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हिन्दी केन्द्रीय विभाग द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन

 

काठमांडू, आषाढ़ २६ – आज (शुक्रवार )त्रिभुवन विश्वविद्यालय के हिन्दी केन्द्रीय विभाग द्वारा “नेपाल भारत की ज्ञान परम्पराएँ और पारस्परिक अन्तर्सम्बन्ध, अतीत वर्तमान और भविष्य” विषय पर एक अन्तर्राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था ।
कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रों रंजन कुमार त्रिपाठी, समाजशास्त्र विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय से ही डॉ निधि बल्याण, पूर्वांचल विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश से डॉ पवन कुमार पाण्डेय तथा बनारस से आए दीपेन्द्र चौबे की गरिमामयी उपस्थिति रही ।


कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिसे हिन्दी केन्द्रीय विभाग की एमफिल की छात्राओं –संगीता ठाकुर, सुुस्मीरा अर्याल तथा वीभा दास ने प्रस्तुत किया ।
इसके पश्चात डॉ निधि बल्याण ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय में हो रहे सामाजिक परिवत्र्तन प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं । इस परिवत्र्तन को लेकर कोई कुछ नहीं कह सकता है । ओर कोई समस्या हों तो उसके लिए दीर्घकालीन समाधान की ओर आगे बढ़े ।

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इसके साथ ही उन्होंने नेपाल और भारत के सांस्कतिक, सामाजिक, धार्मिक परम्पराओं तथा भौगोलिक निकटता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच गहरा संबंध और परस्पर जुडाव है ।
कार्यक्रम में प्रो. रंजन कुमार त्रिपाठी और दीपेन्द्र चौबे ने भी इसी विषय पर अपने विचार शेयर किए
इस अवसर पर हिन्दी केन्द्रीय विभाग एमफिल के छात्र–छात्राओं ने भी अपने मंतव्य रखें । संगीता ठाकुर, सुसमीर अर्याल, मोहन नेपाल, तथा मनोज गोप ने अपने अपने विचारों को रखा ।

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कार्यक्रम में हिन्दी केन्द्रीय विभाग के डॉ. विनोद कुमार विश्वकर्मा ने भी अपने मंतव्य को रखा । धन्यवाद ज्ञापण देते हुए हिन्द केन्द्रीय विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. श्वेता दीप्ति ने कहा कि इस तरह के आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए ,ताकि नेपाल– भारत के सामाजिक , र्धामिक, एंव सांस्कृतिक मूल्यों तथा ज्ञान परम्पराओं को और अच्छी तरह समझ सकें, इसे और आगे बढ़ाया जा सकें ।
कार्यक्रम में हिन्दी केन्द्रीय विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ संजिता वर्मा, विभाग की ही डॉ. लक्ष्मी जोशी , केन्द्रीय पुस्तकालय से अंशु झा, ’राइजिंग नेपाल‘ से अमरेंद्र यादव, पत्रकार प्रियंका पाण्डे, आनद गुप्ता के साथ ही अन्य की गरिमामय उपस्थिति रही ।

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