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भारतीय बजट : नेपाल को दी जाने वाली विकास सहायता बढ़ी

18 माघ, काठमांडू।

भारत ने आने वाले  आर्थिक वर्ष के लिए घोषित केन्द्रीय बजट में नेपाल को दी जाने वाली विकास सहायता बढ़ा दी है।

भारत की ‘पडोसी प्रथम’ पॉलिसी के तहत नेपाल को दी जाने वाली ग्रांट की रकम 800 करोड़ भारतीय रुपये तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 100 करोड़ रुपये ज़्यादा है।

विश्लेषक के मुताबिक, नेपाल को दी जाने वाली मदद में बढ़ोतरी से इंफ्रास्ट्रक्चर, बॉर्डर एरिया में डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स और सोशल सेक्टर में भारत-नेपाल के बीच सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।

भारत ने पड़ोसी देशों के साथ रीजनल रिश्तों और सहयोग को प्राथमिकता देते हुए नेपाल के साथ-साथ भूटान, श्रीलंका और अफगानिस्तान को भी मदद बढ़ाई है। भारत के इस फैसले को नेपाल-भारत डेवलपमेंट पार्टनरशिप के जारी रहने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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श्रीलंका, अफगानिस्तान, मॉरिशस और मंगोलिया को भी मदद बढ़ाई गई है।

नेपाल के साथ-साथ श्रीलंका को भी 400 करोड़ भारतीय रुपये दिए गए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 100 करोड़ रुपये ज़्यादा है। भारतीय बजट डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि बढ़ी हुई मदद दोनों देशों को टारगेट कर रही है, जो अपनी इकॉनमी को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत ने अफ़गानिस्तान के लिए 500 करोड़ रुपये जोड़कर कुल 150 करोड़ रुपये दिए हैं।

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इसी तरह, मॉरीशस को दी जाने वाली मदद 500 मिलियन रुपये बढ़ाकर 550 मिलियन रुपये कर दी गई है, जबकि मंगोलिया के लिए ग्रांट 50 मिलियन रुपये से बढ़कर 250 मिलियन रुपये हो गई है। सेशेल्स के लिए मदद की रकम अभी भी 190 मिलियन रुपये तक ही सीमित है।

बांग्लादेश, मालदीव और म्यांमार को दी जाने वाली मदद कम हुई है

भारत ने अपने सभी पड़ोसी देशों को दी जाने वाली मदद नहीं बढ़ाई है।

बांग्लादेश के लिए ग्रांट आधी करके 600 मिलियन रुपये कर दी गई है। पिछले साल बांग्लादेश को 120 मिलियन रुपये दिए गए थे। इसमें से सिर्फ़ 340 मिलियन रुपये ही खर्च हुए।

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कहा जा रहा है कि इस आंकड़े से प्रोजेक्ट को लागू करने और उसे अपनाने की क्षमता पर सवाल उठते हैं।

मालदीव के लिए ग्रांट 500 मिलियन रुपये से घटाकर 550 मिलियन रुपये और म्यांमार के लिए 500 मिलियन रुपये से घटाकर 300 मिलियन रुपये कर दी गई है। इस साल भारतीय विदेश मंत्रालय का कुल बजट 22,18.97 मिलियन रुपये हो गया है, जो पिछले साल के 20,516.61 मिलियन रुपये से थोड़ा ज़्यादा है।

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