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उपेन्द्र यादव ने माना सत्ता स्वार्थ के लिए कांग्रेस–एमाले के साथ सहकार्य गलती थी, अधिकार और न्याय के लिए अग्रगामी मोर्चा

 

 संविधान संशोधन से लेकर लाल आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने तक के मुद्दों पर संघर्ष की नेताओं की प्रतिबद्धता

कैलास दास, जनकपुरधाम, 27 सितंबर। 9 दलीय अग्रगामी मोर्चा के नेताओं ने देश में मौजूदा राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और प्राकृतिक संकटों के समाधान के साथ ही उत्पीड़ित, दलित, मधेसी, थारू और पिछड़े समुदायों के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष करने की प्रतिबद्धता जताई है।

जनकपुरधाम में शनिवार को 9 दलीय अग्रगामी मोर्चा की मधेश प्रदेश समन्वय समिति द्वारा आयोजित बृहद कार्यकर्ता सम्मेलन एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम में मोर्चे में शामिल दलों के शीर्ष नेताओं ने संविधान संशोधन, संघीयता को मजबूत करने, समानुपातिक प्रतिनिधित्व, सुशासन, न्याय तथा आंदोलनों के दौरान उठाई गई मांगों को संबोधित करने के लिए साझा अभियान आगे बढ़ाने की बात कही।

जनता समाजवादी पार्टी नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने स्वीकार किया कि सत्ता स्वार्थ के लिए अतीत में नेपाली कांग्रेस और नेकपा एमाले के साथ सहयोग करना उनकी पार्टी की बड़ी गलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कम्युनिस्ट पार्टियां सिद्धांत से विचलित होकर सत्ता-केंद्रित हो गई हैं और देश की मौजूदा स्थिति के लिए एमाले प्रमुख रूप से जिम्मेदार है।

यादव ने कहा कि मधेश प्रदेश के गठन के बावजूद मधेसी समुदाय के शासन, प्रशासन, भाषा और संस्कृति से संबंधित अधिकार अभी तक पूरी तरह स्थापित नहीं हो सके हैं। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर समानुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किए बिना वास्तविक लोकतंत्र स्थापित नहीं हो सकता।

वर्तमान सरकार को ‘कठपुतली सरकार’ की संज्ञा देते हुए यादव ने आरोप लगाया कि नागरिकों पर जन्म से लेकर मृत्यु तक विभिन्न प्रकार के करों का बोझ बढ़ाया जा रहा है। संसद में मधेसी समुदाय के प्रतिनिधि होने के बावजूद अधिकारों के मुद्दे पर प्रभावी आवाज नहीं उठ पाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब सड़क आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

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उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान संशोधन, संघीयता को मजबूत करने, सुशासन और न्याय के मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता से पीछे हट गई है। यादव ने चेतावनी दी कि पर्व-त्योहारों के बाद जनता के न्याय के लिए बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

यादव ने कहा कि रसुवा में आई बाढ़ को सामान्य आपदा के रूप में नहीं, बल्कि बड़े राष्ट्रीय संकट के रूप में लिया जाना चाहिए। उन्होंने बाढ़ के कारणों में विदेशी पक्ष भी जुड़े होने का दावा करते हुए क्षतिपूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहल करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को संयुक्त राष्ट्र महासभा में रसुवा बाढ़ के मुद्दे को प्राथमिकता के साथ उठाना चाहिए।

प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष जनार्दन शर्मा ‘प्रभाकर’ ने स्पष्ट किया कि 9 दलीय अग्रगामी मोर्चे का गठन किसी चुनाव को लक्षित करके नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा राजनीतिक आवश्यकता और उत्पीड़ित वर्गों के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए मोर्चे का गठन किया गया है।

देश में प्रभावी विपक्ष का अभाव दिखाई दे रहा है, ऐसे में सरकार और संसद को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए मोर्चा दबाव और सहयोगी भूमिका निभाएगा, शर्मा ने कहा। उन्होंने बताया कि मोर्चे को तत्काल चुनावी उद्देश्य तक सीमित न रखते हुए दलित, उत्पीड़ित और पिछड़े समुदायों के अधिकारों के लिए दीर्घकालीन अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।

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बबिता पासवान जैसी स्थिति किसी को भी झेलनी न पड़े, इसके लिए राजनीतिक संरचना का निर्माण करने पर जोर देते हुए शर्मा ने कहा कि मोर्चे का विस्तार निचले स्तर तक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मोर्चे में शामिल दलों और नेतृत्व की ओर से कोई कमजोरी होने पर कार्यकर्ताओं और जनता को लगातार खबरदारी करनी चाहिए।

नागरिक उन्मुक्ति पार्टी नेपाल के अध्यक्ष रेशम चौधरी ने आरोप लगाया कि लाल आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करके सरकार मधेसी और थारू समुदाय के साथ और अन्याय कर रही है। उन्होंने कहा कि बार-बार सरकार बदलने के बावजूद किसी भी सरकार ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने में रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने मधेश और थारू आंदोलनों के दौरान गिरफ्तार तथा हिरासत में रखे गए कार्यकर्ताओं की रिहाई और आंदोलन की मांगों को संबोधित करने के लिए राज्य को गंभीर होने की आवश्यकता बताई।

चौधरी ने कहा कि मधेश और थारू आंदोलनों में शामिल कार्यकर्ताओं के अधिकार और न्याय के लिए सभी शक्तियों को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने संगठन को और मजबूत बनाकर संघर्ष को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

आम जनता पार्टी के अध्यक्ष प्रभु साह ने कहा कि देश इस समय राजनीतिक अस्थिरता के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक, जलवायु और प्राकृतिक आपदाओं जैसी बहुआयामी समस्याओं से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि इन संकटों को केवल सत्ता परिवर्तन के दृष्टिकोण से देखने से समाधान नहीं निकाला जा सकता।

अग्रगामी मोर्चे का गठन सरकार गिराने के उद्देश्य से नहीं किया गया है, यह स्पष्ट करते हुए साह ने कहा कि देश को जोड़ना, संकट से बचाना, नया राजनीतिक निकास देना, अतीत की उपलब्धियों की रक्षा करना तथा जनता के अतिरिक्त अधिकार सुनिश्चित करना मोर्चे का उद्देश्य है।

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उन्होंने कहा कि मोर्चे का देशभर में विस्तार करते हुए कार्यकर्ताओं और जनता के साथ संबंध मजबूत किया जाएगा तथा विचार, संगठन और संघर्ष की तैयारी को साथ-साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

जनमत पार्टी के अध्यक्ष डा. सीके राउत ने आरोप लगाया कि राज्य जनता समाजवादी पार्टी नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव को जानबूझकर फंसाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि अतीत में उनके साथ भी राज्य की ओर से इसी तरह का व्यवहार किया गया था। उन्होंने कहा कि अधिकारों के संघर्ष में नेतृत्व का मनोबल मजबूत करने के लिए गांव-गांव पहुंचकर संगठन को मजबूत करना आवश्यक है।

राउत ने राज्य के व्यवहार में दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि हत्या और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, जबकि सामान्य नागरिकों को भी बड़े मामलों में फंसाया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जनआंदोलन और लंबे संघर्ष से प्राप्त अधिकारों को छीनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अधिकारों की रक्षा के लिए परिवर्तनकारी शक्तियों के बीच सहयोग आवश्यक है, उन्होंने कहा।

सम्मेलन में नेताओं ने मोर्चे को संगठनात्मक रूप से निचले स्तर तक विस्तार करते हुए जनता के अधिकार, न्याय, सुशासन और संघीयता के सुदृढ़ीकरण के मुद्दों को साझा अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

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