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वरिष्ठ भारतीय पत्रकार रामाशीष जी का निधन

 

ramashishजुन २९, काठमाडू । वरिष्ठ भारतीय पत्रकार रामाशीषजी का निधन हो गया है । आज सुबह १० बजे हिमाल नर्सिङ होम मे ब्लड प्रेसर(उच्च रक्तचाप) से निधन होने की खबर उनके परिवारजन ने दी है । उनके सुपुत्र भाष्कर कुमार ने बताया कि उनके पार्थिव शरीर को आज शाम तक में सुरसंड ले जाया जाएगा जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा । भारतीय दुतावास से डा. अशोक कुमार, जिपि सिंह, अमर मोक्तान और कृष्ण बहादुर चमान जैसे व्यत्तित्व गण श्रद्धाञ्जली देने के लिए पहँुचे थे । ७८ वर्ष के भारतीय पत्रकार रामाशिष १२ जुन को भारत बिहार राज्य के सीतामढी जिला के सुरसण्ड गांव मे दुर्घटना मे घायल हो गए थे । वरिष्ठ भारतीय पत्रकार रामाशिष को तेज गति के साथ आ रही साईकल ने ठोकर दिया था जिससे उनकी पीठ की हड्डि टूट गयी थी । तकरीवन एक हप्ता से हिमाल नर्सिङ होम मे उपचार हो रहा था । डाक्टर सुशिलकुमार थापा के समुह पत्रकार रामाशिष जी के उपचार मे सक्रिय थे ।

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पत्रकार रामाशिष भारतीय होने पर भी ४६ वर्षो से नेपाली पत्रकारिता, नेपाली राजनीति, नेपाल के सामाजिक, आर्थिक क्षेत्र के अध्ययन और लेखन करते आ रहे थे । नेपाल और भारत के सम्बन्धों को जनस्तर से मजबुत बनाना है इसपर उन्होंने हमेसा जोर दिया । पत्रकार रामाशिष नेपाल मे हुए लोकतन्त्र के आन्दोलनों को उच्च महत्ता के साथ रिर्पोटिङ करते आए थे । उन के लेखन मे एक जादु होता था । वृद्ध होने के बावजूद उनमें जोश अब भी बरकरार था । काठमाडाँै मैतिदेवी में रहकर भारतीय समाचार एजेन्सी हिन्दुस्तान समाचार और युनिवार्ता के लिए रिपोर्टिङ करते आ रहे थे । तत्कालीन सरकार राजा महेन्द्र के समय में ९ जुलाई १९७२ मे सिंहदरबार मे हुए आगलगी के विषय मे रिपोर्टिङ करने की वजह से पत्रकार रामाशिष को नेपाल से देश निकाला भी किया गया था । बि. स. २०४६ साल मे हुए आन्दोलन मे रामाशिष को सरकार ३ बार गिरफ्तार किया था । नेपाल मे लोकतन्त्र के संघर्ष मे लोकतन्त्र के पक्ष मे नेपाली जनता का सन्देश भारतीय जनता को दिया था । वरिष्ठ भारतीय पत्रकार रामाशिष ‘हिमालिनी’ पत्रिका में भी आबद्ध थे । उनकी लेखनी से कितने बुद्धिजीवि और विश्लेषणकार प्रभावित होते थे । हिमालिनी परिवार पत्रकार रामाशिष के निधन से स्तब्ध है, मौन हैं । हिमालिनी परिवार उन के निधन पर श्रद्धाञ्जली अर्पण करता है, और हम उन के परिवार के साथ–साथ हैं ।

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