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भारत सरकार ने किया पासपोर्ट नियमों में बदलाव

 

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*नई दिल्ली.मधुरेश* केन्द्र की एनडीए सरकार ने पासपोर्ट बनाने के नियम आसान तो बना दिए हैं लेकिन इसमें एक ऐसा नया नियम बनाया है जिसकी वजह से उसे आने वाले दिनों में कई तरह के आरोपों का सामना करना पड़ा सकता है। यह नियम साधु सन्यासियों के लिए है। अब साधु सन्यासी चाहे तो पासपोर्ट में अपने माता-पिता के नाम की जगह अपने अध्यात्मिक गुरू का नाम लिख सकते हैं।

इसके साथ ही लिव इन रिश्ते या बगैर शादी के होने वाले बच्चों के लिए पासपोर्ट बनाने के नियम भी आसान कर दिये गये हैं। पासपोर्ट बनाने में जन्म प्रमाण पत्र को लेकर उठने वाली समस्याओं के मद्देनजर इससे संबंधी नियमों को काफी उदार बना दिया गया है।

अब सरकार ने पासपोर्ट के आवेदन के साथ पैन कार्ड, आधार कार्ड, पेंशन आर्डर, ड्राइविंग लाइसेंस, चुनाव पहचान पत्र, एलआइसी की पॉलिसी बांड्स में लिखित जन्म दिन को जन्म प्रमाण पत्र को मान्यता दी जाएगी। इस बारे में घोषणा करते हुए विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह ने कहा कि पासपोर्ट के नियमों को आसान बनाने के लिए एक अंतर मंत्रालीय समिति बनाई गई थी और उसकी सिफारिशों के आधार कई कदम उठाये गये हैं। सरकार की मंशा है कि पासपोर्ट बनाने के लिए दुनिया के बेहतरीन देशों के स्तर पर हो और हर भारतीय को आसानी से पासपोर्ट मिल जाए।

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जो बदलाव किये गये हैं उनमें सबसे चर्चित साधु सन्यासियों वाला है। साधु सन्यासियों की तरफ सरकार से यह अनुरोध किया गया था कि उनके माता पिता के नाम की जगह उनके अध्यात्मिक गुरु का नाम होना चाहिए। सरकार ने इसकी अनुमति दे दी है लेकिन शर्त यह है कि उन्हें सरकार की तरफ से कोई ऐसी पहचान पत्र पेश करनी होगी जिसमें माता पिता के नाम की जगह उस अध्यात्मिक गुरु का नाम हो। इसमें चुनाव पहचान कार्ड, आधार कार्ड या पैन कार्ड वगैरह शामिल हैं।

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नए नियम समाज में हो रहे बदलाव के मुताबिक बनाये गये हैं। मसलन, पासपोर्ट आवेदन के लिए माता व पिता दोनों का नाम लिखना अनिवार्य नहीं है। इससे सिंगल पैरेंट्स के बच्चों को पासपोर्ट मिलने की राह खुल गई है। पासपोर्ट आवेदन करने में अभी 15 खाने भरते हैं जिसे घटा कर 09 नौ कर दिया गया है। कई तरह की सूचनाओं को स्वघोषित कर दिया गया है।

शादीशुदा व तलाकशुदा लोगों के लिए इन दोनों के प्रमाण पत्र पेश करने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। बेसहारा या अनाथालय में रहने वाले बच्चों के जन्म दिन के बारे में नया नियम यह हो गया है कि वे मैट्रिक के प्रमाण पत्र या किसी कोर्ट की तरफ से आदेश के मुताबिक दिए गए जन्म दिन को मान्य किया जाएगा। अविवाहित मां या लिव इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों के लिए भी नियम आसान किये गये हैं।

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*?ये हैं अहम बदलाव*

1. कई तरह के प्रपत्रों को जन्म दिन प्रमाणपत्र के तौर पर मिली मान्यता

2. आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, चुनाव पहचान पत्र, एलआइसी के बांड्स को माना जाएगा जन्म प्रमाण पत्र

3. सिंगल पैरेंट के बच्चों को भी मिलेगा पासपोर्ट

4. शादीशुदा आवदेकों के लिए शादी का प्रमाण पत्र देना जरुरी नहीं

5. तलाकशुदा आवेदकों के लिए पूर्व पति या पत्नी का नाम बताना जरुरी नहीं

6. अविवाहित मां के बच्चों के पासपोर्ट बनाने के नियम भी आसान

7. साधु-सन्यासियों के पासपोर्ट में मां-बाप के नाम की जगह अध्यात्मिक गुरू का नाम भी हो सकता दर्ज

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