ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जारी की गई ‘नई दिल्ली घोषणा–पत्र २०२६’
काठमांडू, भाद्र २८ – भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित १८वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (१२ सितंबर) को ‘नई दिल्ली घोषणा–पत्र २०२६’ को लेकर बताया है कि सभी सदस्य देशों ने इसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया है ।
मोदी के अनुसार, किसी भी सदस्य राष्ट्र ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई है । उन्होंने कहा कि इसे आम सहमति से पारित किया गया । ब्रिक्स का विस्तार हो गया है । अब यह ११ देशों का समूह बन चुका है और सदस्य देशों के बीच कई जटिल भू–राजनीतिक मतभेदों के बावजूद यह घोषणा सार्वजनिक की गई है।
संयुक्त घोषणा–पत्र में अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, संवाद और कूटनीति पर जोर दिया गया है । साथ ही, विश्व व्यापार संगठन के नियमों के विपरीत माने जाने वाले एकतरफा सीमा शुल्क और गैर–शुल्क व्यापारिक प्रतिबंधों पर चिंता व्यक्त की गई है ।
घोषणा–पत्र में बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने और वैश्विक मुद्दों पर विभिन्न देशों के दृष्टिकोण का सम्मान करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
ग्लोबल साउथ की सहभागिता बढ़ाने पर जोर –
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, संयुक्त वक्तव्य पर सहमति बनाने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच देर रात तक गहन वार्ता हुई, जो शनिवार सुबह चार बजे तक चली ।
ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के बीच मौजूद क्षेत्रीय और रणनीतिक मतभेदों को देखते हुए सहमति बनाना एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती माना गया । इस प्रक्रिया में भारत ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए विभिन्न पक्षों के बीच सहमति बनाने में योगदान दिया ।
उन्होंने कहा कि “भविष्य की प्रविधि और उत्पादन में ‘ग्लोबल साउथ’ की सहभागिता होनी चाहिए । ब्रिक्स देशों को अपने निर्णय और परिणाम के बीच की दूरी खत्म करने के लिए मिलकर काम करना होगा ।”
घोषणा–पत्र में व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह को निर्बाध बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया गया है ।


