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नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के प्रस्तावित चीन दौरे की तैयारियां शुरू

 

28 जेठ, बीजिंग।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के प्रस्तावित चीन दौरे को लेकर चीन स्थित नेपाली दूतावास ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

मंत्री खनाल 31 जेठ की सुबह चीन पहुंचने वाले हैं। हालांकि, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अभी तक उनके चीन दौरे की औपचारिक घोषणा नहीं की है।

चीन स्थित नेपाली दूतावास ने 31 जेठ की शाम 5 बजे बीजिंग में रहने वाले नेपाली नागरिकों के साथ विदेश मंत्री खनाल की एक संवादात्मक बैठक का कार्यक्रम तय किया है। इसके लिए दूतावास ने चीन में रह रहे नेपाली समुदाय को निमंत्रण भेज दिया है।

इसी प्रकार, 1 असार की सुबह मंत्री खनाल की चाइना एकेडमी ऑफ साइंसेज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक होगी। इस बैठक में नेपाल और चीन के बीच शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संभावित सहयोग पर चर्चा की जाएगी। 1 असार की दोपहर तथा 2 असार को मंत्री खनाल विभिन्न राजनीतिक मुलाकातों में शामिल होंगे।

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इस दौरान उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी तथा चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के प्रमुख लियू हाइसिंग से मुलाकात तय हुई है। अन्य उच्चस्तरीय बैठकों की भी तैयारी चल रही है, हालांकि उनका अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।

2 असार की शाम आयोजित होने वाले निवेश सम्मेलन में भी विदेश मंत्री खनाल भाग लेंगे। सम्मेलन में नेपाल में चीनी निवेश की संभावनाओं और प्राथमिक क्षेत्रों पर चर्चा होगी।

चीन यात्रा के दौरान मंत्री खनाल लिम्पियाधुरा, लिपुलेक और कालापानी से जुड़े सीमा विवाद का मुद्दा अपने चीनी समकक्ष वांग यी के समक्ष उठाने की तैयारी में हैं। इस विषय पर नेपाल पहले ही भारत और चीन दोनों को कूटनीतिक नोट भेज चुका है। भारत की ओर से नेपाल को जवाब भी प्राप्त हो चुका है।

बैठकों के दौरान चीनी पक्ष बीआरआई (बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव) के अंतर्गत प्रस्तावित परियोजनाओं पर नेपाल सरकार की वर्तमान स्थिति जानना चाहता है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की दिसंबर 2024 की चीन यात्रा के दौरान बीआरआई परियोजनाओं के ढांचे (फ्रेमवर्क) पर सहमति बनी थी।

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उस समझौते में टोखा–छहरे सुरंग मार्ग, हिल्सा–सिमकोट सड़क, किमाथांका–खांदबारी सड़क एवं पुल, जिलोङ–केरुङ–काठमांडू ट्रांसबॉर्डर रेलवे, जिलोङ–केरुङ–चिलिमे 220 केवी ट्रांसमिशन लाइन, मदन भंडारी विश्वविद्यालय, काठमांडू साइंटिफिक सेंटर एवं साइंस म्यूजियम, झापा के दमक में चीन–नेपाल औद्योगिक मैत्री पार्क, झापा स्पोर्ट्स अकादमी तथा डडेलधुरा के अमरगढ़ी सिटी हॉल जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

फ्रेमवर्क पर सहमति बनने के बावजूद इन परियोजनाओं पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। इसलिए इस विषय पर भी विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

चीन यह भी जानना चाहता है कि नेपाल अपनी पारंपरिक संतुलित विदेश नीति को जारी रखेगा या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार पश्चिमी देशों की ओर अधिक झुकाव दिखाएगा।

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बैठकों में चीन द्वारा नेपाल को लेकर व्यक्त किए जा रहे संदेहों पर भी चर्चा हो सकती है। नेपाल सरकार ने अपने नीति एवं कार्यक्रम में देश को केवल एक “बफर जोन” नहीं बल्कि एक “वाइब्रेंट ब्रिज” (सक्रिय सेतु) के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। विदेश मंत्री खनाल भी लगातार संतुलित विदेश नीति की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।

गौरतलब है कि विदेश मंत्री खनाल 22 जेठ को भारत दौरे पर गए थे और 24 जेठ को काठमांडू लौटे थे। भारत यात्रा के दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर तथा सत्तारूढ़ भाजपा के विदेश विभाग प्रमुख विजय चौथाइवाले सहित कई नेताओं से मुलाकात की थी।

बीजिंग दौरा पूरा करने के बाद मंत्री खनाल 3 असार की शाम नेपाल लौटेंगे।

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