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सुप्रीम कोर्ट का सरकार को निर्देश: स्क्वाटर और अव्यवस्थित बस्तियाँ हटाने से पहले कानूनी प्रक्रिया अपनाएँ

 

काठमांडू, 8 अप्रैल 026।  नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा स्क्वाटर (सुकुम्बासी) और अव्यवस्थित बस्तियों को हटाने के निर्णय के खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन लोगों को उनके निवास स्थान से विस्थापित कर अन्यत्र प्रबंधन करने के मामले में कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किया जाए।

न्यायमूर्ति कुमार रेग्मी और नित्यानंद पांडे की खंडपीठ ने शुक्रवार को सरकार के नाम यह अंतरिम आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया है, “स्क्वाटरों और अव्यवस्थित निवासियों को उनके निवास स्थान से विस्थापित कर अन्यत्र प्रबंधन करने के संबंध में कानून की उचित प्रक्रिया अपनाए बिना उन्हें हटाने से शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास के अधिकारों को अपूरणीय क्षति हो सकती है तथा मानवीय संकट उत्पन्न हो सकता है।”

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यह आदेश गोपाल रनपहेली, वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी और माजिद अंसारी सहित अन्य द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया है। अदालत ने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी स्क्वाटरों की बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं किए जाने की समस्या उठाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को विस्थापित होने वाले लोगों के आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। साथ ही, अदालत ने इस मामले में लिखित जवाब पेश होने के 15 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर पेशी तय करने और शीघ्र सुनवाई पूरी करने को कहा है।

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अदालत ने कहा कि बस्तियाँ हटाने से पहले मानवीय संकट को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कदम उठाए जाएँ। सुप्रीम कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश याचिका पर दूसरी सुनवाई करते हुए जारी किया है। अदालत ने कहा कि विस्तृत आदेश जल्द ही जारी किया जाएगा।

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