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अधिकार की लड़ाई चलती रहती है इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता : राष्ट्रपति भंडारी

 

काठमान्डौ चैत्र २७ गते

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देश की समसामयिक विषय के सन्दर्भ में रविवार अपराह्न राष्ट्रपति निवास शीतल भवन में सम्माननीय राष्ट्रपति जी एवं बुद्धिजीवियों की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित किया गया । कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्र और विभिन्न जिला से आए हुए गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति थी । सभी वक्ताओं ने देश की समसामयिक स्थिति के संदर्भ में अपने विचार प्रस्तुत किए । चुनाव, सीमांकन, संघीयता, समावेशी, मधेश की समस्या, शिक्षा और सामाजिक परिस्थितियों से सम्बद्ध मसलों को उठाया गया । प्रायः सभी विज्ञों का मानना था कि देश की वर्तमान परिस्थिति में चुनाव तभी सम्भव है जब देश के हर हिस्से को समेटा जाय । मधेश देश का एक महत्तवपूर्ण हिस्सा है और इसे दरकिनार कर निर्वाचन सम्भव नहीं है ।
सम्माननीय राष्ट्रपति महोदया ने कहा कि हम सभी नेपाली है, और हमारे शरीर में जो रक्त बह रहा है वो एक ही है । इसलिए भावनात्मक दृष्टिकोण से देखा जाय तो कहीं कोई विभेद नहीं है । उन्होंने कहा कि जब मैं बीमार थी तो बहुतों ने मेरे लिए रक्तदान किया, जिसमें दलित भी थे, महिलाएँ भी थीं और पुरुष भी थे । पर कहीं कोई फर्क नहीं पड़ा । हम सब एक हैं और सबसे पहले हम नेपाली हैं । उन्होंने कहा कि आज जो दो धार दिख रहा है वह कहीं ना कहीं राजनीति की वजह से है जिसे हमें दूर करना होगा और आपस में समंजस्य बनाना होगा । उन्होंने आश्वासन दिया कि मैं अपने दायरे में रहकर हमेशा सही का साथ दूँगी किन्तु मेरी भी सीमाएँ हैं जिनसे अलग मैं कुछ नहीं कर सकती । संविधान के मसले पर उन्होंने कहा कि संविधान एक परिवर्तनशील दस्तावेज है । यह हमें मिला यह हमारी उपलब्धि है । अधिकार की लड़ाई तो चलती रहती है इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता पर अभी जो मिला है हमें उसका सम्मान करना चाहिए । निर्वाचन देश की आवश्यकता है । इसलिए सभी को मिलकर आगे आना होगा
कार्यक्रम में, जगदीश अग्रवाल(बारा), इजहार मिकरानी(रौतहट), डा.श्वेता दीप्ति(सप्तरी), डा. सुरेन्द्र झा(सिरहा), डा.सन्तकुमार दास(सप्तरी),पिंकी यादव(बारा), डा.राजेश अहिराज, हरिबाबु चौधरी, विश्वनाथ प्रसाद अग्रवाल(बारा) रामलखन हरिजन(नवलपरासी), रामनारायण देव (सप्तरी), उदितनारायन देव(सप्तरी), सुरेन्द्रलाभ(धनुषा),कासिन्दर यादव(सिरहा), सरोज राय(सर्लाही), दीपक चौधरी(मोरगं),डा.उमाशंकरप्रसाद साह(रौतहट),बीणा झा, उपेन्द्र झा,रानी शर्मा, खिमलाल देवकोटा, विजय महासेठ, डा. उषा झा ने अपने अपने विचार रखे ।

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