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दूल्हे को दुल्हन की मां शराब पिलाकर रस्म की शुरुआत करती है

 

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१३  पुस, छत्तीसगढ़ , शराब पीना  बुरा माना जाता है, लेकिन भारत के  छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में तो सास खुद अपने होने वाले दामाद को शराब पिलाती है । कवर्धा  जिले के कुछ गावों में एक अनूठी परंपरा देखी गयी है |  उस जिले के  बैगा आदिवासियों के विवाह में दूल्हे को दुल्हन की मां ने  शराब पिलाकर रस्म की शुरुआत करती है और इसके बाद पूरा परिवार शराब का सेवन करता है । इतना ही  नहीं, दूल्हा और दुल्हन भी एक-दूसरे को शराब पिलाकर इस परंपरा का निर्वहन करते हैं । इसके बाद पूरे गांव में शादी का जश्न मनाया जाता है ।  बैगा आदिवासियों का समुदाय इस  मामले में पूरी तरह से अलग है, क्योंकि इस समुदाय में शादी,ब्याह से लेकर मातम में भी शराब का सेवन किया जाता है।
जिले के दूर  वनांचल में रहने वाले बैगा आदिवासी परिवार में अब शादी का सिलसिला शुरू हो जाएगा । शादी पर्व  इन परिवारों को बेसब्री से इंतजार होता है ।  शादी में बाराती और घराती तो शराब पीते ही हैं, साथ ही दूल्हा , दुल्हन को भी शराब का शगुन करना बेहद जरूरी होता है ।  बारात जब दुल्हन को  लेने गांव पहुंचती है तो सबसे पहले शराब का ही शगुन किया जाता है और  खुद दुल्हन की मां ने  दूल्हे को अपने हाथो  से शराब पिलाती है , इसके बाद दूल्हे और दुल्हन की बारी आती है और वे भी एक दूसरे को शराब पिलाते हैं और बैगा समुदाय को करीब से जानने वाले कुमारी  बताती  हैं कि –  बैगा आदिवासियों की शादी में कोई पंडित नहीं होता और न ही कोई विशेष सजावट होती है , यहां तक की  दहेज प्रथा भी पूरी तरह से बंद है ,  यहां केवल महुए से बनी शराब चलती है और  यही इनके लिए सब कुछ होता है , महंगाई के इस दौर में आज भी परिवार का मुखिया शादी का खर्च महज द्दद्द रुपए ही लेता है और  वहीं समाज के पंचों को ज्ञण्ण् रुपए दिए जाते हैं |
वनांचल में निवास करने वाले बैगा समाज में शादी कर दुल्हन लाने के लिए आज भी पूरी बारात मीलों दूर पैदल चलकर जाती है | शादी का पंडाल भी पेड़ों की पत्तियों से बनाया जाता है , तमाम सामाजिक रस्मों को पूरा करने के बाद दूल्हा दौड़ लगाकर अपनी दुल्हन को पकड़ लेता है और उसे अपनी अंगूठी पहना देता है | आदिवासी बैगा समुदाय में किसी भी जश्न या मातम में शराब परोसना अनिवार्य है |  बैगा इस प्रचलित मान्यता को लेकर चर्चा में रहते हैं |

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