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राजपा नेपाल सवा करोड़ लोगों की आस्था का केन्द्र है : मनिषकुमार सुमन

 
पार्टी के नामकरण में ‘मधेश’ शब्द नहीं होने की वजह से अधिकांश लोग गलत ढंग से टीका टिप्पणी करने के लिए चुप नहीं बैठ हैं । मैं उन्हें संस्मरण कराना चाहूंगा कि नेपाल सद्भावना पार्टी में ‘मधेश’ शब्द का उल्लेख कहीं भी नहीं किया गया था । क्या वे मधेश की समस्याओं को वकालत नहीं करती थी ?
मनिषकुमार सुमन राजपा नेपाल के नेता हैं
मनिषकुमार सुमन राजपा नेपाल के नेता हैं
मनिषकुमार सुमन, काठमांडू | छह दलों के बीच जो एकीकरण हुआ है, वह एकीकरण मजबूरी में न होकर जनता की इच्छा के अनुसार हुआ है । दूसरी संविधान सभा चुनाव के दौरान जनता की चाहत थी कि मधेश की पार्टियां एकत्रित हो । विगत में हम लोग पृथक होकर चुनावी रणभूमि में उतरे थे । जनता का वोट मिला, फिर भी हम संख्यात्मक दृष्टि से पीछे पड़ गए । हम संविधान में शोषण, उत्पीड़न व वंचन में पड़े समुदायों की मांगों को स्थापित करने हेतु संघर्षरत रहे, आंदोलन भी किए और अभी भी आंदोलनरत हैं । आंदोलन के दो रास्ते होते हैं– एक है संसद् और दूसरा है सड़क । संसद का रास्ता बहुत ही सरल एवं सहज होता है । संसद को इतना अधिकार होता है कि वह ‘नर को नारी’ एवं ‘नारी को नर’ नहीं कह सकता । इसलिए हम लोग भी चाहते हैं कि संसदीय राजनीति में हमारी भागीदारी हो और गणपूरक संख्या के आधार पर देश की नीति–नियम को बदल ड़ाले । मधेशी जनता संविधान सभा की महत्ता को सही ढंग से नहीं समझ पाई । फलतः संख्यात्मक दृष्टि से हम पीछे पड़ गए और हमारी मांगें भी पूरी नहीं हो सकी । दूसरी तरफ सड़क एक ऐसा रास्ता है, जो राजा को हटा दिया यहाँ तक कि विघटित प्रतिनिधि सभा को भी पुनर्गठित कर दिया । इसी को मद्देनजर रखते हुए हमने भी सड़क का रास्ता अपनाया । परन्तु इसमें हमें काफी क्षति हुई । एक सौ चौविस मधेशी सपूतों की जाने गयीं । फिर भी हमें सफलता नहीं मिल सकी ।
मुझे लगता है कि मधेश के हर प्रशासक मधेशी हो, धोती लगाने वाले व्यक्ति और वहीं की भाषा बोलने वाले व्यक्ति राज्य संचालन करे । आशय यह है कि मधेश में जब तक हमारा चेहरा नहीं दिखाई देगा, तब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी । इन्हीं मांगों को स्थापित करने के लिए हम एकीकृत हुए हैं । इस एकीकरण से मधेश को सिर्फ बल ही नहीं मिला बल्कि सवा करोड़ लोगों की आस्था का केन्द्र भी बना । एकीकरण तो हुआ लेकिन बहुत चुनौतियां भी हैं हमारे सामने । उन चुनौतियों में सबसे बड़ी चुनौती है हमारे बीच में अन्तर घुलन होने का । लेकिन इस चुनौती को बहुत जल्द ही हल करने के लिए हम लोग दिनरात दिलो जान से जुटे हुए हैं ।
अब जहां तक सवाल है स्थानीय चुनाव का, तो मेरी मान्यता है कि कोई भी कार्य सोच समझ कर करना चाहिए । लेकिन यहां के नश्लवादी चिंतन के लोग हर कार्य जल्दबाजी में ही करते हैं । संविधान भी जल्दबाजी में ही जारी किया । परिणाम यह निकला कि एक सौ चौबिस मधेशी सपूतों की हत्या कर दी गई । मैं बल देकर करना चाहूंगा कि जब तक मेरी पत्नी, दादी को वंशज के आधार पर नागरिकता नहीं मिल जाती, मेरी मातृभाष में लिखा हुआ आवेदन को राजविराज नगरपालिका में मान्यता नहीं मिल जाती और मुझे अपने प्रदेश की सीमा परिवर्तन करने का अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक हम चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे और चुनाव होने भी नहीं देंगे ।
पार्टी के नामकरण में ‘मधेश’ शब्द नहीं होने की वजह से अधिकांश लोग गलत ढंग से टीका टिप्पणी करने के लिए चुप नहीं बैठ हैं । मैं उन्हें संस्मरण कराना चाहूंगा कि नेपाल सद्भावना पार्टी में ‘मधेश’ शब्द का उल्लेख कहीं भी नहीं किया गया था । क्या वे मधेश की समस्याओं को वकालत नहीं करती थी ? उन्हें समझना चाहिए कि राजपा नेपाल की पृष्ठभूमि ही मधेश है । इसके साथ–साथ हम पहाड़ के आदिवासी जनजातियों के साथ भी कोई भेदभाव नहीं रखते हैं । हम सभी को साथ–साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं और बढ़ेंगे भी । इसी प्रकार अन्य देशों में हो रहे सभी प्रकार के विभेद के विरुद्ध हम लोग लड़ते आए हैं, अपनी आवाज भी उठाते आ रहे हैं । हम किसी के साथ विभेद नहीं करते हैं । हमारी लड़ाई सिर्फ यहां कि सत्ता धारियों से है और हम सत्ता धारियों से अपना हिस्सा मांग रहे हैं ।
(मनिषकुमार सुमन राजपा नेपाल के नेता हैं ।)
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