गुनगुनाता मन ही जीवन का सबसे मधुर संगीत है। मन की प्रसन्नता ही जीवन की सबसे सुंदर धुन है : बिमल सर्राफ

बिमल सर्राफ, रक्सौल, पूर्वी चंपारण ।
सृष्टि का प्रत्येक कण संगीत से भरा हुआ है। उगते सूर्य की लालिमा, पक्षियों का कलरव, बहती नदियों की सरसराहट, वर्षा की रिमझिम और मंद समीर की स्पंदनशील गति—सब मिलकर यह संदेश देते हैं कि प्रकृति स्वयं एक अनवरत संगीत है। जब संपूर्ण सृष्टि संगीत के सुरों में बंधी है, तब मनुष्य का जीवन उससे अलग कैसे हो सकता है? वास्तव में जीवन भी एक मधुर राग है, जिसे आनंद, विश्वास, प्रेम और सकारात्मक सोच के साथ ही सुंदर बनाया जा सकता है।
जीवन का वास्तविक संगीत बाहरी वाद्ययंत्रों से नहीं, बल्कि मन की प्रसन्नता से जन्म लेता है। यदि मन शांत और संतुष्ट है, तो संघर्ष भी प्रेरणा बन जाते हैं और यदि मन अशांत है, तो अपार सुख-सुविधाएँ भी आनंद नहीं दे पातीं। इसलिए कहा जा सकता है कि गुनगुनाता मन ही जीवन का सबसे मधुर संगीत है।
आज का युग अभूतपूर्व प्रगति का युग है। विज्ञान ने असंभव को संभव बना दिया है, संचार के साधनों ने दूरियों को मिटा दिया है और सुविधाओं ने जीवन को सरल बना दिया है। किंतु विडंबना यह है कि मनुष्य के चेहरे से सहज मुस्कान और मन से आत्मिक प्रसन्नता कहीं खोती जा रही है। प्रतिस्पर्धा, तनाव, अपेक्षाएँ और भौतिक उपलब्धियों की अंधी दौड़ ने मनुष्य के भीतर के संगीत को धीरे-धीरे मौन कर दिया है। लोग सफलता तो प्राप्त कर रहे हैं, परंतु संतोष खोते जा रहे हैं।
वास्तव में गुनगुनाना केवल गीत गाना नहीं है। गुनगुनाना जीवन जीने की एक कला है। यह वह अवस्था है, जहाँ व्यक्ति परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि अपने विचारों का स्वामी बन जाता है। वह हर चुनौती में अवसर खोजता है, हर असफलता में अनुभव और हर नए प्रभात में नई संभावना देखता है। ऐसा व्यक्ति स्वयं भी प्रसन्न रहता है और अपने संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आशा का संचार करता है।
जीवन का सबसे मधुर संगीत मधुर वाणी, विनम्र व्यवहार, करुणा, सेवा, क्षमा और प्रेम से निर्मित होता है। जिस व्यक्ति के शब्दों में अपनापन और व्यवहार में संवेदना होती है, उसकी उपस्थिति ही दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाती है। इसके विपरीत अहंकार, ईर्ष्या, क्रोध और कटुता ऐसे बेसुरे स्वर हैं, जो जीवन की मधुरता को नष्ट कर देते हैं। इसलिए यदि जीवन को सुंदर बनाना है, तो सबसे पहले अपने मन के तारों को सकारात्मक विचारों से जोड़ना होगा।
यह भी सत्य है कि जीवन में हर दिन एक जैसा नहीं होता। कभी सफलता मिलती है तो कभी असफलता, कभी प्रशंसा मिलती है तो कभी आलोचना। किंतु जो व्यक्ति हर परिस्थिति में अपने मन की मुस्कान को जीवित रखता है, वही जीवन के वास्तविक अर्थ को समझ पाता है। जैसे एक कुशल संगीतकार हर स्वर को साधकर मधुर धुन बनाता है, वैसे ही विवेकशील मनुष्य जीवन की हर परिस्थिति को स्वीकार कर उसे सफलता की सीढ़ी बना लेता है।
जीवन की महानता इस बात में नहीं कि हमने कितना धन, पद या प्रतिष्ठा अर्जित की, बल्कि इस बात में है कि हमारे कारण कितने लोगों के जीवन में आशा, विश्वास और मुस्कान का संचार हुआ। यदि हमारी उपस्थिति से किसी निराश व्यक्ति को हौसला मिले, किसी पीड़ित को सहारा मिले और किसी उदास चेहरे पर मुस्कान लौट आए, तो यही हमारे जीवन का सबसे मधुर संगीत है।
आइए, हम अपने भीतर के संगीत को कभी मौन न होने दें। शिकायतों की जगह कृतज्ञता, निराशा की जगह आशा, घृणा की जगह प्रेम और तनाव की जगह मुस्कान को स्थान दें। हर दिन को एक नई धुन, हर चुनौती को एक नया सुर और हर उपलब्धि को ईश्वर का आशीर्वाद मानकर जीवन को उत्सव की तरह जीएँ।
जब मन गुनगुनाता है, तब जीवन केवल बीतता नहीं, बल्कि महकता है; केवल चलता नहीं, बल्कि प्रेरणा बन जाता है। इसलिए अपने मन की मधुरता को सदैव जीवित रखें, क्योंकि गुनगुनाता मन ही जीवन का सबसे मधुर संगीत है।

रक्सौल

