मधेश में हुई हालिया घटनाएँ अप्रत्याशित नहीं, सुनियोजित, प्रधानमंत्री ने किया खंडन

मधेश केंद्रित दलों के शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) से मुलाकात कर आरोप लगाया कि मधेश में हुई हालिया घटनाएँ अप्रत्याशित नहीं, बल्कि सुनियोजित थीं।
बैठक के दौरान नेताओं ने अपनी शिकायतें और सुझाव रखते हुए श्रम शक्ति पार्टी के अध्यक्ष हर्क साम्पाङ और गृह मंत्री सुधन गुरुङ की भूमिका पर भी संदेह जताया।
नेताओं का कहना था कि घटना वाले दिन जिले में पुलिस का शीर्ष नेतृत्व मौजूद नहीं था, उसी समय बिजली भी गुल हो गई और बांग्लादेश से आए रोहिंग्या लोगों को सीमा पर नहीं रोका गया। इन परिस्थितियों को आधार बनाकर उन्होंने सरकार पर साजिश का आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद गृह मंत्री सुधन गुरुङ मधेश नहीं गए और नेपाली सेना को मैदान में उतारा गया, जो कई सवाल खड़े करता है। नेता रामकुमार शर्मा के अनुसार, इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए घटना सुनियोजित प्रतीत होती है और इसकी निष्पक्ष एवं तथ्यपरक जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने किसी भी प्रकार की सुनियोजित साजिश से इनकार किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान गृह मंत्री के तत्काल मधेश जाने से और अधिक आशंकाएँ पैदा हो सकती थीं, इसलिए वे शुरू में नहीं गए। हालांकि, उन्होंने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से सुरक्षा स्थिति की लगातार जानकारी ली और संवाद बनाए रखा।
प्रधानमंत्री ने बताया कि बाद में उनके आग्रह पर ही गृह मंत्री सुनसरी गए। उन्होंने स्वीकार किया कि पुलिस के पास दंगा नियंत्रण का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं होने के कारण बार-बार ऐसी समस्याएँ सामने आती रही हैं। बालेन ने कहा, “अब तक जिन लोगों की मौत हुई है, वे पुलिस की गोली से मारे गए हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में पुलिस को दंगा नियंत्रण का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से ही सेना को मैदान में उतारा गया है।
संघीय व्यवस्था के मुद्दे पर अपने ऊपर लगाए जा रहे संदेहों को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने मैथिली भाषा में कहा, “देश में राजतंत्र आएगा, संघीयता समाप्त हो जाएगी और नेपाल फिर से हिंदू राष्ट्र बनेगा—ऐसी बातें केवल अफवाह हैं। इन पर विश्वास न करें। मैं संघीयता के खिलाफ जाने की कल्पना भी नहीं कर सकता।”