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सूर्य पर शुक्र का काला धब्बा, जीवन में फिर नहीं दिखेगा यह नजारा

शुक्र ग्रह सूर्य के सामने से गुजरते हुए एक ख़ूबसूरत नजारा पेश कर रहा है. पृथ्वी से देखने से सूरज पर एक छोटे काले धब्बे जैसा दिख रहा है. सूर्य के सामने से शुक्र का ये परागमन एक दुर्लभ खगोलीय घटना है जो अगली बार 105 वर्ष बाद देखने के मिलेगी.

नासा की तस्वीरें

सूर्य पर शुक्र का सायाये तस्वीर अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने जारी की है. इसे पृथ्वी से 36 हज़ार किलोमीटर की ऊंचाई से लिया गया है.

इस घटना के कुछ बेहतरीन तस्वीरें अमरीकी अंतरिक्ष संस्था नासा ने जारी की हैं. नासा की सोलर डायनामिक्स ऑब्जरवेटरी यानि एसडीओ पृथ्वी से 36 हज़ार किलोमीटर की दूरी से सूर्य का अध्ययन करती है.

खगोल शास्त्री डॉक्टर लिका गुहाथाकुर्ता ने कहा, “एसडीओ की सहायता से हमें शुक्र के परागमन के बहुत ही विस्तार वाली तस्वीरें मिल रही हैं. यहां से मिली तस्वीरें एचडी टीवी पर दिखने वाली तस्वीरें से 10 गुना बेहतर होती हैं. ऐसा हम अपने जीवन में दोबारा नहीं देखेंगे.”

वैज्ञानिक परागमन के इस अवसर का प्रयोग शुक्र ग्रह के जटिल वायुमंडल का अध्ययन करने के लिए कर रहे हैं. शोधकर्ताओं के पास विशेष उपकरण हैं जिनके सहारे वे सूर्य के डिस्क पर सीधे नज़र रख रहे हैं.

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हालांकि वैज्ञानिक आम जनता से बहुत ही ध्यानपूर्वक इस नजारे को देखने की सलाह दे रहे हैं. सूर्य पर सीधे देखने से आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है और कई बार लोग अंधे भी हो सकते हैं.

क्यों है दुर्लभ ये नजारा?

शुक्र परागमन 243 वर्षों में करीब चार बार होता है. इस लंबे अंतराल की वजह ये है कि पृथ्वी और शुक्र का कक्ष यानि परिक्रमा करने रास्ता अलग-अलग है ये एक लंबे अरसे के बाद ही एक दुर्लभ खगोलीय संयोग के बाद एक सीध में आते हैं.

शुक्र पारिगमन के देखते लोगदुनिया भर में लोग शुक्र पारिगमन को देख रहे हैं. अगली बार ये मौका 2017 में मिलेगा.

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टेलीस्कोप के अविष्कार के बाद ये नजारा अब तक सात बार ही दर्ज किया गया है.

इससे पहले आए शुक्र परागमन को 1631, 1639, 1761, 1769, 1874, 1882 और 2004 में देखा गया है.

ये परागमन जोड़े के रूप आठ वर्ष के अंतराल पर दिखता है जैसे कि पिछली बार ये 2004 में दिखा था और अब 2012 में दिख रहा है. अगली बार 2117 में दिखेगा और फिर ठीक उसके आठ वर्ष बाद यानि 2025 में. उसके बाद फिर लंबा इंतजार.

लेकिन तब तक को इस समय जीवित सभी व्यक्ति शायद मर चुके होंगे.

‘नेताओं’ पर भी पड़ेगा असर इस कुदरती नजारे में खगोलविदों के साथ ज्योतिषियों की भी दिलचस्पी रही। इस खगोलीय घटना पर रिसर्च करने वाले भारतीय विद्या भवन के ज्योतिष संस्थान के संस्थापक ज्योर्तिविद के.एन. राव के अनुसार सन 2004 से पहले सूर्य में शुक्र के प्रवेश की घटना 1876 में हुई थी। 1877 से 2004 के बीच किसी खगोलविद या ज्योतिषियों को इस प्रकार की घटना का अनुभव न होने के कारण इस बारे में कोई रिसर्च नहीं हो सकी। राव के मुताबिक सूर्य और पृथ्वी के बीच शुक्र ग्रह के आने की घटना केवल वृष या वृश्चिक राशि में ही होती है।

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पिछले छह हजार सालों में यह घटना वृष राशि में जून में और 31 बार दिसंबर के महीने में वृश्चिक में घटी है। इस तरह जब भी शुक्र ने सूर्य में प्रवेश किया तब राजनैतिक और सामाजिक बदलावों के अलावा शिक्षा के क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ा है, लेकिन साथ ही इस प्रकार की घटना ने कृषि उत्पादन पर भी असर डाला है। कुछ मौकों पर भारी प्राकृतिक आपदाएं भी आई थीं। राव के मुताबिक शासक वर्ग पर इस घटना का प्रतिकूल असर पड़ सकता है।  bbc $ others

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