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ब्रिक्‍स सम्‍मेलन द्वारा पाकिस्‍तानी आतंकी गुटों का नाम लिए जाने का रुस ने किया स्‍वागत

 

१२ सितम्बर

रूस ने शियामेन में हुए ब्रिक्‍स सम्‍मेलन की घोषणा व पाकिस्‍तानी आतंकी गुटों का नाम लिए जाने का स्‍वागत किया है।

रूस के अधिकारी सर्गेइ कर्मालिटो ने टाइम्‍स ऑफ इंडिया को बताया, ‘हमने घोषणा को देख और आतंकी संगठनों का नाम लेना महत्‍वपूर्ण कदम है और हम उम्‍मीद करते हैं कि इन आतंकी संगठनों के खिलाफ कडी कार्रवाई की जाएगी।‘ बता दें कि ब्रिक्स देशों ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों का नाम अपने घोषणापत्र में शामिल किया।

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ब्रिक्‍स में पठानकोट व उरी आतंकी हमले का दोषी जैश का नाम लिए जाने के बाद भारत का अगला कदम इसके चीफ मौलाना मसूद अजहर को संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा आतंकी घोषित करवाना होगा। चीन की ओर से यह प्रयास जारी है कि संरा सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंधित लिस्‍ट में अजहर का नाम शामिल न हो। भारतीय अधिकारियों को अब उम्‍मीद है कि रूस इस काम में भारत की मदद करेगा और बीजिंग को इसके लिए समझाएगा कि अजहर मामले में वह भारत का समर्थन करे।

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राजनयिक सूत्रों के अनुसार, रूस का भी यह मानना है कि अजहर मामले पर जल्‍द ही चीन भारत के समर्थन में आएगा। नाम न बताने की शर्त पर एक सूत्र ने बताया कि बीजिंग यह जानता है कि इसके पास अजहर मामले में सीमित ताकतें हैं। जाहिर है कि एनएसजी और सीपीइसी इससे अलग मुद्दे हैं।‘

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज ने इस साल के शुरुआत में सार्वजनिक तौर पर एनएसजी में भारत की सदस्‍यता के समर्थन के लिए रूस से चीन को मनाने की अपील की थी। हालांकि अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया में तालिबान को शामिल करने के अपने प्रयासों के साथ ही रूस इस प्रक्रिया में भारत को शामिल करने का प्रयास कर रहा है।

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