कोशी प्रदेश में 17,337 घरों को तत्काल बसाना जरूरी, कानून की पेचीदगियों में फंसा पुनर्वास
1 week ago
नेपाल के कोशी प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हजारों परिवार अब भी सुरक्षित पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 17,337 घर ऐसे हैं जिन्हें तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना जरूरी है, लेकिन जटिल कानूनी प्रक्रियाओं के कारण पुनर्वास का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
ताप्लेजुङ के 65 परिवार तीन साल बाद भी अस्थायी झोपड़ियों में
2 असार 2080 (जून 2023) को हुई भीषण बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन ने ताप्लेजुङ जिले की मैवाखोला-3 और 4 स्थित ओदक, एकबाँसे और ताम्राङ बस्तियों को बुरी तरह तबाह कर दिया था।
इन बस्तियों के 65 परिवारों के घर रहने लायक नहीं बचे, जिसके बाद संघीय आपदा कार्यकारी समिति ने वर्ष 2082 की योजना में इन्हें मैवाखोला के साँघु क्षेत्र में बसाने का निर्णय लिया था।
लेकिन पुनर्वास अनुदान संबंधी कार्यविधि में यह शर्त रखी गई कि जिस व्यक्ति का पुनर्वास किया जाएगा, उसके नाम पर नेपाल में कहीं भी जमीन नहीं होनी चाहिए। इस प्रावधान के कारण वास्तविक पीड़ित भी सरकारी सहायता से वंचित हो रहे हैं।
कानूनी अड़चन से अटका पुनर्वास
निर्णय होने के बावजूद बस्ती का पुनर्वास अब तक नहीं हो सका है। प्रभावित परिवार इस मानसून में भी पुरानी और जर्जर अस्थायी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं।
मैवाखोला ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष विजय वनम ने बताया कि पिछले एक वर्ष से वे केंद्र और प्रदेश सरकार के मंत्रालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जमीन चयन से लेकर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन जमीन के बदले जमीन देने और पुनर्वास से जुड़े जटिल कानून सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। अस्थायी आश्रय अब इतने पुराने हो चुके हैं कि उनके गिरने का खतरा बढ़ गया है।
उनके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अव्यावहारिक 100 वर्गमीटर जमीन की सीमा हटाने में ही एक साल लग गया, लेकिन जमीन खरीद और पुनर्वास की प्रक्रिया अब भी अटकी हुई है।
इलाम में भी सैकड़ों परिवार अब तक विस्थापन का इंतजार कर रहे हैं
18 और 19 असोज 2082 (अक्टूबर 2025) की भारी बारिश के बाद इलाम जिले में आई बाढ़ और भूस्खलन में 39 लोगों की मौत हुई थी और 26 लोग घायल हुए थे।
उस समय जिले में:
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365 घर पूरी तरह नष्ट हो गए।
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940 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा।
कोशी प्रदेश सरकार की आपदा रिपोर्ट के मुताबिक इलाम में 1,861 परिवार जोखिम वाले क्षेत्रों में रह रहे हैं, जबकि 471 घरों को तत्काल स्थानांतरित किया जाना चाहिए। लेकिन अब तक उनका पुनर्वास नहीं हो सका है।
कोशी प्रदेश की चिंताजनक तस्वीर
प्रदेश सरकार की मानसून पूर्व तैयारी एवं आपदा कार्ययोजना के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं से पूरे प्रदेश में 1,63,299 घर प्रभावित होने की आशंका है।
इनमें:
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श्रेणी |
घरों की संख्या |
| उच्च जोखिम वाले घर | 1,45,962 |
| तत्काल स्थानांतरण योग्य घर | 17,337 |
| बाढ़ के खतरे वाले घर | 1,10,421 |
| बाढ़ के कारण तत्काल विस्थापन योग्य | 15,060 |
| भूस्खलन जोखिम वाले घर | 23,931 |
| भूस्खलन के कारण तत्काल विस्थापन योग्य | 2,277 |
| हिमताल विस्फोट (GLOF) जोखिम वाले घर | 11,610 |
सबसे अधिक खतरे वाले जिले
बाढ़ का सबसे बड़ा खतरा तराई में
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जिला |
जोखिम वाले घर |
तत्काल स्थानांतरण |
| मोरंग | 42,517 | 4,596 |
| सुनसरी | 30,512 | 6,919 |
| झापा | 19,441 | 2,250 |
| उदयपुर | 7,544 | 537 |
सुनसरी में पूरे प्रदेश में सबसे अधिक परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर बसाने की जरूरत बताई गई है।
भूस्खलन का सबसे अधिक खतरा पहाड़ी जिलों में
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जिला |
जोखिम वाले घर |
तत्काल स्थानांतरण |
| पाँचथर | 3,007 | 54 |
| संखुवासभा | 2,650 | 446 |
| सोलुखुम्बु | 2,574 | 130 |
| ताप्लेजुङ | 2,027 | 463 |
| इलाम | 1,861 | 608 |
हिमताल विस्फोट (GLOF) का खतरा
हिमालयी क्षेत्रों में हिमताल फटने से आने वाली बाढ़ का सबसे अधिक खतरा उदयपुर और सुनसरी जिलों में बताया गया है।
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उदयपुर: 3,562 घर जोखिम में।
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सुनसरी: 3,031 घर जोखिम में।
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इसके अलावा ओखलढुंगा, ताप्लेजुङ, सोलुखुम्बु, खोटाङ, भोजपुर, पाँचथर, संखुवासभा और धनकुटा भी जोखिम वाले जिलों में शामिल हैं।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
कोशी प्रदेश सरकार की एकीकृत आपदा रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में हजारों परिवार अब भी ऐसे इलाकों में रह रहे हैं, जहां कभी भी बाढ़, भूस्खलन या हिमताल विस्फोट जैसी आपदाएं जानलेवा साबित हो सकती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून के दौरान संभावित नुकसान को कम करने के लिए:
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17,337 परिवारों के लिए तत्काल सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी।
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पूर्व चेतावनी प्रणाली को प्रभावी ढंग से संचालित करना होगा।
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सुरक्षा और बचाव एजेंसियों को उच्च सतर्कता पर रखना होगा।
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केंद्र, प्रदेश और स्थानीय सरकारों के बीच तेज और प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना होगा।
सरकारी रिपोर्ट के बावजूद पुनर्वास योजनाओं का जमीन पर लागू न होना अब आपदा प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

