डा.सी.के.राउत न तो स्वतंत्र रह पा रहे हैं और न ही कैद में ?
काठमांडू, २५ जून | मधेश के सन्दर्भ में हर बार सरकार कुछ ऐसा कर जाती है कि उसकी नीयत पर मधेश को शक होने लगता है । क्यों मधेश को बार बार अपनी उपस्थिति नेपाल में दर्ज करानी पड़ रही है ? क्यों विश्व परिदृश्य के आगे उनकी बातों और समस्याओं को आने नहीं दिया जा रहा है ? क्यों सम्माननीय पद पर आसीन मधेशी मूल के व्यक्ति को अवहेलना झेलनी पड़ रही है ? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब मधेश ढूँढता आया है और जो जनमानस को विचलित भी करती है । ऐसा ही एक सवाल है डा.सी.के.राउत का, जो न तो स्वतंत्र रह पा रहे हैं और न ही कैद में उन्हें रख पाने की स्थिति है । उन्हें बार बार गिरफ्तार करना और फिर छोड़ देना आखिर सरकार करना क्या चाहती है ? ऐसा कर के सरकार खुद ध्यानाकर्षण करवा रही है । राज्य विप्लव के मुद्दे से डा. राउत आरोपमुक्त जरुर हो गए हैं पर सरकार बिना किसी ठोस वजह के उन्हें बार बार गिरफ्तार कर रही है और फिर छोड़ भी रही है । इतना ही नहीं उन्हें पकड़ने के बाद ऐसा माहोल बनाया जाता है जहाँ उग्र भीड़ के द्वारा कुछ भी करवाया जा सकता है । डा. राउत को बार बार जान से मारने की धमकी दी जाती रही है किन्तु इस सन्दर्भ में प्रशासन मौन है । गौर किया जाय तो स्पष्ट जाहिर होता है कि डा. राउत को उनके घर में ही नजरबन्द कर दिया गया है । दाता सम्मेलन को ध्यान में रखकर कल रात ही डा. राउत को लहान में गिरफ्तार किया गया और आज छोड़ दिया गया । हुलाकी न्यूज के अनुसार कल रात से ही मधेशी मूल के लोगों की जगह जगह से पकड़ने का क्रम जारी था । लगभग ७०÷७५ लोग पकड़े जा चुके हैं । आज स्वतन्त्र मधेश संगठन के कई कार्यकर्ता भी हिरासत में लिए गए हैं । लोकतंत्र का यह कौन सा चेहरा हमें दिखाया जा रहा है ? जहाँ व्यक्ति विशेष और प्रदेश विशेष के तहत सरकार के नियम लागु होते हैं । जहाँ प्रशासन, सरकार और संचार सभी मौन हैं । 
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