Sun. Jan 26th, 2020

19 हजार करोड़ का घाटा, 40 हजार करोड़ के वादे

उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने जा रहे अखिलेश के सामने वादों की लंबी सूची है। घोषणापत्र में किए वादों की कुल कीमत 40 हजार करोड़ है जबकि वर्तमान में राज्य का राजकोषीय घाटा 19 हजार करोड़ है।
अखिलेश यादव के सामने चुनावी वादों को पूरा करने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था को लेकर पूर्ववर्ती मायावती सरकार द्वारा खींची गई लकीर को बड़ी करने की बड़ी चुनौती होगी।

15 मार्च को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालने जा रहे अखिलेश यादव के सामने वादों की लंबी सूची है, जो उनके और उनकी पार्टी के दूसरे नेताओं द्वारा जनता से किए गए हैं।
इस चुनाव में सपा ने अपने घोषणा पत्र में सच्चर और रंगनाथ मिश्रा कमेटी की सिफारिशें हूबहू लागू करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने, किसानों और बुनकरों का कर्ज माफ करने के साथ उन्हें बिजली मुफ्त देने की बात कही थी। इसके अलावा गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा और दवा, शिक्षित बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता, मेधावी कन्याओं को कन्या विद्या धन देने के साथ इंटर पास छात्रों को लैपटॉप और दसवीं पास छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट देने जैसे वादे किए थे।
कर्ज माफी में एकमुश्त 11 हजार करोड़ रुपये, मुफ्त बिजली देने में हर साल 1650 करोड़ रुपये, लैपटॉप और टैबलेट देने में करीब पांच हजार करोड़ रुपये, 25 साल से ज्यादा उम्र के बेरोजगारों को को हर महीने 1000 रुपये बेरोजगारी भत्ता देने में हर साल करीब 1000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
समाजवादी सरकार के वायदों की कुल कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपये बैठती है और राज्य का राजकोषीय घाटा करीब 19 हजार करोड़ रुपये है। ऐसी खस्ताहाल अर्थव्यवस्था में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए वादा निभाना आसान नहीं होगा।

गुंडागर्दी और अपराध पर लगाम लगाना तो सपा के युवराज के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। लोग अखिलेश से उम्मीद कर रहे हैं कि पिछली सपा सरकार की तरह गुंडों और माफियाओं पर नरम रवैया नहीं बल्कि उन पर कठोर कारवाई होगी।

हालांकि शनिवार को विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर अखिलेश ने जोर देकर कहा, ”सपा की सरकार कानून-व्यवस्था भंग करने वालों से सख्ती से निपटेगी। इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी और ऐसा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

राजनीतिक विश्लेषक एचएन दीक्षित कहते हैं, ”साफ-सुथरी छवि, सहज अंदाज और डीपी यादव जैसे माफियाओं को पार्टी में शामिल न करने जैसे कुछ फैसलों से जनता के दिल में जगह बनाने वाले अखिलेश के सामने चुनावी वादे पूरे करने के साथ सुशासन के जरिये लोगों को यह भरोसा दिलाने की हर पल यह चुनौती होगी कि उन्होंने सपा को बहुमत देकर कोई गलती नहीं की।”

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