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तीसरा सोमवार : भोलेनाथ के लिए खास है ये सोमवार, करियर से लेकर धन तक का देते हैं आर्शीवाद

 

हिमालिनी डेस्क
काठमांंडू, २४ जुलाई ।
सावन के महीने में सबसे विशेष दिन कोई दिन होता है तो वो है सोमवार का दिन । सावन में पड़ने वाला हर सोमवार अपने साथ विशेष आर्शीवाद लेकर आता है । सावन के पहले और दूसरे सोमवार की तरह ही तीसरा सोमवार भी खास महत्व रखता है ।

क्या है महत्व

सावन का हर दिन महादेव का दिन है । सावन में बरसती हर बूंद में शवि का आर्शीवाद है । सावन का ये पूरा महीना कल्याणकारी होता है । सावन के तीसरे सोमवार का खास महत्व है क्योंकि भगवान शंकर का संख्या घ के साथ विशेष लगाव है ।

भगवान शिव सृष्टी के तीनों गुणों को नियंत्रित करते हैं । वो त्रिनेत्रधारी हैं । शिव जी की उपासना भी मूल रूप से तीन स्वरूपों में ही की जाती है । तीनों स्वरूपों की उपासना के लिए सावन का तीसरा सोमवार महत्वपूर्ण होता है ।

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होगी मनोकामनाएं पूर्णं

सावन के तीसरे सोमवार को भगवान शंकर के तीनों स्वरूपों की पूजा और उपासना कर के मनोकामनाओं की पूर्ति की जा सकती है ।

भगवान के तीन स्वरूप

आपने ये तो जान लिया कि सावन के तीसरे सोमवार का क्या महत्व है । अब ये भी जान लें कि भगवान शिव के वो तीन स्वरूप कौन से हैं, जिनकी उपासना करने से मनोकामना पूरी होती है ।

१. नील कंठ
समुद्र मंथन में हलाहल विष निकला तो भगवान शिव ने मानवता की रक्षा के लिए पी लिया । उन्होंने विष को अपने कंठ में ही रोक लिया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया । कंठ नीला होने के कारण ही उन्हें नील कंठ कहा जाता है । इस स्वरूप की उपासना करने से शत्रु, षडयंत्र, तंत्रमंत्र आदि का असर नहीं होता । सावन के तीसरे सोमवार को नीलकंठ पर गन्ने का रस चढ़ाएं । इसके बाद नीलकंठ स्वरूप के मंत्र ‘ऊं नमो नीलकंठाय’ का जाप करें । ग्रहों की हर समस्या खत्म हो जाएगी ।

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२. नटराज
शिव ने ही दुनिया में नृत्य, संगीत और कला का अविष्कार किया है । नृत्य कला के तमाम भेद और सूक्ष्म चीजें भी शिव जी ने अपने शिष्यों को बताई हैं । उन्होंने ऐसे नृत्यों का सृजन किया, जिसका असर हमारे मन, शरीर और आत्मा पर पड़ता है । इसलिए भगवान शिव को नटराजन भी कहते हैं । जीवन में सुख और शांति के लिए नटराज स्वरूप की पूजा की जाती है । ज्ञान, विज्ञान, कला, संगीत और अभिनय के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए इनकी पूजा उत्तम होती है । सावन के सोमवार को घर में सफेद रंग के नटराज की स्थापना सर्वोत्तम है । इनकी उपासना में सफेद रंग के फूल अर्पित करें ।

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३. महामृत्युंजय
भगवान शिव के बारे में कहा जाता है कि उन्हें मृत संजीवनी विद्या का ज्ञान है । यानी वो सेहत संबंधित किसी भी समस्या या अकाल मृत्यु जैसी समस्या को भी दूर कर सकते हैं । भगवान शिव के इसी तीसरे रूप की पूजा सावन के तीसरे सोमवार को होती है । शिवजी इस स्वरूप में अमृत का कलश लेकर अपने भक्त की रक्षा करते हैं । इस रूप की उपासना से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है । शिव का मृत्युंजय स्वरूप आयु, रक्षा, अच्छी सेहत और मनोकामनाओं को पूरा करने वाला है । तीसरे सोमवार के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, जलधारा अर्प्ति करें । इसके बाद शिवलिंग की अर्ध परिक्रमा करें और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करें । मृत्युंजय स्वरूप का मंत्र है ‘ऊं हौं जूं सः’

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