामले को राजनीतिक रंग दे भी दिया गया। इसी तरह 2012-2014 में उन्हें जानबूझकर कानूनी जाल में फंसाने की कोशिश की गई, विरोध की ऐसी कड़वी राजनीति किसी को भी तोड़ देती, लेकिन नरेंद्र मोदी नहीं टूटे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आम प्रचारक से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री बनने का पीएम मोदी का सफर काफी प्रेरणादायक है।

पीएम मोदी 24वर्षों में अब तक सात बार शपथ ले चुके हैं। गुजरात के सीएम के तौर पर चार बार और पीएम के रूप में तीन बार शपथ ले चुके हैं। 2024 में पहली बार हुआ था, जब उन्‍होंने चुनाव परिणाम के सिर्फ 5 दिनों बाद पीएम मोदी पद की शपथ ली थी। गुजरात के सीएम से लेकर 2109 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक उन्होंने 6 से 10 दिनों में शपथ ली। वे 24 सालों से सत्ता के मुखिया हैं। 2001 से लेकर 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, 2014 से अब तक देश के पीएम बने हुए हैं। यह भी एक बड़ा रिकॉर्ड है।
यह मजबूत चरित्र उनमें आरएसएस के दिनों से आता है। वहां उन्होंने मुश्किल हालात में जीना और असंभव चुनौतियों का सामना करना सीखा।  29 साल की उम्र में आरएसएस वर्कर नरेंद्र मोदी ने 1979 में गुजरात के मोरबी में बाढ़ वाले इलाके में एक महीने से ज्यादा बिताए? डैम टूटने से तबाही मच गई थी, और मोदी ने छह हफ्ते वहां कीचड़ साफ किया, मरे हुए जानवरों और सड़ते शवों को हटाया, और परिवारों के लिए अंतिम संस्कार किए। यह उनकी पहली आपदा प्रबंधन की मिसाल थी।

इमरजेंसी ने भी मोदी की मुश्किलों से निपटने की कला निखारी। इमरजेंसी के दिनों में नरेंद्र मोदी हमेशा दो या इससे ज्यादा गेट वाले घर में रहते थे, और गुप्त मीटिंग्स की हर छोटी डिटेल पर योजना बनाते थे? कभी वे सिख, स्वामी जी, अगरबत्ती बेचने वाले और पठान के भेष में घूमते थे? मोदी अलग-अलग रूप में यात्रा करते, कभी पुजारी बनकर, कभी अन्य कपड़ों में। एक दिन किसी संघ कार्यकर्ता के घर स्वामी जी के रूप में आए। वे जेल में बंद साथियों से मिलने भी इसी भेष में गए।
इमरजेंसी के दिनों में गिरफ्तारी से बचने के लिए नरेंद्र मोदी ने अक्सर सिख का रूप धारण किया। उनका भेष इतना सही था कि करीबी लोग भी पहचान न पाते। पुलिस फाइलों में मोदी का नाम बड़ा था, और गिरफ्तारी से बचना बड़ी चुनौती थी। लेकिन उन्होंने मौका लपका। वे एंटी-इमरजेंसी किताबों का प्रकाशन करके उन्हें गुजरात भर में बांटने का काम खुद संभालते थे।
ऐसे तजुर्बे बाद में 2001 कच्छ भूकंप के बाद प्रशासक बनने पर काम आए। 2006 में सूरत बाढ़ में मुख्यमंत्री के रूप में वे फिर जमीनी स्तर पर थे, और 2014 में कश्मीर बाढ़ में प्रधानमंत्री के रूप में पहुंचे। 2020 के कोविड संकट में मोदी देश के साथ खड़े रहे। पीएम मोदी की विदेश नीति दुनिया की नजर में है, क्योंकि जो बाइडन, डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता उनकी विदेशी लोकप्रियता पर आश्चर्य करते हैं। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामाेदरदास माेदी जी काे उनके जन्मदिन पर बहुत शुभकामनाएँ ।

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