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वसंतपुर दरबार स्क्वायर से शुरू हुई इन्द्रजात्रा, इन्द्रध्वज स्थापित कर हुआ आठ दिवसीय पर्व का शुभारंभ

 

6 असोज, काठमांडू।

काठमांडू के ऐतिहासिक वसंतपुर दरबार स्क्वायर से नेपाल का प्रसिद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व इन्द्रजात्रा शुरू हो गया है। हनुमानढोका दरबार के सामने धार्मिक विधि-विधान के साथ इन्द्रध्वज (लिंगो) स्थापित कर आठ दिवसीय उत्सव का शुभारंभ किया गया।

परंपरा के अनुसार भाद्र शुक्ल द्वादशी के दिन इन्द्रध्वज स्थापित कर इन्द्रजात्रा की शुरुआत की जाती है। इसके बाद आठ दिनों तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, नृत्य, रथयात्राएँ और देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है।

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आज स्थापित किए गए इस लिंगो को ‘इन्द्रध्वजोत्थान’ भी कहा जाता है। लिंगो की स्थापना से पहले उसके आधार पर भगवान भैरव की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इन्द्रजात्रा शत्रु पर विजय के उत्सव तथा शक्ति और समृद्धि की प्राप्ति का प्रतीक पर्व है। इन्द्रध्वज की पूजा कर शक्ति अर्जित करने और उसका प्रदर्शन करने की परंपरा भी इस पर्व से जुड़ी हुई है।

इन्द्रजात्रा के दौरान नेपाल के राष्ट्रपति हनुमानढोका स्थित गद्दी बैठक से जीवित देवी श्री कुमारी, श्री गणेश और श्री भैरव की भव्य रथयात्रा का दर्शन करते हैं। यह इस पर्व की प्रमुख राजकीय परंपराओं में से एक मानी जाती है।

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इन्द्रध्वज स्थापना के बाद पूरे उत्सव के दौरान भक्कु नाच, महाकाली नाच, लाखे नाच, दशावतार नृत्य तथा देवराज इन्द्र के वाहन ऐरावत हाथी के प्रतीक पुलुकिसी नृत्य का प्रदर्शन किया जाता है। ये सभी नृत्य नेपाल की समृद्ध नेवारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

इन्द्रजात्रा के आठवें दिन, अर्थात आश्विन कृष्ण चतुर्थी को इन्द्रध्वज पातन की परंपरा निभाई जाती है, जिसमें स्थापित लिंगो को विधिपूर्वक गिराया जाता है और इसी के साथ पर्व का समापन होता है।

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मुख्य रूप से नेवारी समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला यह ऐतिहासिक पर्व काठमांडू के अलावा ललितपुर, भक्तपुर, धुलिखेल और दोलखा सहित नेपाल के कई स्थानों पर बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

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