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जनता के धैर्य की परीक्षा न ले सरकार, तुरंत बदले अपनी कार्यशैली : राजेन्द्र महतो

 

काठमांडू, 11 जुलाई। नेपाल की राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी के अध्यक्ष राजेन्द्र महतो ने वर्तमान सरकार की कार्यशैली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि सरकार अपने पहले 100 दिनों में ही जनअपेक्षाओं पर खरी उतरने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समावेशी लोकतांत्रिक शासन की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय पुराने केंद्रीकृत, असंवेदनशील और अधिनायकवादी ढर्रे पर चल रही है।

शनिवार को जारी एक सार्वजनिक वक्तव्य में महतो ने कहा कि हालिया जनादेश केवल सत्ता परिवर्तन का संदेश नहीं था, बल्कि तीन दशकों से जनता के भीतर जमा असंतोष, पीड़ा और परिवर्तन की आकांक्षा का स्पष्ट प्रकटीकरण था। उन्होंने कहा कि केवल सरकार या चेहरे बदलने से देश की संरचनात्मक असमानताएँ समाप्त नहीं होंगी। जब तक राज्य की सोच, नीतियों और सत्ता संरचना में व्यापक परिवर्तन नहीं होगा, तब तक वंचित और उत्पीड़ित समुदायों की आकांक्षाएँ अधूरी ही रहेंगी।

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महतो ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार गरीबों, भूमिहीनों और सीमावर्ती नागरिकों के प्रति कठोर रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने और सड़क विस्तार के नाम पर गरीब बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है तथा समानुपातिक समावेशन की संवैधानिक व्यवस्था की उपेक्षा की जा रही है।

उन्होंने सरकार के बजट की भी आलोचना करते हुए कहा कि यह किसानों, युवाओं, महिलाओं और प्रदेशों के हितों की अनदेखी करता है तथा बिचौलिया पूंजीवाद को बढ़ावा देता है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मौलिक अधिकारों पर कर लगाने, किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध न कराने तथा युवाओं को रोज़गार के लिए विदेश पलायन की ओर धकेलने वाली नीतियों को उन्होंने स्वदेशी अर्थव्यवस्था के विरुद्ध बताया।

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संविधान संशोधन के मुद्दे पर महतो ने कहा कि यदि संशोधन वास्तव में समावेशी और न्यायपूर्ण राज्य व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से नहीं किया जाता, तो उसका कोई अर्थ नहीं होगा। उन्होंने राज्य पुनर्संरचना आयोग की बहुमत रिपोर्ट के अनुरूप **10+1 प्रदेशों और 24 स्वायत्त क्षेत्रों** पर आधारित बहुराष्ट्रीय राज्य व्यवस्था, न्यायसंगत राजस्व वितरण, समानुपातिक प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय भाषाओं में सरकारी सेवाएँ तथा सभी राज्य निकायों में समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करने की माँग की।

उन्होंने यह भी कहा कि अधिकार और पहचान आंदोलनों से जुड़े निर्दोष लोगों पर लगाए गए मुकदमे वापस लिए जाएँ तथा लाल आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। अन्यथा सरकार के सुधार संबंधी सभी दावे अधूरे और अविश्वसनीय रहेंगे।

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महतो ने कहा कि नेपाल इस समय अस्तित्व, संप्रभुता, जनाधिकार, सांस्कृतिक पहचान और स्वशासन के गंभीर संकट से गुजर रहा है। उन्होंने सभी लोकतांत्रिक, प्रगतिशील, पहचान-समर्थक तथा परिवर्तनकारी राजनीतिक शक्तियों से व्यापक राष्ट्रीय एकता का आह्वान करते हुए कहा कि अब सभ्यता, स्वशासन और समृद्धि पर आधारित एक नए राष्ट्रीय पुनर्जागरण की आवश्यकता है।

अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, बुद्धिजीवियों, नागरिक समाज, युवाओं, किसानों और श्रमिकों से दलगत एवं संकीर्ण स्वार्थों से ऊपर उठकर न्यायपूर्ण, समावेशी और स्वाभिमानी नेपाल के निर्माण के लिए साझा अभियान में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी नेपाल इस ऐतिहासिक परिवर्तनकारी यात्रा में हर संभव योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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