भारतीय राजदूतावास द्वारा ‘आज के विश्व में भगवद् गीता की प्रासंगिकता’पर सेमिनार आयोजित
हिमालिनी डेस्क, काठमांडू, 18 नवम्बर, 2025 । गीता महोत्सव के अवसर पर भारतीय राजदूतावास ने मंगलवार को ‘आज के विश्व में भगवद् गीता की प्रासंगिकता’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया । जिसका उद्देश्य भगवद्गीता के शाश्वत आध्यात्मिक और दार्शनिक संदेशों को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करना है । सनातन शास्त्रों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था । इसी वजह से हर साल इसी तिथि पर गीता जयंती मनाई जाती है । गीता जयंती का पर्व भगवत गीता के जन्म को समर्पित है मोक्षदा एकादशी के दिन श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र गीता का उपदेश दिया था ।
संगोष्ठी में स्वागत भाषण देते हुए भारतीय दूतावास के मिशन उप-प्रमुख डॉ. राकेश पांडे ने कहा, “गीता भारतीय दर्शन की एक कालजयी कृति है । भगवद् गीता न केवल नैतिक मार्गदर्शन प्रदान करती है बल्कि आचरण की प्रेरणा भी देती है । उन्होंने कहा, “यद्यपि भगवद् गीता हजारों वर्ष पहले लिखी गई थी, परंतु यह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है ।” मिशन के उपप्रमुख डॉ. पांडे ने यह भी बताया कि हरियाणा सरकार इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अवसर पर कुरुक्षेत्र में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रही है ।
त्रिभुवन विश्वविद्यालय, संस्कृत केंद्रीय विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. नारायण प्रसाद गौतम ने भगवद् गीता के महत्त्व और प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘गीता में विभिन्न योग मार्गों — कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग के माध्यम से आत्मा की शुद्धि और परमात्मा के साथ एकत्व प्राप्त करने के मार्ग का वर्णन किया गया है ।’ उन्होंने आगे कहा कि गीता का मुख्य उद्देश्य परिणामों की चिंता किए बिना निष्ठा और समर्पण के साथ अपने धर्म और कर्तव्य का पालन करना है, और इसे व्यावहारिक रूप से लागू करना हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है ।
संगोष्ठी में नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के डॉ. प्रेम राज न्योपाने ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गीता के महत्त्व पर कार्यपत्र प्रस्तुत किया तथा वाल्मीकि कैम्पस, काठमांडू के डॉ. माधव प्रसाद लामिछाने ने बदलती दुनिया के लिए शाश्वत ज्ञान : गीता का महत्त्व पर कार्यपत्र प्रस्तुत किया । इसी प्रकार, त्रिभुवन विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के अंतर्गत योग के प्रोफेसर डॉ. गणेश प्रसाद बराल ने भी आज की दुनिया में भगवद् गीता की प्रासंगिकता पर एक कार्यपत्र प्रस्तुत किया ।
संगोष्ठी के दूसरे चरण में गीता पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम और गीता पर आधारित भजनों की प्रस्तुति हुई । स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के नृत्य गुरु एवं प्रशिक्षक विजय कुमार ने अपने आठ नृत्य कलाकारों के साथ गीता पर आधारित दो नृत्य प्रस्तुत किए । इसी प्रकार, पूरा सभागार गीता पर आधारित मधुर भजनों से गूंज उठा, जिसे हारमोनियम पर राजस्थान, भारत से आए हिंदुस्तानी गायन शिक्षक और कलाकार कौशिक वर्मा तथा तबले पर कलकत्ता से आए मल्हार मुखर्जी ने प्रस्तुत किया ।
संगोष्ठी में त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय और विभिन्न संस्थानों के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे । साथ ही, केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक और छात्र भी उपस्थित थे । सेमिनार का सफल संचालन भारतीय दूतावास के डॉ. धनेश द्विवेदी ने किया ।


