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मधेशियों के साथ रंग-भेद और अमानवीय विभेद क्यों ? रोशन झा

 

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रोशन झा, राजबिराज , २७ नवम्बर | दुनियाँ सत्य और न्याय के बलपर टिकी है | हर न्यायालय के वह तराजू और आँखों में पट्टी बांधे न्याय की देवी खड़ी हो कर यह संदेश देती रहती है कि न्याय रंग या वर्ण के आधार पर नहीं अपितु व्यक्तियों में रहे गुण और दोष का मापन की आधार पर होनी चाहिए | परंतु नेपाली उपनिवेश में जी रहे मधेशी मानव इस धरातल से बहुत दूर, अपरिचित और अनुभूति विहीनअवस्थामेंहै|

लोकतन्त्र,मानवअधिकार, न्याय, नागरिक अधिकार, स्वतन्त्रता मधेशियों के लिए पहूँच के दायरे से कोशों दूर है | बारबार रंग-भेद का
शिकार होते रहे हैं | सामाजिक, सांस्कृतिक,आर्थिक एवं राजनैतिक विभेद का चरम पीड़ा में जीवन व्यतित करते हैं | काले रंग के मधेशी मानव शासकों का दास (कमैया, कमलरी, मजदूर) बनकर जिन्दगी बिताने पर मजबुर होते रहे हैं | ईतिहास गवाह है मधेस की भूमि और मधेस वासियों की सभ्यता हजारों वर्ष पुराने नेपाल से पहले का है | दो -ढाई सौ वर्ष पहले गोरखा में सीमित रहे गोरखाली शासक हजारों वर्ष पहले मधेश की भूमि पर जन्म लिए जनक, बुद्ध और जानकी पर कब्जा (राष्ट्र विभूति बनाकर) जमाकर मधेशियों को ईतिहास विहीन बनाने की साजिस की गई है | सन् १८१६ और सन् १८६० में ब्रिटिस सरकार ने भारत शासन के दौरान मधेस का यह भूमी नेपाली सरकार को सौंपकर मधेशियों को गुलाम बना दिया। बिगत के दो-सय वर्ष से मधेसी लोग नेपाली शासक के शोषण और बिभेद का सिकार होते आए हैं। मधेसी कोई जाती वर्ग समुदाय और सम्प्रदाय नही बल्कि सदियों से यहाँ बसोबास करते आरहे यहाँ के मूल
निवासी लोग है। मधेस की वातावरण वनस्पती ग्रिष्म ताप के कारण यहाँ पर जन्म लेनेवाले लोग काला वर्ण का होता है तो वही पहाड़ की सर्द वादियो मे रहने वाले लोग सफेद वर्ण के होते है। इसी काला-गोरा रंग के आधार पर नेपाली शाषक और नेपाली लोग मधेसीयों का अपमान करते है काले,धोती, मर्सिया एवं विभिन्न के उपनामो से मधेसीयों को अपहेलित किया जाता है। मधेस पर मधेसीयों का शाषण नही है, मधेस की न तो अपनीपुलिस है, न सेना; न कानुन, न अपनी शाषण सत्ता। सदियों से मधेसी जनता पर हो रहे अत्याचार का अन्त्य के बैज्ञानिक डाॅ. सि. के. राउत के संयोजकत्व मे “स्वतन्त्र मधेस गठबन्धन” निर्माण हुआ जो की शान्तिपूर्ण मार्ग से मधेस देस के लिये संघर्षरत है। इसी संघर्ष के दौरानबि. स. 2071/09/10 गते काठमाॅण्डौ सार्क सम्मेलन मे बृहत रुप से गठबन्धन के कार्यकर्ता मधेस की आजादी के लिये नारा लगाते हुए प्रदर्सन करने पहुँचे; तभी नेपाली पुलीस ने काला चमडी बाले लोगों को गिरफ्तार करना सुरु कर दिया डाॅ.राउत सहित पाँच सौ से ज्यादा लोगो को पकड कर अन्दर कर दिया। काला चमडी वाले मधेसी लोगो को एक साथ रंग देख-देख कर भारी संख्या मे गिरफ्तार किया जाना नेपाल सरकार की रंगभेदी नीति को स्पष्ट करती है, और इस दमन के प्रतिकार स्वरुप गठबन्धन द्वारा प्रत्येक वर्ष अगहन(मंसिर) 10 गते “रंगभेदी गिरफ्तारी” का बिरोध प्रदर्सन किया
जाता है।
यह बहुत दुःख की बात है कि मधेस के नेतागण तथा जागरुक व्यक्ति मधेसी जनता के प्रति हो रहे अत्याचारों के खिलाप एकजुट होते नहीं दिखाई देते; और नेपाली राज मे अधिकार प्राप्ति की नाकाम कोशिस मे लगे हुए है। मधेस के किसी जिले में, कहीं भी किसी व्यक्ति विशेष या गठबन्धन के साथ हो रहे अन्याय का जमकर बिरोध करना मधेस के हर क्षेत्र के व्यक्तियो का कर्तब्य है। मधेस और मधेसी जनता के साथ हो रहे बिभेद और शाषण का एक मात्र बिक्लप मधेस की आजादी है।

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रोशन झा
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