Sun. Sep 27th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

नेपाल में निर्माण सामग्री की कीमतें १०७ प्रतिशत तक बढ़ी, बड़े संकट से गुजर रहा निर्माण क्षेत्र

 

काठमांडू।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर नेपाल के बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर पड़ा है। इजरायल/अमेरिका–ईरान संघर्ष के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही नेपाल में निर्माण सामग्री की कीमतें १०७ प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।

इस असामान्य मूल्यवृद्धि के कारण देशभर में चल रही लगभग ३० हजार विकास परियोजनाओं का भविष्य अनिश्चित हो गया है। इसी वजह से निर्माण व्यवसायी इन दिनों आंदोलनरत हैं।

पिछले पाँच दिनों से नेपाल निर्माण व्यवसायी महासंघ के नेतृत्व में देशभर के ठेकेदार आंदोलन कर रहे हैं। व्यवसायियों की मांग है कि सभी प्रकार के ठेकों में वैज्ञानिक मूल्य समायोजन किया जाए, काम रोक चुके व्यवसायियों को काली सूची में न डाला जाए तथा परियोजनाओं की समय-सीमा बढ़ाने के साथ बजट की व्यवस्था की जाए।

किस सामग्री की कीमत कितनी बढ़ी?

नेपाल निर्माण व्यवसायी महासंघ के प्रवक्ता मंगलबहादुर शाही के अनुसार निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाली प्रमुख सामग्रियों की कीमतों में अस्वाभाविक वृद्धि हुई है। उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार सड़क निर्माण के लिए अत्यावश्यक बिटुमिन (अलकतरा) की कीमत १०७ प्रतिशत बढ़ गई है। कुछ समय पहले तक ७५ रुपये प्रति किलो मिलने वाला बिटुमिन अब १५५ रुपये प्रति किलो तक पहुँच गया है।

इसी तरह निर्माण उपकरण चलाने के लिए आवश्यक डीजल की कीमत में ६२ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मध्यपूर्व के युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित होने से नेपाल में डीजल की कीमत २२४ रुपये प्रति लीटर तक पहुँच गई है। अन्य निर्माण सामग्रियों की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है।

मूल्यवृद्धि की स्थिति इस प्रकार हैः

  • बिटुमिन : १०७ प्रतिशत
  • डंडी (लोहे की छड़) : ३५ प्रतिशत
  • सीमेंट : १५ प्रतिशत
  • मजदूरों की मजदूरी : २५ प्रतिशत
  • अन्य निर्माण सामग्री (ईंट आदि) : २० से २५ प्रतिशत तक
यह भी पढें   सर्वसम्मति से पारित हुआ ओली का राजनीतिक प्रतिवेदन

‘इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा निर्माण क्षेत्र’

नेपाल निर्माण व्यवसायी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष रवि सिंह ने कहा कि देश का निर्माण क्षेत्र अपने इतिहास के सबसे गंभीर संकट से गुजर रहा है। सामग्री की अत्यधिक मूल्यवृद्धि, सरकारी निकायों का दमनकारी रवैया और कुशल जनशक्ति की कमी के कारण निर्माण उद्योग खत्म होने की स्थिति में पहुँच गया है। “पहले ८५ रुपये प्रति किलो मिलने वाला बिटुमिन अब १८५ रुपये तक पहुँच गया है। सिर्फ कीमत ही नहीं बढ़ी, बाजार में यह आसानी से उपलब्ध भी नहीं है और जो मिल रहा है उसकी गुणवत्ता की भी कोई गारंटी नहीं है।”

उनके अनुसार हाल ही में लोहे की छड़ की कीमत ७५–७६ रुपये प्रति किलो से बढ़कर ९७ रुपये तक पहुँच गई थी। हालांकि मांग घटने के कारण अब यह घटकर लगभग ८७–९० रुपये प्रति किलो रह गई है, जो शुरुआती कीमत की तुलना में लगभग १०–१२ प्रतिशत अधिक है।

सीमेंट की कीमत भी एक समय प्रति बोरा ७८० रुपये तक पहुँच गई थी। फिलहाल मांग कम होने के कारण यह घटकर ६०० से ६५० रुपये प्रति बोरा के बीच आ गई है।

रवि सिंह के अनुसार निर्माण सामग्री की इस महंगाई के कारण परियोजनाओं की कुल लागत में ३० से ४० प्रतिशत तक अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। सामग्री की कमी और स्थानीय निकायों द्वारा नदीजन्य सामग्री पर मनमाना कर लगाए जाने से व्यवसायियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि वर्तमान संकट से निपटने के लिए सरकार को परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “यदि सरकारी कोष कमजोर है तो सभी परियोजनाएँ आगे न बढ़ाई जाएँ, लेकिन लाइफलाइन माने जाने वाले राजमार्ग और नदी नियंत्रण जैसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए तथा उनमें बढ़ी हुई लागत का समायोजन किया जाए।”

यह भी पढें   ‘दिनकर’ की काव्य-शैली : ओज, संवेदना और भारतीय चेतना का विराट स्वरूप : श्वेता दीप्ति 

नागढुंगा–मुग्लिन जैसी प्रमुख परियोजनाओं में काम जारी है, लेकिन बिटुमिन और डीजल पर निर्भर सड़क कालोपत्रे (ब्लैकटॉप) का काम कई स्थानों पर धीमा पड़ गया है। जिन ठेकेदारों के पास बिटुमिन का भंडार नहीं है, वे काम आगे बढ़ाने में असमर्थ हैं, जिससे परियोजनाओं की समय-सीमा बढ़ने और लागत बढ़ने की आशंका निश्चित हो गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल दमन और धमकी से विकास निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सकते। सरकार को व्यवसायियों के लिए काम करने का अनुकूल वातावरण और निर्माण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।

१० अरब रुपये तक का नुकसान

महासंघ के प्रवक्ता शाही के अनुसार इस मूल्यवृद्धि के कारण निर्माण व्यवसायियों को अब तक लगभग १० अरब रुपये का नुकसान हो चुका है।
उन्होंने कहा, “केवल डीजल में ६ अरब और बिटुमिन में ४ अरब रुपये का घाटा हो चुका है। नेपाल में फागुन से असार तक निर्माण का मुख्य सीजन होता है, जिसमें सालभर की ६० प्रतिशत सामग्री का उपयोग होता है। ऐसे समय में कीमतें बढ़ने से व्यवसायी दिवालिया होने की स्थिति में पहुँच गए हैं।”

इस संकट के कारण देशभर की लगभग ३० हजार छोटी-बड़ी परियोजनाएँ प्रभावित हुई हैं। पुराने दरों पर हुए अनुबंधों को वर्तमान बाजार मूल्य पर आगे बढ़ाना संभव नहीं होने के कारण व्यवसायी लगातार विरोध कर रहे हैं।

समस्याओं के समाधान के लिए विभाग सक्रिय

व्यवसायियों के आंदोलन और परियोजनाओं की सुस्ती को देखते हुए सड़क विभाग ने समस्या के समाधान के लिए आंतरिक अध्ययन शुरू किया है। विभाग के प्रवक्ता एवं निदेशक श्यामबहादुर खड़्का ने बताया कि विभिन्न विभाग संयुक्त रूप से व्यवसायियों की मांगों पर अध्ययन कर रहे हैं।

यह भी पढें   योगेश भट्टराई ने पार्टी के ‘बहुआयामी पुनर्गठन’ का प्रस्ताव रखा, ओली से नए नेतृत्व का मार्ग प्रशस्त करने की अपील

उन्होंने कहा,
“हम व्यवसायियों की मांगों और बाजार में वास्तविक मूल्यवृद्धि के आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं। जल्द ही इस विषय में नीतिगत निर्णय लिया जाएगा, जिससे निर्माण कार्यों को फिर गति मिलने की उम्मीद है।”

मूल्य समायोजन में कानूनी और तकनीकी अड़चन

सार्वजनिक खरीद ऐन २०६३ की धारा ५५ के अनुसार यदि निर्माण सामग्री की कीमतों में १० प्रतिशत से अधिक उतार-चढ़ाव होता है, तो मूल्य समायोजन का प्रावधान है। लेकिन विभाग के अनुसार एक वर्ष से कम अवधि वाले ठेकों में इस प्रावधान को लागू करने में तकनीकी कठिनाई सामने आ रही है।

प्रवक्ता खड़्का के अनुसार एक वर्ष से अधिक अवधि वाले ठेकों में मूल्य समायोजन का सूत्र पहले से उल्लेखित होता है, लेकिन कम अवधि वाले ठेकों में ऐसी व्यवस्था नहीं होने के कारण वर्तमान अप्रत्याशित मूल्यवृद्धि को संबोधित करना मुश्किल हो गया है। विभाग अब सभी प्रकार के ठेकों को समेटने वाला मध्यमार्गी समाधान खोजने में जुटा है।

हालांकि व्यवसायियों का दावा है कि परियोजनाएँ ठप हो गई हैं, लेकिन सड़क विभाग का कहना है कि काम पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। नागढुंगा–मुग्लिन जैसी प्रमुख परियोजनाओं में कार्य जारी है, मगर बिटुमिन और डीजल पर निर्भर सड़क कालोपत्रे का काम कई स्थानों पर धीमा पड़ गया है। बिटुमिन की कमी से जूझ रहे ठेकेदारों के कारण परियोजनाओं की समय-सीमा बढ़ने और लागत में वृद्धि होना तय माना जा रहा है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com