देश को जिद की नहीं जुनून की आवश्यकता है : राष्ट्रपति समक्ष डा.श्वेता दीप्ति
हिमालिनी की सम्पादक डा.श्वेता दीप्ति ने भाषा स्वतंत्रता की माँग को उठाया । उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारा अधिकार है और मधेश के प्रायः हर घर में मित्र राष्ट्र भारत से एक बेटी बहु बनकर आती है । किन्तु यहाँ आकर उनकी शिक्षा बाधित हो जाती है क्योंकि वो हिन्दी भाषा के माध्यम से शिक्षित होकर आती हैं जिसे यहाँ मान्यता प्राप्त नहीं है । बिहार या उत्तरप्रदेश से आई हुई बेटियाँ यहाँ आकर अपनी आगे की पढाई चाह कर भी पूरी नहीं कर पाती हैं । इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में उन्हें भाषा की स्वतंत्रता होनी चाहिए ताकि उनकी शिक्षा बाधित ना हो ।
चैत्र २७ गते, काठमान्डू | राष्ट्रपति भवन में आयोजित समसमयिक विषय पर आयोजित कार्यक्रम में भाषा स्वतंत्रता की माँग भी उठाई गई । सम्माननीय राष्ट्रपति महोदया एवं विभिन्न क्षेत्र से आए बुद्धिजीवियों के समक्ष जहाँ चर्चा संविधान, सीमांकन, निर्वाचन आदि पर सिमटी हुई थी वहीं हिमालिनी की सम्पादक डा.श्वेता दीप्ति ने भाषा स्वतंत्रता की माँग को उठाया । उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारा अधिकार है और मधेश के प्रायः हर घर में मित्र राष्ट्र भारत से एक बेटी बहु बनकर आती है । किन्तु यहाँ आकर उनकी शिक्षा बाधित हो जाती है क्योंकि वो हिन्दी भाषा के माध्यम से शिक्षित होकर आती हैं जिसे यहाँ मान्यता प्राप्त नहीं है । बिहार या उत्तरप्रदेश से आई हुई बेटियाँ यहाँ आकर अपनी आगे की पढाई चाह कर भी पूरी नहीं कर पाती हैं । इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में उन्हें भाषा की स्वतंत्रता होनी चाहिए ताकि उनकी शिक्षा बाधित ना हो ।
डा. दीप्ति ने राष्ट्रपति जी से अनुरोध किया कि देश के तीन सर्वोच्च पदों पर महिलाओं की उपस्थिति ने जिस गौरव का अहसास कराया था उसे व्यवहारिक रुप में भी अमल में लाया जाना चाहिए । निर्वाचन में महिलाओं को समान अवसर मिलना चाहिए साथ ही देश की वर्तमान परिस्थितियों की ओर ध्यानाकर्षण कराते हुए कहा कि कोई भी देश वैचारिक सामंजस्यता से चलता है । परन्तु आज देश को जिद पर चलाने की कोशिश की जा रही है । देश को जिद की नहीं जुनून की आवश्यकता है क्योंकि जिद गलत है, जबकि जुनून कुछ पा लेने की चाहत होती है । अगर यह माना जा रहा है कि देश के एक हिस्से को हाशिए पर रखकर निर्वाचन सही है तो यह सोच गलत है । क्योंकि देश का हर क्षेत्र चाहे वो पहाड़ हो, हिमाल हो या तराई हो । इसे साथ लेकर चलना ही देश की दिशा तय कर सकता है ।


