भारत ने संकटग्रस्त नेपाल को बिजली निर्यात की दी मंजूरी, बाढ़ के कारण हुए नुकसान के बीच बढ़ाया मदद का हाथ
काठमांडू, 15 सितंबर । नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ के कारण वहां के जलविद्युत (हाइड्रोपावर) बुनियादी ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान को देखते हुए, भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने संकट के इस समय में पड़ोसी देश की मदद करते हुए नेपाल को अतिरिक्त बिजली निर्यात करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
पीआईबी (प्रेस सूचना ब्यूरो) द्वारा 14 सितंबर 2026 को जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह निर्णय नेपाल की घटती घरेलू बिजली उत्पादन क्षमता और वहां उत्पन्न हुई अतिरिक्त ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से लिया गया है।
बिजली निर्यात से जुड़ी मुख्य बातें:
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समय और अवधि: विद्युत मंत्रालय ने ‘नेपाल विद्युत प्राधिकरण’ (Nepal Electricity Authority) को 13 सितंबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक प्रतिदिन 18 घंटे (रात 00:00 बजे से शाम 18:00 बजे तक) बिजली आपूर्ति करने की अनुमति प्रदान की है।
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क्षमता और ट्रांसमिशन लाइनें: इस मंजूरी के तहत नेपाल को दो प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों के जरिए बिजली भेजी जाएगी:
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मुजफ्फरपुर – ढल्केबर (400 kV D/c) लाइन: इसके माध्यम से 600 मेगावाट (MW) तक बिजली का निर्यात किया जाएगा।
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टनकपुर – महेंद्रनगर (132 kV S/c) लाइन: इसके जरिए 54 मेगावाट (MW) तक बिजली की आपूर्ति की जाएगी।
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भविष्य की समीक्षा: जनवरी 2027 और उसके बाद के महीनों में निर्यात की जाने वाली बिजली की मात्रा (क्वांटम) के संबंध में दिसंबर 2026 में समीक्षा बैठक की जाएगी और स्थिति के अनुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा।
भारत-नेपाल के मजबूत होते द्विपक्षीय संबंध:
हालिया प्राकृतिक आपदा (बाढ़) ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे देश में बिजली का भारी संकट पैदा हो गया था। भारत सरकार द्वारा समय पर दी गई इस मंजूरी से नेपाल को इस कठिन दौर में अपनी बिजली की जरूरतों को सुचारू रूप से पूरा करने में बड़ी राहत मिलेगी।



