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गोविन्द बहादुर बटाला ने अदालत में किया आत्मसमर्पण, डिल्लीबजार कारागार भेजे गए

 

काठमांडू।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय सदस्य गोविन्दबहादुर बटाला ने बुधवार को नेपाल सर्वोच्च अदालत में उपस्थित होकर आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद अदालत प्रशासन ने उन्हें डिल्लीबजार कारागार भेज दिया।

व्यवसायी रामहरि श्रेष्ठ के अपहरण और हत्या मामले में सर्वोच्च अदालत ने बटाला को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी।

गत 28 जेठ 2083 को न्यायाधीश डा. नहकुल सुवेदी, अब्दुल अजीज मुसलमान और शान्तिसिंह थापा की संयुक्त पीठ ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व का फैसला पलट दिया था और बटाला को 10 वर्ष की कैद की सजा सुनाई थी।

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कालिकोट जिले के माल्कोट निवासी तथा वर्तमान में काठमांडू में रह रहे बटाला को सर्वोच्च अदालत के मुद्दा एवं रिट महाशाखा द्वारा डिल्लीबजार कारागार भेजा गया है।

नेपाल के कानून के अनुसार, यदि कोई दोषी व्यक्ति फैसला होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर स्वयं अदालत में उपस्थित होकर कारावास स्वीकार करता है, तो उसे निर्धारित जुर्माने या सजा में 20 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। इसी प्रावधान के तहत बटाला को भी सजा में 20 प्रतिशत की राहत मिलने की संभावना बताई जा रही है।

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यह मामला वर्ष 2068 असार 6 का है। अभियोजन के अनुसार, व्यवसायी रामहरि श्रेष्ठ का काठमांडू से अपहरण कर उन्हें चितवन ले जाया गया था, जहाँ उनकी हत्या कर दी गई। इसी अपराध में बटाला को दोषी ठहराया गया है।

उल्लेखनीय है कि गोविन्दबहादुर बटाला तत्कालीन माओवादी लड़ाकों के ब्रिगेड कमांडर रह चुके हैं। उनके आत्मसमर्पण के साथ ही इस बहुचर्चित मामले में सर्वोच्च अदालत के फैसले के कार्यान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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