सरकार और छात्र आमने-सामने : समाधान संवाद से निकलेगा, टकराव से नहीं
बिमल सर्राफ, भारत विश्व का सबसे युवा देश बनने की ओर अग्रसर है। यह युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है, लेकिन जब यही युवा सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज़ बुलंद करने को विवश हो जाएँ, तब यह केवल छात्रों का मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि शासन, प्रशासन और लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों और केंद्र स्तर पर शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं, परिणामों, आरक्षण, नई शिक्षा नीति तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आक्रोश लगातार देखने को मिला है। कई बार आंदोलन शांतिपूर्ण रहे, तो कई बार टकराव की स्थिति भी बनी। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सरकार और छात्र एक-दूसरे के विरोधी हैं? इसका उत्तर स्पष्ट रूप से “नहीं” है।
सरकार का दायित्व है कि वह युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, निष्पक्ष परीक्षाएँ और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। वहीं छात्रों का दायित्व है कि वे अपनी बात लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ढंग से रखें। जब संवाद की जगह अविश्वास और सहयोग की जगह टकराव ले लेता है, तब नुकसान दोनों पक्षों का होता है और सबसे अधिक हानि राष्ट्र की होती है।
लोकतंत्र में असहमति कोई अपराध नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाने का माध्यम है। यदि छात्र अपनी समस्याएँ उठा रहे हैं, तो उन्हें गंभीरता से सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं छात्रों को भी यह समझना होगा कि हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना या कानून हाथ में लेना किसी भी आंदोलन को कमजोर कर देता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार केवल आदेश देने वाली संस्था न बने, बल्कि सुनने और समझने वाली व्यवस्था भी बने। पारदर्शिता, समयबद्ध निर्णय और जवाबदेही से ही युवाओं का विश्वास जीता जा सकता है। दूसरी ओर छात्रों को भी अपने आंदोलन को तथ्यों, अनुशासन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रखना होगा।
भारत का भविष्य संसद और सचिवालयों में जितना तय होता है, उतना ही विश्वविद्यालयों और पुस्तकालयों में भी। इसलिए सरकार और छात्रों के बीच संबंध टकराव का नहीं, बल्कि विश्वास और सहभागिता का होना चाहिए। संवाद के खुले रास्ते ही किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं।
आज देश को ऐसे समाधान की आवश्यकता है, जहाँ सरकार संवेदनशील हो, छात्र जिम्मेदार हों और दोनों मिलकर शिक्षा तथा रोजगार से जुड़े प्रश्नों का स्थायी समाधान खोजें। क्योंकि जब युवा निराश होते हैं तो राष्ट्र की ऊर्जा कमजोर पड़ती है, और जब युवा आशावान होते हैं तो राष्ट्र नई ऊँचाइयों को प्राप्त करता है।
लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत तब होती है, जब सरकार सुनती है, छात्र समझते हैं और दोनों मिलकर राष्ट्रहित में आगे बढ़ते हैं।


