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अग्रगामी मोर्चा क्यों ? अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के अनुभव से क्या सीखा जा सकता है ?-विनोदकुमार विश्वकर्मा

 

 

अग्रगामी मोर्चा क्यों ?

अग्रगामी मोर्चा नेपाल में नौ राजनीतिक दलों– जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल, जनमत पार्टी, आम जनता पार्टी, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी, प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी, नेपाल संघीय समाजवादी पार्टी, बहुजन एकता पार्टी, खंबुवान राष्ट्रीय मोर्चा और नेपाल जनमुक्ति पार्टी द्वारा गठित एक राजनीतिक गठबंधन है । यह मोर्चा देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, शासन–व्यवस्था और प्रमुख राजनीतिक दलों की केंद्रीकृत प्रवृत्तियों का विरोध करते हुए एक “वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति” के रूप में उभरने के लिए बनाया गया है । यहाँ मोर्चे के लक्ष्यों, उद्देश्यों, सदस्यता के मानदंडों, संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व प्रणाली और संयुक्त राजनीतिक कार्यक्रम जैसे प्रावधानों पर संक्षेप में चर्चा की गई है ।

घोषणापत्र की प्रस्तावना का लक्ष्य लोकतांत्रिक और प्रगतिशील ताकतों को एकजुट करना है, जो संप्रभुता, राष्ट्रीय स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं । यह मोर्चा राज्य की सत्ता के केंद्रीकरण और तानाशाही प्रवृत्तियों को खत्म करने तथा स्वतंत्रता, समानता, लोकतांत्रिक गणतंत्र और संघवाद पर आधारित एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है । मोर्चा ने यह निष्कर्ष निकाला है कि मौजूदा संविधान में संरचनात्मक खामियों और अस्पष्टताओं के कारण संघवाद को लागू करने में जो चुनौतियां पैदा हुई हैं, उनसे निपटने के लिए संविधान में संशोधन, उसे संशोधित या फिर से लिखने की आवश्यकता है । अवधारणा पत्र में कहा गया है कि राजनीतिक स्थिरता, प्रतिनिधित्व में समानता, प्रांतों के पुनर्गठन और न्याय प्रणाली में सुधार सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक हैं ।

मोर्चा ने कहा है कि वह नेपाली समाज की विविधता जो कई जातियों, भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों वाला है, का सम्मान करते हुए हाशिए पर मौजूद वर्गों और समुदायों के उत्थान को प्राथमिकता देता है ।

मोर्चा ने पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार–मुक्त शासन व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका, सक्षम लोक प्रशासन और गुणवत्तापूर्ण व सुलभ शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को भी प्राथमिकता दी है ।

अवधारणा पत्र में यह भी कहा गया है कि गठबंधन में शामिल पार्टियों को एक ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ (साझा न्यूनतम कार्यक्रम) का पालन करना होगा और मोर्चा के फÞैसलों को मानना होगा । अवधारणा पत्र पर उपेन्द्र यादव (अध्यक्ष, जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल), डॉ. सीके राउत (अध्यक्ष, जनमत पार्टी), प्रभु साह (अध्यक्ष, आम जनता पार्टी), रेशम लाल चौधरी (संरक्षक, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी), संतोष परियार (अध्यक्ष, प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी), रिजवान अंसारी (अध्यक्ष, नेपाल संघीय समाजवादी पार्टी), डॉ. हरिनंदन कुमार रंजन (अध्यक्ष, बहुजन एकता पार्टी), रामकुमार राई (अध्यक्ष, खम्बुवान राष्ट्रीय मोर्चा) और वीरेन्द्र पालुंगवा (अध्यक्ष, नेपाल जनमुक्ति पार्टी) ने हस्ताक्षर किए हैं ।

सदस्यता से संबंधित प्रावधान

अग्रगामी मोर्चा की सदस्यता से जुड़े प्रावधान इस प्रकार हैं –

१. मोर्चा के उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्ध राजनीतिक दल या संगठन इसके सदस्य बन सकते हैं । सदस्य दलों का अपना स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व, संगठनात्मक ढांचा और पहचान बनी रहेगी ।

२. सदस्य दलों को मोर्चा के साझा न्यूनतम कार्यक्रम को स्वीकार करना होगा और

३. सदस्य दलों को मोर्चा के फैसलों और आचार संहिता का सम्मान करना होगा ।

संगठनात्मक ढांचा

इस मोर्चा में राष्ट्रीय, प्रांतीय, जिला और महानगरपालिका ÷ उप –महानगरपालिका स्तरों पर कमेटियां होंगी । यह युवाओं, महिलाओं और बुद्धिजीवियों के लिए संगठन बना सकता है और उन्हें संगठित कर सकता है । हालांकि, राष्ट्रीय स्तर की कमेटी जÞरूरत के आधार पर अन्य स्तरों और चरणों पर अतिरिक्त गठबंधन कमेटियां बनाने का फÞैसला कर सकती है ।

नेतृत्व प्रणाली

मोर्चे के नेतृत्व या समन्वयक का चयन आम सहमति के आधार पर किया जाएगा; वैकल्पिक रूप से, जÞरूरत पड़ने पर बारी–बारी से नेतृत्व करने की प्रणाली अपनाई जा सकती है । नेतृत्व का कार्यकाल एक निश्चित अवधि के लिए होगा, जिसे आपसी सहमति से तय किया जाएगा ।

संयुक्त राजनीतिक कार्यक्रम

चुनावों के लिए एक साझा रणनीति और जÞरूरत के हिसाब से संयुक्त भागीदारी– लोगों की आजीविका से जुड़े आंदोलनों, जन–संघर्षों और अभियानों को संयुक्त रूप से चलाया जाएगा । इसके अलावा, राष्ट्रीय महत्त्व के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण के आधार पर संयुक्त पहल की जाएगी ।

यहाँ अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस का संक्षिप्त परिचय दिया गया है, साथ ही इस बात का विश्लेषण भी है कि अग्रगामी मोर्चा, अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के अनुभव से क्या सीख सकता है ।

अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस

अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस न सिर्फÞ दक्षिण अफ्रÞीका की एक प्रमुख और पारंपरिक राजनीतिक पार्टी है, बल्कि यह रंगभेद के खिलाफÞ लड़ने वाला एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन भी है । इसकी स्थापना ८ जनवरी, १९१२ को ‘साउथ अफ्रÞीकन नेटिव नेशनल कांग्रेस’ के तौर पर हुई थी, लेकिन १९२३ में इसका नाम बदलकर ‘अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस’ कर दिया गया । अपनी स्थापना के बाद और खÞासकर १९४० के दशक से इस पार्टी ने अफ्रÞीकी लोगों को एकजुट किया और राजनीतिक आत्म–निर्णय और अधिकार हासिल करने के लिए अफ्रÞीकी राष्ट्रवाद का रास्ता अपनाया । आम तौर पर इस पार्टी को वामपंथी विचारधारा वाली माना जाता है । इसने सामाजिक–लोकतांत्रिक नीति अपनाई है, जो खुली और मिश्रित अर्थव्यवस्था के साथ–साथ गरीबी दूर करने और सामाजिक कल्याण पर जÞोर देती है ।

नेल्सन मंडेला इस पार्टी के सबसे प्रमुख और अहम नेता थे । उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की गोरी अल्पसंख्यक सरकार द्वारा लागू रंगभेद व्यवस्था का जÞोरदार विरोध किया और इसे खत्म करने के लिए जीवन भर संघर्ष किया । देश और अफ्रÞीकी लोगों के लिए उन्होंने २७ साल तक कड़ी जेल की सजÞा काटी, फिर भी उनका विद्रोही जजÞ्बा और संकल्प कभी नहीं डगमगाया । १९९४ में, देश के पहले ऐतिहासिक बहु–जातीय, लोकतांत्रिक चुनाव में उन्हें दक्षिण अफ्रीका का पहला अश्वेत राष्ट्रपति चुना गया ।उन्होंने १९९४ से १९९९ तक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के तौर पर काम किया । राष्ट्रपति बनने से पहले, वे अश्वेत समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रभावशाली कार्यकर्ता और अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस की सहयोगी संस्था ‘उमखोंतो वे सिजÞवे’ के नेता थे । राष्ट्रपति बनने के बाद, बदला लेने के बजाय उन्होंने ‘सत्य और सुलह आयोग’ के जÞरिए श्वेत और अश्वेत समुदायों के बीच सद्भाव, एकता और राष्ट्रीय मेल–मिलाप को बढ़ावा दिया । उन्हें १९९३ में रंगभेद को शांतिपूर्ण ढंग से खत्म करने और बहु–जातीय लोकतंत्र की नींव रखने के उनके काम के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।

संगठनात्मक ढांचा

अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस का मुख्य सहयोगी और संगठन ‘ट्रिपार्टाइट एलायंस’ है । इस गठबंधन में निम्नलिखित संगठन शामिल हैंः १. साउथ अफ्रÞीकन कम्युनिस्ट पार्टी– वैचारिक और राजनीतिक रूप से, यह पार्टी अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस का सबसे पुराना और अहम हिस्सा है । २. कांग्रेस ऑफÞ साउथ अफ्रÞीकन ट्रेड यूनियंस– यह दक्षिण अफ्रÞीका का सबसे बड़ा ट्रेड यूनियन फÞेडरेशन (मजÞदूर संगठन) है । ३. अफ्रÞीकन नेशनल कांग्रेस– यह गठबंधन की प्रमुख राजनीतिक पार्टी है ।

इसके अलावा, १९५० के दशक में रंगभेद–विरोधी आंदोलन के दौरान, अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में ‘कांग्रेस अलायंस’ बनाया गया था; इस गठबंधन में साउथ अफ्रीकन इंडियन कांग्रेस और अन्य संगठन शामिल थे । अभी, अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस की तीन अलग–अलग शाखाएँ या लीग हैं, जो महिलाओं, युवाओं और अनुभवी बुद्धिजीवियों के लिए काम करती हैं । इनमें से, अनुभवी बुद्धिजीवियों वाली शाखा को सबसे वरिष्ठ माना जाता है; यह समकालीन मुद्दों पर चर्चा और बहस जैसी गतिविधियाँ आयोजित करती है ।यह विंग समकालीन मुद्दों पर चर्चा और बहस जैसे कार्यक्रम आयोजित करता है और पार्टी के लिए नीति–निर्माण को आसान बनाने के लिए एक सेतु का काम कर रहा है ।

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मुख्य विचारधारा

अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस की मुख्य विचारधारा में सोशल डेमोक्रेसी, अफ्रÞीकी राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक समाजवाद शामिल हैं । यह पार्टी वामपंथी राजनीतिक विचारधारा को मानती है । इसकी मुख्य वैचारिक विशेषताएँ इस प्रकार हैंः

१. गठबंधन और अंतर्राष्ट्रीय संबंध– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस, साउथ अफ्रÞीकन कम्युनिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन फÞेडरेशन के साथ एक त्रिपक्षीय गठबंधन का हिस्सा है, और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसके ‘सोशलिस्ट इंटरनेशनल’ के साथ करीबी संबंध हैं ।

२. राष्ट्रीय मुक्ति और लोकतंत्र– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस एक राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन है जिसकी स्थापना १९१२ में हुई थी । इसने रंगभेद और नस्लीय भेदभाव के खिलाफÞ लंबा संघर्ष किया; इसका मुख्य लक्ष्य एक ऐसा देश बनाना है जो एकजुट हो, जहाँ नस्ल के आधार पर भेदभाव न हो और जो लोकतांत्रिक हो ।

३. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक क्रांति– पार्टी ने अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को दिशा देने के लिए ’राष्ट्रीय लोकतांत्रिक क्रांति’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया है । यह समाज में बौद्धिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों तथा समानता की वकालत करती है ।

मुख्य नीतियां और सिद्धांत

अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस की मुख्य नीतियां और सिद्धांत इस प्रकार हैं ः

१. नस्लीय भेदभाव को खत्म करना– अपनी शुरुआत से ही, पार्टी का मुख्य मकसद दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद और नस्लीय भेदभाव को खत्म करना रहा है ।

२. गैर–नस्लवाद– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक ऐसे समाज के निर्माण की नीति अपनाई है जो नस्ल, रंग या धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों को सुनिश्चित करता है ।

३. लोकतांत्रिक समाजवाद– इसने राजनीतिक और आर्थिक समानता हासिल करने के लिए सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक समाजवादी विचारधारा को अपनाया है ।

४. आर्थिक बदलाव– ऐसी नीति पर जÞोर देना जिसमें राज्य, हाशिए पर पड़े और समाज से अलग–थलग समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और गरीबी दूर करने के लिए सक्रिय और कल्याणकारी भूमिका निभाए ।

५. भूमि सुधार– ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने और नागरिकों की जÞमीन तक पहुँच बढ़ाने के लिए जÞमीन के बँटवारे और सुधार कार्यक्रमों को लागू करने की नीति अपनाना ।

अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस से सीखने लायकÞ अहम बातें और अनुभव

अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के संघर्षों, अनुभवों और सीखों ने दुनिया भर के आजÞादी के आंदोलनों और लोकतांत्रिक पार्टियों को गहरी वैचारिक और राजनीतिक समझ दी है । इसी तरह, अग्रगामी मोर्चा के लिए यह बहुत जÞरूरी है कि वह भविष्य की अपनी कार्ययोजना बनाते समय अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के अनुभवों और सीखों पर गंभीरता से विचार करे । मुख्य सीखें और अनुभव इस प्रकार हैं–

१. रंगभेद–विरोधी संघर्ष– संस्थागत नस्लीय अलगाव और गोरे अल्पसंख्यकों के शासन के खÞिलाफÞ दक्षिण अफ्रÞीका के दशकों लंबे संघर्ष से सबक सीखा जा सकता है ।

२. नेतृत्व और आंदोलन– अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस ने रंगभेद के खिलाफÞ लंबे और ऐतिहासिक संघर्ष का नेतृत्व किया । नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं ने इस संघर्ष में अहम योगदान दिया । इस संघर्ष से मोर्चे के नेता भी बहुमूल्य सीख ले सकते हैं ।

३. सिद्धांत और व्यवहार के बीच का अंतर– समानता और सामाजिक न्याय की सैद्धांतिक बातों के बावजूद, शासन–संचालन के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयाँ और भ्रष्टाचार संगठन को निरंतर नवीनीकरण का पाठ सिखाते हैं ।

४. संगठन और एकता– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह सिखाया कि नस्लभेदी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ लड़ने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों (श्रमिक,विभिन्न जातियों, और समुदायों) को एकजुट राष्ट्रीय मंच पर लाना कितना जरूरी है ।

५. विचारधारा में बदलाव की चुनौती– १९९४ में रंगभेद खत्म होने के बाद सत्ता में आने पर, अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस को आजÞादी की लड़ाई वाली सोच से हटकर लोगों की रोजÞमर्रा की जÞरूरतों (रोजÞगार, जÞमीन, शिक्षा और विकास) को पूरा करने के लिए शासन की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी ।

६. सभी वर्गों और समुदायों के बीच एकता– १९१२ में स्थापित अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस, रंगभेद नस्लीय दमन के खिलाफÞ अलग–अलग नस्लों, जातियों, भाषाओं और क्षेत्रों के लोगों को एकजुट करने में सफलरही । अग्रगामी मोर्चे को निश्चित रूप से ऐसी एकता से सबक लेना चाहिए ।

७. दृढ़ संकल्प और सहनशीलता– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस नेएक नसला या समूह की लड़ाई नहीं लड़ी । इसमें अश्वेतों के साथ– साथ भारतीय, रंगीन और कुछ गोरे लोगों को भी शामिल किया गया, जिससे एक राष्ट्रीय आंदोलन बना । नेल्सन मंडेला और अन्य नेताओं ने दशकों तक जेल और प्रतिबंधों का सामना किया । उनका संघर्ष यह सिखाता है कि बड़े लक्ष्यों को पाने के लिए लंबा धैर्य और अटूट विश्वास जरूरी है । सत्ता में आने के बाद अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस को यह अनुभव मिला कि रंगभेद के ऐतिहासिक आर्थिक असमानताओं को दूर करना और भ्रष्टाचार से निपटना एक कठीन कार्य है, जिसके लिए केवल राजनीतिक स्वतंत्रता पर्याप्त नहीं है,बल्कि आर्थिक सुधार भी जरूरी है ।

८. पुरानी और नई पीढि़यों के बीच तालमेल– यह हमें सिखाता है कि पार्टी को जीवंत बनाए रखने के लिए पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं के अनुभव को युवा पीढ़ी की ऊर्जा के साथ मिलाकर पीढि़यों के बीच संवाद बनाए रखना जÞरूरी है ।

९. प्रशिक्षण और मूल्यों को बनाए रखना– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को पार्टी की विचारधारा और उद्देश्यों के बारे में प्रशिक्षित करने के लिए राजनीतिक शिक्षा शिविरों और अनिवार्य फाउंडेशन कोर्स का कॉन्सेप्ट शुरू किया है । अग्रगामी मोर्चे को भी ऐसे कोर्स तैयार करने चाहिए और प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने चाहिए ।

निष्कर्ष

अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस अच्छे शासन, विरासत और जन–विकास के मामले में अग्रगामी मोर्चों के लिए महत्त्वपूर्ण सबक पेश करती है; इतिहास से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण प्रदर्शन होता है । मतदाताओं का समर्थन हासिल करने वाले अग्रगामी मोर्चों को प्रासंगिक बने रहने के लिए मौजूदा आर्थिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करना ही होगा । मोर्चे को आंतरिक लोकतंत्र को संस्थागत बनाना होगा, जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना होगा और अत्यधिक व्यक्ति–केंद्रित नेतृत्व से दूर हटना होगा । हालांकि किसी मोर्चे की सफलता उसके नेतृत्व पर निर्भर करती है, लेकिन उसका संगठनात्मक प्रबंधन और विचारधारा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है । कठोर तानाशाही या भेदभावपूर्ण शासन के खिलाफ सड़कों पर विरोध–प्रदर्शन और निर्णायक मौकों पर लचीला राजनीतिक आंदोलन दोनों ही जÞरूरी हैं । मोर्चे के लिए एक ठोस और साझा एजेंडा बनाना बहुत फायदेमंद है और असल में यह समय की मांग भी है– जिसमें वे सभी वर्ग, क्षेत्र और समुदाय शामिल हों जिन्होंने सदियों से भेदभाव का सामना किया है ।

अग्रगामी मोर्चा क्यों ?
अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के अनुभव से क्या सीखा जा सकता है ?
विनोदकुमार विश्वकर्मा
अग्रगामी मोर्चा क्यों ?
अग्रगामी मोर्चा नेपाल में नौ राजनीतिक दलों– जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल, जनमत पार्टी, आम जनता पार्टी, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी, प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी, नेपाल संघीय समाजवादी पार्टी, बहुजन एकता पार्टी, खंबुवान राष्ट्रीय मोर्चा और नेपाल जनमुक्ति पार्टी द्वारा गठित एक राजनीतिक गठबंधन है । यह मोर्चा देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, शासन–व्यवस्था और प्रमुख राजनीतिक दलों की केंद्रीकृत प्रवृत्तियों का विरोध करते हुए एक “वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति” के रूप में उभरने के लिए बनाया गया है । यहाँ मोर्चे के लक्ष्यों, उद्देश्यों, सदस्यता के मानदंडों, संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व प्रणाली और संयुक्त राजनीतिक कार्यक्रम जैसे प्रावधानों पर संक्षेप में चर्चा की गई है ।
घोषणापत्र की प्रस्तावना का लक्ष्य लोकतांत्रिक और प्रगतिशील ताकतों को एकजुट करना है, जो संप्रभुता, राष्ट्रीय स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं । यह मोर्चा राज्य की सत्ता के केंद्रीकरण और तानाशाही प्रवृत्तियों को खत्म करने तथा स्वतंत्रता, समानता, लोकतांत्रिक गणतंत्र और संघवाद पर आधारित एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है । मोर्चा ने यह निष्कर्ष निकाला है कि मौजूदा संविधान में संरचनात्मक खामियों और अस्पष्टताओं के कारण संघवाद को लागू करने में जो चुनौतियां पैदा हुई हैं, उनसे निपटने के लिए संविधान में संशोधन, उसे संशोधित या फिर से लिखने की आवश्यकता है । अवधारणा पत्र में कहा गया है कि राजनीतिक स्थिरता, प्रतिनिधित्व में समानता, प्रांतों के पुनर्गठन और न्याय प्रणाली में सुधार सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक हैं ।
मोर्चा ने कहा है कि वह नेपाली समाज की विविधता जो कई जातियों, भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों वाला है, का सम्मान करते हुए हाशिए पर मौजूद वर्गों और समुदायों के उत्थान को प्राथमिकता देता है ।
मोर्चा ने पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार–मुक्त शासन व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका, सक्षम लोक प्रशासन और गुणवत्तापूर्ण व सुलभ शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को भी प्राथमिकता दी है ।
अवधारणा पत्र में यह भी कहा गया है कि गठबंधन में शामिल पार्टियों को एक ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ (साझा न्यूनतम कार्यक्रम) का पालन करना होगा और मोर्चा के फÞैसलों को मानना होगा । अवधारणा पत्र पर उपेन्द्र यादव (अध्यक्ष, जनता समाजवादी पार्टी, नेपाल), डॉ. सीके राउत (अध्यक्ष, जनमत पार्टी), प्रभु साह (अध्यक्ष, आम जनता पार्टी), रेशम लाल चौधरी (संरक्षक, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी), संतोष परियार (अध्यक्ष, प्रगतिशील लोकतांत्रिक पार्टी), रिजवान अंसारी (अध्यक्ष, नेपाल संघीय समाजवादी पार्टी), डॉ. हरिनंदन कुमार रंजन (अध्यक्ष, बहुजन एकता पार्टी), रामकुमार राई (अध्यक्ष, खम्बुवान राष्ट्रीय मोर्चा) और वीरेन्द्र पालुंगवा (अध्यक्ष, नेपाल जनमुक्ति पार्टी) ने हस्ताक्षर किए हैं ।
सदस्यता से संबंधित प्रावधान
अग्रगामी मोर्चा की सदस्यता से जुड़े प्रावधान इस प्रकार हैं –
१. मोर्चा के उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्ध राजनीतिक दल या संगठन इसके सदस्य बन सकते हैं । सदस्य दलों का अपना स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व, संगठनात्मक ढांचा और पहचान बनी रहेगी ।
२. सदस्य दलों को मोर्चा के साझा न्यूनतम कार्यक्रम को स्वीकार करना होगा और
३. सदस्य दलों को मोर्चा के फैसलों और आचार संहिता का सम्मान करना होगा ।
संगठनात्मक ढांचा
इस मोर्चा में राष्ट्रीय, प्रांतीय, जिला और महानगरपालिका ÷ उप –महानगरपालिका स्तरों पर कमेटियां होंगी । यह युवाओं, महिलाओं और बुद्धिजीवियों के लिए संगठन बना सकता है और उन्हें संगठित कर सकता है । हालांकि, राष्ट्रीय स्तर की कमेटी जÞरूरत के आधार पर अन्य स्तरों और चरणों पर अतिरिक्त गठबंधन कमेटियां बनाने का फÞैसला कर सकती है ।
नेतृत्व प्रणाली
मोर्चे के नेतृत्व या समन्वयक का चयन आम सहमति के आधार पर किया जाएगा; वैकल्पिक रूप से, जÞरूरत पड़ने पर बारी–बारी से नेतृत्व करने की प्रणाली अपनाई जा सकती है । नेतृत्व का कार्यकाल एक निश्चित अवधि के लिए होगा, जिसे आपसी सहमति से तय किया जाएगा ।
संयुक्त राजनीतिक कार्यक्रम
चुनावों के लिए एक साझा रणनीति और जÞरूरत के हिसाब से संयुक्त भागीदारी– लोगों की आजीविका से जुड़े आंदोलनों, जन–संघर्षों और अभियानों को संयुक्त रूप से चलाया जाएगा । इसके अलावा, राष्ट्रीय महत्त्व के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण के आधार पर संयुक्त पहल की जाएगी ।
यहाँ अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस का संक्षिप्त परिचय दिया गया है, साथ ही इस बात का विश्लेषण भी है कि अग्रगामी मोर्चा, अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के अनुभव से क्या सीख सकता है ।
अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस
अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस न सिर्फÞ दक्षिण अफ्रÞीका की एक प्रमुख और पारंपरिक राजनीतिक पार्टी है, बल्कि यह रंगभेद के खिलाफÞ लड़ने वाला एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन भी है । इसकी स्थापना ८ जनवरी, १९१२ को ‘साउथ अफ्रÞीकन नेटिव नेशनल कांग्रेस’ के तौर पर हुई थी, लेकिन १९२३ में इसका नाम बदलकर ‘अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस’ कर दिया गया । अपनी स्थापना के बाद और खÞासकर १९४० के दशक से इस पार्टी ने अफ्रÞीकी लोगों को एकजुट किया और राजनीतिक आत्म–निर्णय और अधिकार हासिल करने के लिए अफ्रÞीकी राष्ट्रवाद का रास्ता अपनाया । आम तौर पर इस पार्टी को वामपंथी विचारधारा वाली माना जाता है । इसने सामाजिक–लोकतांत्रिक नीति अपनाई है, जो खुली और मिश्रित अर्थव्यवस्था के साथ–साथ गरीबी दूर करने और सामाजिक कल्याण पर जÞोर देती है ।
नेल्सन मंडेला इस पार्टी के सबसे प्रमुख और अहम नेता थे । उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की गोरी अल्पसंख्यक सरकार द्वारा लागू रंगभेद व्यवस्था का जÞोरदार विरोध किया और इसे खत्म करने के लिए जीवन भर संघर्ष किया । देश और अफ्रÞीकी लोगों के लिए उन्होंने २७ साल तक कड़ी जेल की सजÞा काटी, फिर भी उनका विद्रोही जजÞ्बा और संकल्प कभी नहीं डगमगाया । १९९४ में, देश के पहले ऐतिहासिक बहु–जातीय, लोकतांत्रिक चुनाव में उन्हें दक्षिण अफ्रीका का पहला अश्वेत राष्ट्रपति चुना गया ।उन्होंने १९९४ से १९९९ तक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के तौर पर काम किया । राष्ट्रपति बनने से पहले, वे अश्वेत समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रभावशाली कार्यकर्ता और अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस की सहयोगी संस्था ‘उमखोंतो वे सिजÞवे’ के नेता थे । राष्ट्रपति बनने के बाद, बदला लेने के बजाय उन्होंने ‘सत्य और सुलह आयोग’ के जÞरिए श्वेत और अश्वेत समुदायों के बीच सद्भाव, एकता और राष्ट्रीय मेल–मिलाप को बढ़ावा दिया । उन्हें १९९३ में रंगभेद को शांतिपूर्ण ढंग से खत्म करने और बहु–जातीय लोकतंत्र की नींव रखने के उनके काम के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।
संगठनात्मक ढांचा
अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस का मुख्य सहयोगी और संगठन ‘ट्रिपार्टाइट एलायंस’ है । इस गठबंधन में निम्नलिखित संगठन शामिल हैंः १. साउथ अफ्रÞीकन कम्युनिस्ट पार्टी– वैचारिक और राजनीतिक रूप से, यह पार्टी अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस का सबसे पुराना और अहम हिस्सा है । २. कांग्रेस ऑफÞ साउथ अफ्रÞीकन ट्रेड यूनियंस– यह दक्षिण अफ्रÞीका का सबसे बड़ा ट्रेड यूनियन फÞेडरेशन (मजÞदूर संगठन) है । ३. अफ्रÞीकन नेशनल कांग्रेस– यह गठबंधन की प्रमुख राजनीतिक पार्टी है ।
इसके अलावा, १९५० के दशक में रंगभेद–विरोधी आंदोलन के दौरान, अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में ‘कांग्रेस अलायंस’ बनाया गया था; इस गठबंधन में साउथ अफ्रीकन इंडियन कांग्रेस और अन्य संगठन शामिल थे । अभी, अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस की तीन अलग–अलग शाखाएँ या लीग हैं, जो महिलाओं, युवाओं और अनुभवी बुद्धिजीवियों के लिए काम करती हैं । इनमें से, अनुभवी बुद्धिजीवियों वाली शाखा को सबसे वरिष्ठ माना जाता है; यह समकालीन मुद्दों पर चर्चा और बहस जैसी गतिविधियाँ आयोजित करती है ।यह विंग समकालीन मुद्दों पर चर्चा और बहस जैसे कार्यक्रम आयोजित करता है और पार्टी के लिए नीति–निर्माण को आसान बनाने के लिए एक सेतु का काम कर रहा है ।
मुख्य विचारधारा
अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस की मुख्य विचारधारा में सोशल डेमोक्रेसी, अफ्रÞीकी राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक समाजवाद शामिल हैं । यह पार्टी वामपंथी राजनीतिक विचारधारा को मानती है । इसकी मुख्य वैचारिक विशेषताएँ इस प्रकार हैंः
१. गठबंधन और अंतर्राष्ट्रीय संबंध– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस, साउथ अफ्रÞीकन कम्युनिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन फÞेडरेशन के साथ एक त्रिपक्षीय गठबंधन का हिस्सा है, और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसके ‘सोशलिस्ट इंटरनेशनल’ के साथ करीबी संबंध हैं ।
२. राष्ट्रीय मुक्ति और लोकतंत्र– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस एक राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन है जिसकी स्थापना १९१२ में हुई थी । इसने रंगभेद और नस्लीय भेदभाव के खिलाफÞ लंबा संघर्ष किया; इसका मुख्य लक्ष्य एक ऐसा देश बनाना है जो एकजुट हो, जहाँ नस्ल के आधार पर भेदभाव न हो और जो लोकतांत्रिक हो ।
३. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक क्रांति– पार्टी ने अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को दिशा देने के लिए ’राष्ट्रीय लोकतांत्रिक क्रांति’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया है । यह समाज में बौद्धिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों तथा समानता की वकालत करती है ।
मुख्य नीतियां और सिद्धांत
अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस की मुख्य नीतियां और सिद्धांत इस प्रकार हैं ः
१. नस्लीय भेदभाव को खत्म करना– अपनी शुरुआत से ही, पार्टी का मुख्य मकसद दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद और नस्लीय भेदभाव को खत्म करना रहा है ।
२. गैर–नस्लवाद– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक ऐसे समाज के निर्माण की नीति अपनाई है जो नस्ल, रंग या धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों को सुनिश्चित करता है ।
३. लोकतांत्रिक समाजवाद– इसने राजनीतिक और आर्थिक समानता हासिल करने के लिए सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक समाजवादी विचारधारा को अपनाया है ।
४. आर्थिक बदलाव– ऐसी नीति पर जÞोर देना जिसमें राज्य, हाशिए पर पड़े और समाज से अलग–थलग समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और गरीबी दूर करने के लिए सक्रिय और कल्याणकारी भूमिका निभाए ।
५. भूमि सुधार– ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने और नागरिकों की जÞमीन तक पहुँच बढ़ाने के लिए जÞमीन के बँटवारे और सुधार कार्यक्रमों को लागू करने की नीति अपनाना ।
अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस से सीखने लायकÞ अहम बातें और अनुभव
अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के संघर्षों, अनुभवों और सीखों ने दुनिया भर के आजÞादी के आंदोलनों और लोकतांत्रिक पार्टियों को गहरी वैचारिक और राजनीतिक समझ दी है । इसी तरह, अग्रगामी मोर्चा के लिए यह बहुत जÞरूरी है कि वह भविष्य की अपनी कार्ययोजना बनाते समय अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस के अनुभवों और सीखों पर गंभीरता से विचार करे । मुख्य सीखें और अनुभव इस प्रकार हैं–
१. रंगभेद–विरोधी संघर्ष– संस्थागत नस्लीय अलगाव और गोरे अल्पसंख्यकों के शासन के खÞिलाफÞ दक्षिण अफ्रÞीका के दशकों लंबे संघर्ष से सबक सीखा जा सकता है ।
२. नेतृत्व और आंदोलन– अफ्रÞीकी राष्ट्रीय कांग्रेस ने रंगभेद के खिलाफÞ लंबे और ऐतिहासिक संघर्ष का नेतृत्व किया । नेल्सन मंडेला जैसे नेताओं ने इस संघर्ष में अहम योगदान दिया । इस संघर्ष से मोर्चे के नेता भी बहुमूल्य सीख ले सकते हैं ।
३. सिद्धांत और व्यवहार के बीच का अंतर– समानता और सामाजिक न्याय की सैद्धांतिक बातों के बावजूद, शासन–संचालन के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयाँ और भ्रष्टाचार संगठन को निरंतर नवीनीकरण का पाठ सिखाते हैं ।
४. संगठन और एकता– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह सिखाया कि नस्लभेदी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ लड़ने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों (श्रमिक,विभिन्न जातियों, और समुदायों) को एकजुट राष्ट्रीय मंच पर लाना कितना जरूरी है ।
५. विचारधारा में बदलाव की चुनौती– १९९४ में रंगभेद खत्म होने के बाद सत्ता में आने पर, अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस को आजÞादी की लड़ाई वाली सोच से हटकर लोगों की रोजÞमर्रा की जÞरूरतों (रोजÞगार, जÞमीन, शिक्षा और विकास) को पूरा करने के लिए शासन की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी ।
६. सभी वर्गों और समुदायों के बीच एकता– १९१२ में स्थापित अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस, रंगभेद नस्लीय दमन के खिलाफÞ अलग–अलग नस्लों, जातियों, भाषाओं और क्षेत्रों के लोगों को एकजुट करने में सफलरही । अग्रगामी मोर्चे को निश्चित रूप से ऐसी एकता से सबक लेना चाहिए ।
७. दृढ़ संकल्प और सहनशीलता– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस नेएक नसला या समूह की लड़ाई नहीं लड़ी । इसमें अश्वेतों के साथ– साथ भारतीय, रंगीन और कुछ गोरे लोगों को भी शामिल किया गया, जिससे एक राष्ट्रीय आंदोलन बना । नेल्सन मंडेला और अन्य नेताओं ने दशकों तक जेल और प्रतिबंधों का सामना किया । उनका संघर्ष यह सिखाता है कि बड़े लक्ष्यों को पाने के लिए लंबा धैर्य और अटूट विश्वास जरूरी है । सत्ता में आने के बाद अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस को यह अनुभव मिला कि रंगभेद के ऐतिहासिक आर्थिक असमानताओं को दूर करना और भ्रष्टाचार से निपटना एक कठीन कार्य है, जिसके लिए केवल राजनीतिक स्वतंत्रता पर्याप्त नहीं है,बल्कि आर्थिक सुधार भी जरूरी है ।
८. पुरानी और नई पीढि़यों के बीच तालमेल– यह हमें सिखाता है कि पार्टी को जीवंत बनाए रखने के लिए पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं के अनुभव को युवा पीढ़ी की ऊर्जा के साथ मिलाकर पीढि़यों के बीच संवाद बनाए रखना जÞरूरी है ।
९. प्रशिक्षण और मूल्यों को बनाए रखना– अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को पार्टी की विचारधारा और उद्देश्यों के बारे में प्रशिक्षित करने के लिए राजनीतिक शिक्षा शिविरों और अनिवार्य फाउंडेशन कोर्स का कॉन्सेप्ट शुरू किया है । अग्रगामी मोर्चे को भी ऐसे कोर्स तैयार करने चाहिए और प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने चाहिए ।
निष्कर्ष
अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस अच्छे शासन, विरासत और जन–विकास के मामले में अग्रगामी मोर्चों के लिए महत्त्वपूर्ण सबक पेश करती है; इतिहास से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण प्रदर्शन होता है । मतदाताओं का समर्थन हासिल करने वाले अग्रगामी मोर्चों को प्रासंगिक बने रहने के लिए मौजूदा आर्थिक और सामाजिक जरूरतों को पूरा करना ही होगा । मोर्चे को आंतरिक लोकतंत्र को संस्थागत बनाना होगा, जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना होगा और अत्यधिक व्यक्ति–केंद्रित नेतृत्व से दूर हटना होगा । हालांकि किसी मोर्चे की सफलता उसके नेतृत्व पर निर्भर करती है, लेकिन उसका संगठनात्मक प्रबंधन और विचारधारा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है । कठोर तानाशाही या भेदभावपूर्ण शासन के खिलाफ सड़कों पर विरोध–प्रदर्शन और निर्णायक मौकों पर लचीला राजनीतिक आंदोलन दोनों ही जÞरूरी हैं । मोर्चे के लिए एक ठोस और साझा एजेंडा बनाना बहुत फायदेमंद है और असल में यह समय की मांग भी है– जिसमें वे सभी वर्ग, क्षेत्र और समुदाय शामिल हों जिन्होंने सदियों से भेदभाव का सामना किया है ।

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विनोदकुमार विमल

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