Fri. Sep 18th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) पर प्रतिबंध

 

17feb

पाकिस्तान ने भारत सहित वैश्विक बिरादरी को चौंकाते हुए हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) पर प्रतिबंध लगा दिया है. हालांकि, पिछले 15 सालों में चार बार जमात-उद-दावा के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन इस बार मामला अलग है क्योंकि पाकिस्तान ने अब एक अध्यादेश के जरिए आतंकरोधी कानून (एटीए) में बदलाव कर सईद के संगठनों पर प्रतिबंध लगाया है.

इस अध्यादेश में कहा गया है कि सरकार पाकिस्तान में स्थित उन व्यक्तियों और संगठनों के कार्यालयों और बैंक खातों को सील करेगी जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत प्रतिबंधित किया गया है. इस अध्यादेश पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद बुधवार को जेयूडी और एफआईएफ से जुड़े कई मदरसों और डिस्पेंसरियों को सील कर दिया गया. हाफिज के ये दोनों ही संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन माने जाते हैं जो समाजसेवा की आड़ में आतंकियों की फंडिंग करते हैं.

यह भी पढें   अर्थमंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले भारत की तीन दिवसीय दौरे पर

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के मुताबिक सरकार के इस फैसले के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का दबाव है. दुनियाभर में वित्तीय मामलों की निगरानी करने वाली एफएटीएफ दुनिया के दिग्गज देशों द्वारा बनाई गई एक संस्था है जो संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के साथ मिलकर काम करती है. यह संस्था वैश्विक स्तर पर बैंकों के लिए मानक निर्धारित करती है. साथ ही अलग-अलग देशों द्वारा आतंकियों की फंडिंग और मनी लॉन्डरिंग रोकने के लिए उठाये गए कदमों की समीक्षा भी करती है.

यह भी पढें   वित्तमंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले और निर्मला सीतारमण बीच मुलाकात

एफएटीएफ की अगली बैठक इस महीने की 18 तारीख से पेरिस में होने वाली है जिसमें आतंकियों की फंडिंग और मनी लॉन्डरिंग रोकने के मामले में कमजोर प्रदर्शन के चलते पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डाले जाने का खतरा मंडरा रहा है. संस्था की इस सूची में आने वाले देश वित्तीय मामलों को लेकर दुनिया में अलग-थलग पड़ जाते हैं. इन देशों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन में कड़ी जांच से गुजरना पड़ता है, साथ ही इनके लिए विदेशी निवेश और कर्ज लेने में भी मुश्किलें बढ़ जाती हैं. इस समय ईरान, इराक, युगांडा और उत्तर कोरिया जैसे देश इसमें शामिल हैं. पाकिस्तान भी 2012 से लेकर 2015 तक यानी तीन साल इस सूची में रह चुका है. 2015 में चीन की मदद से वह इससे बाहर निकला था.

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com