अंतरप्रदेशीय मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन: सक्षम, चुस्त और जवाबदेह प्रादेशिक शासन के लिए नौ साझा प्रतिबद्धताएँ
विराटनगर, 14 अक्टूबर।
नेपाल के प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने सक्षम, चुस्त, मितव्ययी और जवाबदेह प्रादेशिक शासन संचालित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। बुधवार को कोशी प्रदेश में संपन्न अंतरप्रदेशीय मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में संविधान का पालन करते हुए प्रादेशिक शासन के माध्यम से संघीयता को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया।
मुख्यमंत्रियों ने संघीयता के संबंध में फैले भ्रम और गलत धारणाओं को तथ्यों, अनुभवों और उपलब्धियों के आधार पर स्पष्ट करते हुए नागरिकों का विश्वास और अपनत्व बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया। सम्मेलन में सुदूरपश्चिम प्रदेश को छोड़कर अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्री शामिल हुए।
सम्मेलन में सहभागी सातों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने संविधान में परिकल्पित सहकारिता, सहअस्तित्व और समन्वय पर आधारित संघीय शासन प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने, प्रदेशों के संवैधानिक अधिकारों का उपयोग सुनिश्चित करने, स्थानीय तह की स्वायत्तता का सम्मान करने तथा सुशासन, गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक सेवाओं और समावेशी विकास के माध्यम से समृद्ध नेपाल के निर्माण में योगदान देने की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की।
मुख्यमंत्रियों की नौ साझा प्रतिबद्धताएँ
1. संविधान का पूर्ण कार्यान्वयन और संघीयता का सुदृढ़ीकरण
नेपाल के संविधान की मूल भावना और सिद्धांतों के अनुरूप संघ, प्रदेश और स्थानीय तह के संवैधानिक अधिकारों, जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र का सम्मान करते हुए उनका प्रभावी कार्यान्वयन किया जाएगा। संघीय शासन प्रणाली को अधिक व्यवस्थित और परिणाममुखी बनाने के लिए आवश्यक कानूनी, नीतिगत, संस्थागत और प्रशासनिक सुधार किए जाएंगे। इसके लिए तीनों स्तरों के बीच समन्वय, सहयोग और साझेदारी को मजबूत किया जाएगा।
2. प्रदेश और स्थानीय तह के संबंधों का निर्धारण तथा स्थानीय स्वायत्तता का सम्मान
संविधान और प्रचलित कानूनों के अनुसार प्रदेशों तथा स्थानीय तह के अधिकारक्षेत्र, स्वायत्तता और जिम्मेदारियों का सम्मान किया जाएगा। अधिकारों के दोहराव, अनावश्यक हस्तक्षेप और कार्यक्षेत्र के अतिक्रमण को रोका जाएगा।
स्थानीय तह के एकल अधिकार क्षेत्र के विषयों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। स्थानीय निकायों को प्रतिस्पर्धी के बजाय विकास के सहयोगी के रूप में देखते हुए उनकी संस्थागत और तकनीकी क्षमता बढ़ाने, संसाधन जुटाने तथा सेवा प्रवाह में सहयोग किया जाएगा। साथ ही, छोटे-छोटे और बिखरे हुए विकास परियोजनाओं में अनावश्यक बजट आवंटन को हतोत्साहित किया जाएगा।
3. सक्षम, चुस्त, मितव्ययी और जवाबदेह प्रादेशिक शासन
प्रदेश सरकार के अंतर्गत आने वाले निकायों, समितियों, बोर्डों और कार्यालयों की आवश्यकता, औचित्य, कार्यक्षमता और उपलब्धियों की नियमित समीक्षा की जाएगी। जरूरत के अनुसार उनका एकीकरण, पुनर्गठन या विघटन किया जाएगा।
प्रशासनिक संरचना को सक्षम, कार्यमूलक और मितव्ययी बनाकर अनावश्यक खर्च कम किया जाएगा। बचाए गए सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग नागरिक सेवाओं, उत्पादन, रोजगार, बुनियादी ढांचे और सामाजिक क्षेत्रों में किया जाएगा। प्रशासन को पेशेवर, निष्पक्ष, जवाबदेह और नागरिकमैत्री बनाया जाएगा। सभी प्रदेशों में समान प्रकृति के कार्य करने वाले कार्यालयों, निकायों और आयोगों के नामों में भी एकरूपता लाने की व्यवस्था की जाएगी।
4. सुशासन, पारदर्शिता और परिणामोन्मुख सार्वजनिक वित्त प्रबंधन
परियोजना बैंक, मध्यमकालीन व्यय संरचना, संसाधनों की उपलब्धता तथा वार्षिक नीति एवं कार्यक्रमों के बीच सामंजस्य स्थापित किया जाएगा। प्रदेश सरकार की नीतियों, योजनाओं, बजट, सार्वजनिक खरीद और व्यय प्रणाली को पारदर्शी, जवाबदेह, मितव्ययी और परिणामोन्मुख बनाया जाएगा।
सार्वजनिक संसाधनों का आवंटन राजनीतिक पहुंच, व्यक्तिगत स्वार्थ और अन्य प्रभावों से मुक्त रखते हुए उत्पादन, उत्पादकता, रोजगार, गुणवत्तापूर्ण सेवा तथा आर्थिक-सामाजिक प्रतिफल देने वाली प्राथमिकता प्राप्त परियोजनाओं पर केंद्रित किया जाएगा। वित्तीय अनुशासन, आंतरिक नियंत्रण, सार्वजनिक सुनवाई, सामाजिक परीक्षण, लेखापरीक्षण और निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा। भ्रष्टाचार, अनियमितता और सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी।
5. नागरिक-केंद्रित सेवा प्रवाह तथा समावेशी और संतुलित विकास
विकास प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता, प्रभावकारिता तथा जवाबदेही बढ़ाई जाएगी। सेवाओं को सरल, सुलभ, प्रौद्योगिकीमैत्री और नागरिक-केंद्रित बनाया जाएगा, ताकि नागरिक उनके सुधार को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सकें।
भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए सभी क्षेत्रों, वर्गों, समुदायों, लिंगों, आयु समूहों, दिव्यांग व्यक्तियों और पिछड़े समुदायों की समानुपातिक भागीदारी तथा अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे। विकास के लाभों का न्यायसंगत वितरण करते हुए क्षेत्रीय असंतुलन, गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक भेदभाव को कम करने पर जोर दिया जाएगा।
6. अच्छी कार्यप्रणालियों, ज्ञान, तकनीक और संस्थागत अनुभवों का आदान-प्रदान
सातों प्रदेशों की सरकारें नीति निर्माण, योजना एवं बजट प्रबंधन, सार्वजनिक सेवा प्रवाह, संस्थागत सुधार, तकनीक के उपयोग और नवाचार के क्षेत्र में प्राप्त सफल अनुभवों तथा उपलब्धियों का नियमित आदान-प्रदान करेंगी।
साझा चुनौतियों के समाधान, नीतिगत सुधार और संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए संयुक्त अध्ययन, अनुसंधान, ज्ञान प्रबंधन तथा आपसी सीख की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाएगी। प्रदेशों के बीच सहयोग को परिणाममुखी बनाने के लिए आवश्यकतानुसार विषयगत संवाद, चर्चा, अध्ययन और क्षमता विकास कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
7. साझा प्रादेशिक आवाज और संघीयता का सशक्तीकरण
संघीय शासन प्रणाली का उद्देश्य नागरिकों को उनके निकट प्रभावी, सहज और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं तथा विकास के अवसर उपलब्ध कराना है। इसी मान्यता के अनुरूप संघीयता के लाभों को नागरिकों के दैनिक जीवन में अनुभव कराने का प्रयास किया जाएगा।
संघीयता के संबंध में भ्रम और गलत धारणाओं को तथ्यों, अनुभवों तथा उपलब्धियों के आधार पर स्पष्ट कर नागरिकों का विश्वास बढ़ाया जाएगा। प्रदेशों के संवैधानिक अधिकारों, जिम्मेदारियों और साझा सरोकारों पर दलगत, व्यक्तिगत तथा प्रादेशिक स्वार्थों से ऊपर उठकर साझा दृष्टिकोण बनाया जाएगा। संघ, प्रदेश और स्थानीय तह के बीच संबंधों को संविधान की भावना के अनुरूप विश्वसनीय, सहयोगात्मक और परिणाममुखी बनाया जाएगा। अंतरप्रदेशीय सहयोग को नियमित और संस्थागत स्वरूप दिया जाएगा।
8. नागरिक सहभागिता, प्रमाण-आधारित और डिजिटल शासन
एकीकृत आंकड़ा एवं सूचना प्रणाली विकसित कर उसके प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से प्रदेश सरकार की नीतियों, योजनाओं, बजट और विकास प्राथमिकताओं के निर्धारण में नागरिकों, स्थानीय समुदायों, निजी एवं सहकारी क्षेत्र, शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों सहित सभी संबंधित पक्षों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
नीतियों और सार्वजनिक संसाधनों के आवंटन को आवश्यकताओं, तथ्यों, प्रमाणों और परिणामों के आधार पर पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जाएगा। नागरिकों के सुझावों, शिकायतों, अनुभवों और निगरानी संबंधी जानकारियों को डिजिटल तथा अन्य सुलभ माध्यमों से एकत्रित और विश्लेषित कर निर्णय प्रक्रिया में उपयोग किया जाएगा।
9. प्रतिबद्धताओं का कार्यान्वयन, निगरानी और समीक्षा
इस प्रतिबद्धता पत्र में उल्लिखित साझा संकल्पों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रत्येक प्रदेश अपनी जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र के अनुरूप आवश्यक नीतियां, संस्थागत व्यवस्थाएं और कार्ययोजनाएं तैयार करेगा।
प्रतिबद्धताओं की प्रगति, उपलब्धियों और कार्यान्वयन में सामने आने वाली चुनौतियों की समीक्षा के लिए वर्ष में कम से कम एक बार मुख्यमंत्रियों के स्तर पर अंतरप्रदेशीय बैठक या सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार विषयगत कार्यसमूह गठित किए जाएंगे, ताकि आपसी समन्वय, सहयोग, निगरानी और मूल्यांकन प्रभावी हो सके। कार्यान्वयन से प्राप्त अनुभवों और उपलब्धियों को आगामी नीतियों, योजनाओं तथा कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।


