नागरिक चौपाल में मधेश के 34 मुद्दे उठाये गए
भ्रष्टाचार, सुशासन से लेकर जातीय भेदभाव, महिला हिंसा और मानव तस्करी तक के सवाल उठे; प्राथमिकता के आधार पर मुद्दों का चयन कर पैरवी और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी
कैलाश दास, जनकपुरधाम, 27 भदौ। मधेश प्रदेश में सुशासन, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक विकृतियों से जुड़े 34 मुद्दे विभिन्न सरोकारवाले निकायों और व्यक्तियों द्वारा उठाए गए हैं।
नेपाल मधेश फाउंडेशन द्वारा संचालित नागरिक चौपाल में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने सरकारी कार्यालयों में होने वाली रिश्वतखोरी, सेवा प्रवाह में देरी, सेवाग्राहियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, स्थानीय तथा प्रदेश स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार, राजनीतिक पहुंच, रिश्तेदारी और कृपावाद के आधार पर होने वाली नियुक्तियों सहित विभिन्न विषय उठाए।
इसी तरह, कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन दुर्व्यवहार, घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा, जातीय भेदभाव तथा छुआछूत, सामाजिक बहिष्कार, बाल विवाह, युवाओं में बढ़ती नशीली दवाओं की लत, परीक्षा एवं शिक्षा के क्षेत्र में होने वाली अनियमितता और नकल, महिलाओं तथा बच्चों की मानव तस्करी और रोजगार के नाम पर होने वाली ठगी को भी प्रमुख मुद्दों के रूप में प्रस्तुत किया गया।
प्रतिभागियों ने कहा कि मधेश प्रदेश में इस तरह की सामाजिक तथा सुशासन से संबंधित समस्याएं लंबे समय से जड़ जमाए हुए हैं। इनके दीर्घकालीन समाधान के लिए प्रभावी पहल और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
चौपाल में उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए सार्वजनिक पैरवी तथा जनचेतनामूलक अभियान संचालित करने, सरकारी एवं सरोकारवाले निकायों के साथ पैरवी और संवाद करने, बहु-सरोकारवालों के बीच चर्चा को आगे बढ़ाने तथा प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों और नीतियों के कार्यान्वयन की स्थिति के बारे में संबंधित निकायों का ध्यान आकर्षित कराने का सुझाव दिया गया।
इसी तरह, आवश्यक मुद्दों पर शोध तथा प्रमाण जुटाकर समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के विषय पर भी चर्चा हुई।
नेपाल मधेश फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक अनिरुद्ध साह ने कहा कि नागरिक चौपाल में बड़ी संख्या में मुद्दे उठाए गए हैं और अभी भी कुछ महत्वपूर्ण विषय छूट सकते हैं। उन्होंने उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर उच्च, मध्यम और सामान्य श्रेणी में वर्गीकृत कर समाधान की प्रक्रिया में आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “हम सभी मुद्दों का पूरी तरह समाधान करने में सफल न भी हो सकें। लेकिन इनमें से कुछ मुद्दों पर ही सफलता हासिल कर सके तो समाज में व्याप्त विकृतियों को दूर करने, सामाजिक सुधार लाने और सभ्य समाज के निर्माण में योगदान दिया जा सकता है।”
इसी तरह, साहित्यकार एवं पत्रकार नित्यानन्द मंडल ने कहा कि अतीत में गरीब, दलित, दिव्यांग तथा राज्य से संबंधित विभिन्न सवालों को सार्वजनिक पैरवी, जनचेतना अभियान और बहु-सरोकारवालों के बीच संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ाया गया है।
उन्होंने कहा कि नागरिक चौपाल में उठाए गए सवालों को प्राथमिकता के आधार पर वर्गीकृत कर तत्काल संबोधित किए जा सकने वाले, पैरवी की आवश्यकता वाले और अतिरिक्त शोध की जरूरत वाले मुद्दों को अलग-अलग करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “अभी 34 मुद्दे उठाए गए हैं। इनमें से तत्काल पांच मुद्दों का चयन कर पैरवी, संवाद तथा संबंधित सरोकारवाले निकायों के साथ समन्वय के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया जाएगा।”
कार्यक्रम में राजनीतिक विश्लेषक तुलानारायण साह, इन्सेक मधेश प्रदेश के संयोजक राजु पासमान, महिला अधिकारकर्मी जमुना भुजेल, सुभद्रा आले, प्रदीप दत्त सहित एक दर्जन से अधिक प्रतिभागियों ने विभिन्न मुद्दे और सुझाव प्रस्तुत किए।



