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प्रशिक्षण के जरिये सामाजिक कुरीतियों को अंत किया जा सकता है : बीरबहादुर महतो

 

बीरबहादुर महतो, काठमांडू , ४ जून | भारतीय मूल निवासी सांस्कृतिक मञ्च भारत की एक प्रतिष्ठित संस्था है । यह संस्था महात्मा कबीर, भगवान बुद्ध व दलित के मसीहा डॉ. भीमराव अम्बेडकर के दर्शन को विश्वभर फैलाने हेतु विविध कार्यक्रमों का आयोजन करती आ रही है । इस संस्था के अध्यक्ष है भारत बिहार के शिवाजी राव और नेपाल के संयोजक है बीर बहादुर महतो । नेपाल में इस संस्था को आगे बढ़ाने के लिए उनका अहम योगदान रहा है ।
भारतीय मूल निवासी सांस्कृतिक मंच तथा नेपाल की रविदास सेवा समिति, मधेशी दलित गैर सरकारी संस्था महासंघ, राष्ट्रीय मुसहर उत्थान समाज के सहयोग में २०७४ जेष्ठ २१, २२, २३ व २४ गते काठमांडू के नक्शाल स्थित माहेश्वरी सेवा सदन में ‘अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक मूल निवासी प्रशिक्षण’ का आयोजन किया जा रहा है । इसी संदर्भ में हिमालिनी के सह–सम्पादक विनोदकुमार विश्वकर्मा ने अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक मूल निवासी प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक बीरबहादुर महतो से बातचीत की । पेश है बातचीत का सम्पादित अंश–
० भारतीय मूल निवासी सांस्कृतिक मंच के बारे में बताइये ? 
– यह संस्था भारत के मूल निवासी आदिवासी जनजाति, पिछड़ावर्ग व दलितों के धार्मिक–सांस्कृतिक व सामाजिक क्षेत्रों में लंबे अरसे से कार्य करती आ रही है । खासकर महात्मा कबीर, भगवान बुद्ध व डॉ. भीमराव अम्बेडकर के दर्शन को विश्वभर फैलाने के उद्देश्य से यह संस्था वकालत करती आ रही है । इसके साथ–साथ विविध प्रकार के प्रशिक्षणों का भी आयोजन किया जा रहा है । वर्तमान में हिन्दूवादी संस्कृति में ब्राह्मणवाद का हावी है और हो भी रहा है । फलतः हिन्दूवाद ही घातक सिद्ध हो रहा है । अतः प्रशिक्षण के जरिये हिन्दूवाद की विकृतियों और विसंगतियों के बारे में जानकारी दी जाती है ।
आप काठमांडू में आदिवासी जनजाति, पिछड़ावर्ग, दलित आदि समुदायों की भागीदारी में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किये हैं । इसकी वहज क्या है ? 
– देखिये, नेपाल व भारत की संस्कृति, सभ्यता में समानता है । नेपाल व भारत धर्मनिरपेक्ष होने के बावजूद भी इन दोनों देशों में हिन्दुओं की बहुलता है । और हिन्दूवादी विचारधारा हावी हो रही है । यह विचारधारा हर क्षेत्रों में हावी हो रही है । खासकर भारत में हिन्दूवादी विचारधारा में सुुधार लाने हेतु भारतीय मूल निवासी संस्कृतिक मंच द्वारा समय–समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन होता आ रहा है । दूसरी तरफ नेपाल में भी हिन्दूवादी विचारधारा हावी हो रही है । और आदिवासी जनजाति, दलित, पिछड़ावर्ग आदि समुदायों को हर क्षेत्रों में विभेद किया जा रहा है । हिन्दू धर्म के विभिन्न ग्रन्थों में लिखी हुई विचारों को व्यापक रुप से फैलाया जा रहा है । जबकि महात्मा कबीर, भगवान बुद्ध और डॉ. भीमराव अम्बेडकर के सिद्धान्तों और विचारों को गौण किया जा रहा है । खासकर नेपाल के आदिवासी जनजाति, दलित, पिछड़ावर्ग लगायत अन्य समुदायों में महात्मा कबीर, भगवान् बुद्ध तथा डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों एवं सिद्धान्तों की जानकारी देने के उद्देश्य से जेष्ठ २१, २२, २३ व २४ गते काठमांडू स्थित माहेश्वरी सेवा सदन में बृहत् रुप में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है ।
० प्रशिक्षण में कौन शामिल हो रहे हैं ? 
– प्रशिक्षण में खासकर महात्मा कबीर, भगवान बुद्ध व डॉ. भीमराव अम्बेडकर के सिद्धान्तों व विचारों के मानने वाले लोग ही शामिल हो रहे हैं । इसके साथ–साथ कबीर, बुद्ध व अम्बेडकर के फिलॉसफी में काम करने वाली संस्थाओं के लोगों की भी भागीदारी होंगी । प्रशिक्षण में भारत के १५० से २०० तथा नेपाल से सौ–से अधिक लोगों की भागीदारी होंगी । इस प्रशिक्षण में नेपाल पिछड़ावर्ग महासंघ, रविदास सेवा समिति, मधेशी दलित गैरसरकारी संस्था महासंघ, राष्ट्रीय मुसहर उत्थान समाज जैसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण देन रही हैं । इन संस्थाओं से जुड़े लोगों की भी भागीदारी रहेंगी ।
० प्रशिक्षण से क्या लाभ होगा ? 
– प्रशिक्षण से चेतना में वृद्धि होगी । इस प्रशिक्षण के जरिये नेपाली समाज में विद्यमान सामाजिक कुरीतियों को अंत किया जा सकता है । भारतीय मूल निवासी सांस्कृतिक मंच द्वारा आयोजित प्रशिक्षण से यहां के आदिवासी जनजाति, दलित, पिछड़ावर्ग आदि समुदायों के लोगों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा । कबीर, बुद्ध व अम्बेडकर के सिद्धान्तों व विचारों से अवगत होने का अच्छा मौका मिलेगा । इसके साथ–साथ यह प्रशिक्षण उन लोगों व संस्थाओं के लिए फलदायी सिद्ध होगा, जो सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध कार्य कर रहा हो ।
० अंत में आप कुछ कहना चाहेंगे ? 
– सर्वप्रथम, मैं हिमालिनी परिवार को धन्यवाद देना चाहूंगा, जिन्होंने संस्था की ओर से मेरे विचार को जनसमक्ष लाने का प्रयास किया है । इसके साथ–साथ नेपाल में आयोजित इस प्रशिक्षण को सफलता के साथ सम्पन्न करने हेतु तन, मन से सहयोग करने वाली संस्थाओं– नेपाल पिछड़ावर्ग महासंघ काठमांडू, रविदास सेवा समिति काठमांडू, मधेशी दलित गैर सरकारी संस्था महासंघ काठमांडू व राष्ट्रीय मुसहर उत्थान समाज धनुषा को हार्दिक धन्यवाद व आभार व्यक्त करना चाहूंगा । कबीर, बुद्ध व अम्बेडकर के फिलॉसफी में कार्य करने वाली संस्थाओं तथा प्रशिक्षण में सहभागी सम्पूर्ण प्रशिक्षणार्थियों को भी धन्यवाद देना चाहूंगा । और प्रशिक्षणार्थियों से आग्रह करना चाहूंगा कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान व दर्शन को आगे बढ़ाएं ।
(बीर बहादुर महतो, अन्तर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक मूल निवासी प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक हैं ।)

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