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स्विट्जरलैंड : जश्न जो मौत का जाल बन गया,अब तक 40 मृतकों में से किसी की भी पहचान नहीं

 

काठमान्डू 2 जनवरी

स्विट्जरलैंड के आलीशान आल्प्स रिजॉर्ट क्रैंस-मोंटाना के लिए यह साल मातम की ऐसी इबारत लिख गया जिसे सदियां याद रखेंगी. हादसे को बीते 24 घंटे से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन मंजर अब भी वैसा ही भयावह है. ले कॉन्स्टेलेशन’ बार में कल तक संगीत की धुनें गूंजती थीं, आज वहां सन्नाटा और जलने की बदबू पसरी है. सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली बात यह है कि पुलिस अब तक 40 मृतकों में से किसी की भी पहचान उजागर नहीं कर पाई है. अस्पताल के बिस्तर 115 घायलों से भरे हैं, जिनमें से बहुत से लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं.
अधिकारी बेबस नजर आ रहे हैं क्योंकि मलबे के भीतर तापमान और जहरीली गैसें इतनी अधिक थीं कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को अंदर जाने तक का मौका नहीं मिल सका. मृतकों के परिवार दर-दर भटक रहे हैं, अपनों की एक तस्वीर लिए पुलिस से बस एक जवाब मांग रहे हैं लेकिन प्रशासन के पास केवल प्रतीक्षा का आश्वासन है. यह केवल एक आग नहीं थी बल्कि एक ऐसा फ्लैशओवर’ था जिसने पलक झपकते ही जश्न को कब्रिस्तान में तब्दील कर दिया.
क्रैंस-मोंटाना अपने स्की ढलानों और गोल्फ कोर्स के लिए दुनिया भर में मशहूर है. नए साल की पूर्व संध्या पर ले कॉन्स्टेलेशन बार पर्यटकों से खचाखच भरा था. चश्मदीदों के अनुसार रात के करीब 1:30 बजे थे जब जश्न अपने चरम पर था. बारटेंडर बोतल में जलती मोमबत्ती लेकर एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर करतब दिखा रहे थे. तभी अचानक एक चिंगारी लकड़ी की छत से जा टकराई. देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया. वहां मौजूद 16 वर्षीय एक्सल क्लेवियर ने बताया कि वह ‘पूर्ण अराजकता’ का माहौल था. लोग धुएं से घुट रहे थे. बेसमेंट से बाहर निकलने का रास्ता इतना संकरा था कि भगदड़ मच गई. लोग एक-दूसरे को रौंदते हुए जान बचाने के लिए शीशे तोड़कर बाहर कूदने लगे. कई लोग अपने जूते, जैकेट और फोन तक पीछे छोड़ आए लेकिन जो पीछे रह गए, वे कभी वापस नहीं आए.

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वैलेस कैंटन पुलिस कमांडर फ्रेडरिक गिसलर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि मृतकों की पहचान करना सबसे कठिन काम है. 24 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस के पास मृतकों का सही आंकड़ा और उनकी नागरिकता की जानकारी नहीं है. गिसलर ने कहा, “इस प्रक्रिया में कई दिन लग सकते हैं.” अटॉर्नी जनरल बीट्राइस पिलौड ने स्पष्ट किया कि हालांकि यह कोई आतंकी हमला नहीं है लेकिन बार की क्षमता से अधिक भीड़ होना जांच का मुख्य हिस्सा होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि लकड़ी के ढांचे और बंद जगह की वजह से ‘बैकड्राफ्ट’ की स्थिति बनी, जिससे आग ने बम की तरह धमाका किया. इसने अंदर मौजूद लोगों को बचने का मौका ही नहीं दिया. फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है लेकिन अज्ञात के खिलाफ जांच जारी है.
अस्पतालों में हाहाकार और बेबस परिजन
स्थानीय अस्पतालों के आईसीयू (ICU) और ऑपरेशन थिएटर अपनी क्षमता से अधिक भर चुके हैं. वैलेस कैंटन सरकार के प्रमुख मैथियास रेनार्ड ने बताया कि घायलों की संख्या इतनी अधिक थी कि कई लोगों को एयरलिफ्ट कर देश के दूसरे हिस्सों में भेजना पड़ा. यह इलाका 2012 के उस बस हादसे की याद दिलाता है जिसमें 28 लोगों (अधिकतर बच्चे) की मौत हुई थी. एक बार फिर क्रैंस-मोंटाना दुख के साये में है. स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन ने इसे ‘अकथनीय हिंसा और संकट’ का क्षण बताया है.

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