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श्री रामचन्द्र मिश्र: गांधीवादी और आदर्शवादी राजनीति की एक मिसाल

 

आध्यात्मिकता की ओर झुकाव रखने वाले, खादी, कुर्ता, धोती और चप्पल पहनकर एक झोली लटकाकर गांव-गांव फिरने वाले क्रान्तिकारी मिश्र जी स्वयं सदैव इमान्दारी की मिसाल बने रहे और राजनीति भी उसी तरह साफ-सुथर और सैद्धान्तिक हो चाहते थे


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स्व. श्री रामचन्द्र मिश्र

श्री रामचन्द्र मिश्र नेपाली राजनीति के गिनेचुने प्रखर गांधीवादी और मधेश आन्दोलन के पर्वतक थे। महोत्तरी के पिपरा में जमीन्दार परिवार में जन्में मिश्रजी अपने स्कूल जीवन से ही राजनीति और अध्यात्म पर झुकाव रखते थे। उनका भेंट भारतीय नेता विनोवा भावे से होने के बाद वे गांधीवादी विचारधारा से काफी प्रभावित हुए।

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निरकुंश पंचायत के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उनका पूरा जीवन गिरफ्तारी, जेल और यातना से भरा हुआ था। सन् १९८३ में नेपाली कांग्रेस के महोत्तरी जिला अध्यक्ष रहे मिश्र जी उसी वर्ष श्री गजेन्द्र नारायण सिंह सहित के लोगों से मिलकर नेपाल सद्भावना परिषद् की स्थापना की। उस समय श्री गिरिजा प्रसाद कोईराला कांग्रेस के महासचिव थे और उन्होंने मिश्रजी को कांग्रेस या सद्भावना परिषद् में से किसी एक को चुनने के लिए अल्टिमेटम दिया, जिसके चलते मिश्र ने कांग्रेस को छोड दिया।

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सन् १९९० के जनआंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार करके छह महिने के लिए सिन्धुली कारागार में रखा गया।

सद्भावना पार्टी के संस्थापकों में से एक रहे मिश्रजी सन् १९९१ और १९९४ में चुनाव भी लडे। गजेन्द्र नारायण सिंह का काठमांडू केन्द्रित और भारतीय उत्प्रेरित राजनीति को लेकर उनसे मिश्रजी का मतभेद भी रहता था।

आध्यात्मिकता की ओर झुकाव रखने वाले, खादी, कुर्ता, धोती और चप्पल पहनकर एक झोली लटकाकर गांव-गांव फिरने वाले क्रान्तिकारी मिश्र जी स्वयं सदैव इमान्दारी की मिसाल बने रहे और राजनीति भी उसी तरह साफ-सुथर और सैद्धान्तिक हो चाहते थे। जमीन्दार परिवार के होते हुए भी अपना सुख-शयल और धन सम्पत्ति को छोडकर कठिनाइ और संघर्ष से रिश्ता बनाने वाले मिश्र जी अपने त्याग के लिए भी एक मिसाल है। उन्होंने पिपरा में श्री अरबिंदो आश्रम की भी स्थापना की थी। सन् २००९ सितम्बर १४ तारीख को उनका निधन हुआ।

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साभार :सि.के राउत जी के फेशबुक वाल 

स्रोत :http://nepalitimes.com/~nepalitimes/news.php?id=16298

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