अग्रगामी मोर्चा का गांव-वार्ड तक संगठन विस्तार, सर्लाही बैठक में बनी रणनीति
सर्लाही, ६ सितंबर । अग्रगामी मोर्चा ने अपने संगठन को गांव-गांव और वार्ड-वार्ड तक विस्तारित कर आगामी राजनीतिक संघर्ष को और अधिक सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मलंगवा स्थित होटल दरबार इन में जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल के सर्लाही जिला अध्यक्ष रणधीर कुमार यादव की अध्यक्षता में हुई जिला समन्वय समिति की बैठक में आगामी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर यह रणनीति तय की गई।
इस बैठक में मोर्चा में शामिल नौ राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पूर्व गृह राज्य मंत्री तथा नेपाल संघीय समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मोहम्मद रिजवान अंसारी ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
बैठक के प्रमुख निर्णय और घोषणाएं:
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प्रतिगमन का कड़ा विरोध: मुख्य अतिथि अंसारी ने जोर देकर कहा कि प्राप्त लोकतांत्रिक उपलब्धियों की रक्षा और शेष अधिकारों की प्राप्ति के लिए संगठित संघर्ष आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि संघीयता को समाप्त करने या गणतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समावेशिता पर किसी भी प्रकार का प्रहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि ऐसा प्रयास हुआ, तो अग्रगामी मोर्चा प्रतिरोध की पहली पंक्ति में खड़ा होगा।
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एक ही चुनाव चिह्न से चुनाव लड़ने की तैयारी: अंसारी ने स्पष्ट किया कि यह मोर्चा महज चुनाव के समय सक्रिय होने वाला गठबंधन नहीं है। आने वाले समय में मोर्चा से जुड़े दल अपनी एकता को मजबूत करते हुए एक ही चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। यह सड़क से लेकर चुनाव और सरकार तक संयुक्त रूप से जनता के पक्ष में काम करेगा।
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27 भाद्र को जनकपुर में प्रांतीय घोषणा: आगामी 27 भाद्र को मधेश प्रदेश की राजधानी जनकपुरधाम में अग्रगामी मोर्चा का प्रांतीय उन्मुखीकरण और घोषणा कार्यक्रम भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। इसे सफल बनाने के लिए सर्लाही सहित मधेश प्रदेश के सभी जिलों में अभियान चलाकर भारी जनभागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
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जमीनी स्तर पर व्यापक विस्तार: संसदीय निर्वाचन क्षेत्र, प्रांतीय निर्वाचन क्षेत्र, नगर पालिका, गांव पालिका और वार्ड स्तर तक संगठन का विस्तार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बुद्धिजीवियों, युवाओं, छात्रों, किसानों और महिलाओं को जोड़ने के लिए विभिन्न जनसंगठन और भ्रातृ संगठन भी बनाए जाएंगे।
मोहम्मद रिजवान अंसारी ने लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से शोषित समुदाय से अपील की कि वे इस मोर्चे पर विश्वास करें। उन्होंने आश्वस्त किया कि यह मोर्चा सत्ता के तात्कालिक स्वार्थ या पदों के लिए नहीं बना है और यह कभी नहीं टूटेगा। जब तक राज्य सत्ता में उत्पीड़ित जनता की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो जाती और जातीय तथा साम्प्रदायिक भेदभाव पर आधारित व्यवस्था का अंत नहीं हो जाता, तब तक समानता और सामाजिक न्याय के लिए यह साझा संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।




