Mon. Oct 5th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

जिन्दगी अलविदा…, नही रहें अम्बर

 

विजेता चौधरी, जेठ २५ काठमाण्डू
मरिगए सम्झना छ
बाँचे भेंट होला,
जिन्दगी, जिन्दावाद, जिन्दावाद
जिन्दगी को जिन्दावाद कहने बाले अम्बर गुरुङ ने आज संसार को कहा अलविदा । संगीत नक्षत्र के नौलाख तारा में एक चमकीला तारा अस्त हो गई ।ambar2
राष्ट्रगान के संगीतकार तथा वरिष्ठ संगीतज्ञ अम्बर गुरुङ की आज मंगलबार सुवह २ बजकर ३७ मिनट पर निधन हो गई है ।
काठमाण्डू स्थित ग्राण्डी अस्पताल में उपचाररत उनके निधन के पश्चात उनको अन्तिम श्रद्धाञ्जली के लिए प्रज्ञाप्रतिष्ठान मे ले जाई गई है । तीन बजे के बाद हिन्दु धर्म के अनुसार उनका अन्तिम संस्कार पशुपति आर्यघाट में किया जाने का तैयारी चल रहा है ।
नौलाख तारा उदाए जैसे कालजयी गीत गाने बाले अम्बर नेपाली गीत–संगीत क्षेत्र के स्तम्भ हैं । रातो र चन्द्रसूर्य जंगी निशान हाम्रो जैसे राष्ट्रीय पहचान व स्वाभिमान के गीत गाने बाले अम्बर लोगों के दिलों पर अनवरत राज करते रहें । इतना ही नही गणतन्त्र नेपाल बनने के बाद लिखा गया राष्ट्रगान सयौं थुंगा फूल का हामी एउटै माला नेपाली राष्ट्रीय एकता व पहचान के गीत में संगीत भर अमर हो गए ।

यह भी पढें   ३४ हजार फीट पर बने ईश्वर : कैप्टन स्मित मच्छार : डा. विजय दत्त

ambar gurung1
हजारों गीत में संगीत भरने बाले अम्बर १९९४ फागुन १४ गते दार्जिलिंग के लालढिकी में पैदा हुए थे । बीस वर्ष के उमर से ही गायकी में तल्लीन गुरुङ दार्जिलिगं के चोक चौराहे पर गाते हुए दिखते थे । अपने गायकी की वजह से शहर में परिचित होने लगे थे ।
उनका रेकर्ड किया हुआ पहला गीत नौ लाख तारा उदाए ने उन्हें संगीत क्षेत्र में स्थापित ही नही किया वरण इस गीत के रेकर्डिगं के बाद सम्मान स्वरुप उनको सिन्दुर जात्रा करके कालिम्पोङ घुमाया गया था । ये उन दिनों की बात है जव वे इस क्षेत्र में नए नए थे ।
संगीत तथा नाट्य प्रज्ञाप्रतिष्ठान के प्रथम कुलपति समेत रहे अम्बर को कवि गोपालप्रसाद रिमाल द्वारा रचित गीत रातो र चन्द्रसूर्य ने उनको एक अलग ही उँचाई दिलवाई ।
गायन, संगीत व गीत लेखन स्वयम करने वाले अम्बर कला के प्रतिरुप ही थे कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी । उनको जगदम्बाश्री पुरस्कार छिन्नलता गीत पुरस्कार, गोरखा दक्षिण बाहु, इन्द्रराज्यलक्ष्मी पुरस्कार आदि से नवाजा गया है ।
संगीत को आत्मरंजन माननेवाले गुरुङ अपना सारा जीवन ही संगीत क्षेत्र को अर्पण कर ९७ वर्ष की आयु में इस नश्वर संसार को अलविदा कहा ।
अपने गीत–संगीत से लोगों के दिलों में सदैव जीवित रहेंगे अम्बर, शायद इसी लिए तो उन्होंने जीवनबोध के गीत रचे होंगे जिन्दगी, जिन्दावाद जिन्दावाद…..।
दिवंगत वरिष्ठ संगीतज्ञ अम्बर गुरुङ को हिमालिनी परिवार की ओर से भाव पूर्ण श्रद्धाञ्जली अर्पण ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com