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मधेशयाें काे तुम्हारा संड़ा हुआ चावल नहीं, उसे उनकी खाेई हुयी धर्ती चाहिये : अब्दुल खानं

 
 
अब्दुल खानं- नेपालगंज। लगातार बर्षात के वजह से अाज पुरे मधेश मे तबाही मची हुई है।लाेग अपना जान माल सब कुछ खाेने पर वीबस हाे गए है। यह समस्या मधेशी के के लिऐ काेई पहलीवार नही है ऐसा झेलना ताे उनकी अादत हो गई है, कभी बाढ़ से झेलना, तो कभी अाग से खेलना, कभी ठंढा से निपटना इनका जीवन वन चुका है।

अाज पुरे मधेश मे एक हलचल सी मची हुई है, कहीं कहीं सनसनाहट, कही दर्दभरी चीत्कार सुनकर शत्रु का भी कलेजा दहल जाता है। वह दर्दनाक मंजर जब लाशाे काे दफनाने के लिए कहीं सुखि जमीन न हाे,जल से मरने वालाे काे पुन: जल समाधि देना पडे। काेई पानी मे बह जाता, कोई मकान मे दबके दम ताेड देता ताे काई भुख से अपनीजीवन खाे देता है |  प्रजा काे वैसी राज की क्या जरुरत जाे उसके काम न आसके, वह राज कैसा जाे प्रजारजंन न हाे, हितकारिणी न हाे ? यही वजह है कि अाज मधेशी देश में मरता है और विदेश मे भी मरता  है। किसीको काेई प्रवाह नही, वैसी विभेदकारी राज ब्यवस्था हमे नही चाहिए | हमे अपनी खोयी हुई राष्ट्रीयता वापस चाहिए। हमे जनक,बुद्ध ,सल्हेश अाैर नवाबाे का वह कल्याणकारी शासन चाहिये राहत नही।

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मधेशयाें जब राेते चिल्लाते अाैर गिडगिडाते है तब इनकी दर्दभरी अावाज नेपाली शासकाे के महलाे से टकराती है |  और फिर यह नालायक सरकार राहत के नाम पर संडा हुआ चावलं अपने गुलामाे के लिऐ भेज देता है | उसके बाद हमारे अपने जमात के चमचे लाेग उसी पे राजनिती करना सुरु करते है, फाेटाे सेसन ताे अाम फेशन साे बन गया है। शासक लाेग उसी राहत का बही-खाता मधेशयाें के नाम तैयार करते है |  मधेशयाें भारी उद्दार करने का ढाेल खुब बजाते है, इन सारी समस्या से जुझने के वाद अान्दोलन के नाम पर शासक वर्ग बुलेट से सारा खुन निकाल लेते है अाैर वहीं सारी चिज राजनिति के अाड मे कुचल के रह जाती है।

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अब मधेशयाें काे तुम्हारा राहत नही, उनकी अपनी अाजादी कि जरुरत है। राहत दिखाकर उनका सब कुछ लुट चुका है। अाज उनकी हालात” ऐक बकरी काे हरा चारा दिखाकर बुला ताे लिया अाैर उसके थन मे रहा सहा दु:ध निचाेड लिया अाैर विना चारा दिये भगा दिया।” वही हालत नेपाली सम्राज्य मे मधेशियों का है।

मधेशियों काे अब उनका अात्मा सम्मान चाहिऐ, उनकी अपनी खाेई हुयी धर्ती चाहिये, उनकाे अपनी अाजादी चाहिये, मधेशयाे काे दृघाकालिन निकास चाहिऐ सिर्फ राहत नही। मधेशयाे की अाजादी ही उनके सारे समस्याअाें का निदान है तभी हमलाेग समस्या अनुसार सडक,पुल बना सकेगें अाैर किसी की बन्दिस नही हाेगी,अब मधेशयाें काे उसी दिनका ईन्तजार है।

अब्दुल खानं ,प्रवक्ता,स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन ।

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