सऊदी अरब के लिए प्रस्तावित नेपाली राजदूत सुनार को जर्मनी से निर्वासित किए जाने का रिकॉर्ड नहीं
सऊदी अरब के लिए प्रस्तावित नेपाली राजदूत गिरीबहादुर सुनार को जर्मनी से निर्वासित (डिपोर्ट) किए जाने का कोई विवरण उपलब्ध नहीं है। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आव्रजन कार्यालय ने यह जानकारी दी है। कार्यालय के अनुसार, घटना 14 वर्ष पुरानी होने के कारण संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सका है।
सुनार के खिलाफ संसदीय सुनवाई समिति में दर्ज शिकायत की तथ्य-जांच के क्रम में समिति ने आव्रजन कार्यालय से यह जानकारी मांगी थी कि क्या उन्हें जर्मनी से निर्वासित किया गया था।
गत 12 अक्टूबर को हुई समिति की बैठक में शिकायतकर्ता के साथ चर्चा के बाद सुनार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता के इस दावे की पुष्टि के लिए आव्रजन कार्यालय से विवरण मांगा गया कि सुनार को जर्मनी से निर्वासित किया गया था।
संसदीय सुनवाई समिति को भेजे गए जवाब में आव्रजन कार्यालय ने कहा है कि घटना 14 वर्ष पुरानी होने के कारण उसके पास इस संबंध में कोई विवरण उपलब्ध नहीं है। हालांकि, रिकॉर्ड उपलब्ध न होने का अर्थ यह नहीं है कि निर्वासन की घटना हुई थी या नहीं हुई थी।
सुनार के खिलाफ दर्ज दो शिकायतों में से दूसरी में उन पर एक महिला के साथ हिंसा करने और धमकी देने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में जिला पुलिस कार्यालय, ललितपुर से मांगी गई जानकारी समिति को मिल चुकी है। ललितपुर पुलिस ने बताया है कि संबंधित महिला और सुनार के बीच 14 फरवरी 2019 को समझौता हुआ था।
गत 18 सितंबर को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में नेपाल के 13 देशों के लिए राजदूतों की सिफारिश की गई थी। भारत के लिए डॉ. निश्चलनाथ पांडे, चीन के लिए डॉ. कल्याणराज शर्मा, अमेरिका के लिए चिरनजंग थापा, ब्रिटेन के लिए गौरवशमशेर जंगबहादुर राणा और जर्मनी के लिए सरू जोशी को प्रस्तावित किया गया था।
इसी तरह, इजरायल के लिए सुरेशकुमार कर्ण, स्पेन के लिए प्राप्ति शेरचन, जापान के लिए जिज्ञानकुमार थापा, ओमान के लिए डॉ. पदमाक्षी राणा, मलेशिया के लिए चूड़ामणि खरेल, दक्षिण कोरिया के लिए प्रो. डॉ. संगम श्रेष्ठ, श्रीलंका के लिए डॉ. मञ्चलाकुमारी झा और सऊदी अरब के लिए गिरीबहादुर सुनार की सिफारिश की गई थी।
प्रस्तावित राजदूतों की संसदीय सुनवाई के दौरान समिति में दर्ज शिकायतों की जांच के लिए संबंधित निकायों से जानकारी मांगी जा रही है। आरोपों की तथ्य-जांच के बाद ही समिति आगे की प्रक्रिया बढ़ाएगी।

